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द्वापर युग में जब महाभारत का युद्ध चल रहा था, तब विभीषण की आयु **लाखों वर्ष (लगभग 10 से 20 लाख वर्ष या उससे भी अधिक)** रही होगी।
इसके पीछे का पौराणिक कारण यह है:
* **युग चक्र की समयावधि:**
* रामकथा त्रेता युग में हुई थी। त्रेता युग की कुल अवधि 12,96,000 वर्ष होती है।
* त्रेता युग समाप्त होने के बाद द्वापर युग आया, जिसकी कुल अवधि 8,64,000 वर्ष है।
* **अमरता (चिरंजीवी) का वरदान:**
विभीषण सप्त-चिरंजीवियों (सात अमर विभूतियों) में से एक हैं। उन्हें अमरता का वरदान प्राप्त था, जिस कारण वे त्रेता युग से द्वापर युग तक जीवित रहे।
* **महाभारत में उल्लेख:**
महाभारत के सभा पर्व में उल्लेख मिलता है कि जब पांडवों ने 'राजसूय यज्ञ' का आयोजन किया था, तब सहदेव दक्षिण दिशा के अभियानों के दौरान लंका पहुँचे थे। उस समय लंका के राजा विभीषण ही थे और उन्होंने सहदेव का स्वागत करके पांडवों के यज्ञ के लिए कई अमूल्य उपहार भेजे थे।
चूँकि विभीषण त्रेता युग के आरंभ/मध्य से द्वापर युग के अंत (महाभारत काल) तक जीवित थे, इसलिए पौराणिक गणना के अनुसार द्वापर युग के अंत में उनकी आयु **कई लाख वर्ष** हो चुकी थी।
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