भारत के उड़ीसा राज्य के एक गांव है या कब्रगाह, कहां गए बरकानी के आदिवासी जिन्हें सरकार विस्थापित कर रही है ? !
हाल ही में (अप्रैल 2025 में) बरकानी गांव एक बेहद संवेदनशील और दुखद घटना के कारण चर्चा में आया था, जिसके बाद वहां के हालात काफी तनावपूर्ण हो गए थे। आइए समझते हैं कि पूरा मामला क्या है और वहां के आदिवासी इस समय कहां और किस स्थिति में हैं:
## मामला क्या है? (विस्थापन का मुख्य कारण)
राउरकेला स्टील प्लांट (RSP) और दक्षिण पूर्व रेलवे (SER) द्वारा दुमेरता (Dumerta) तक एक **नई डबल रेलवे लाइन** बिछाने का काम चल रहा है।
* **दशकों पुराना विवाद:** आदिवासियों का कहना है कि यह जमीन लगभग सात दशक पहले (1956 के आसपास) ली गई थी, लेकिन पुनर्वास (Rehabilitation) और मुआवजे के वादे आज तक पूरे नहीं हुए।
* **अधूरी मांगें:** साल 2006 में प्रशासन ने वादा किया था कि जो जमीनें उपयोग में नहीं आई हैं, वे आदिवासियों को वापस दी जाएंगी और बचे हुए विस्थापितों को रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरियां मिलेंगी। आदिवासियों का आरोप है कि ये वादे सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गए।
## 19 अप्रैल 2025 की दुखद घटना
जब रेलवे लाइन बिछाने के लिए जेसीबी (JCB) मशीनें बरकानी गांव पहुंचीं, तो स्थानीय आदिवासियों ने अपनी आजीविका और जमीन बचाने के लिए इसका पुरजोर विरोध किया।
* इस विरोध प्रदर्शन के दौरान एक **आदिवासी ग्रामीण (एतो एक्का - Eto Ekka)** की जेसीबी मशीन की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई, और एक अन्य ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गए।
* इस हादसे के बाद पूरा गांव आक्रोशित हो उठा। ग्रामीणों ने शव को उठाने से मना कर दिया और भीषण गर्मी में भी कई घंटों तक विरोध प्रदर्शन पर बैठे रहे। इस दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच हिंसक झड़प भी हुई, जिसमें कई पुलिसकर्मी और प्रशासनिक अधिकारी घायल हुए।
## सरकार और प्रशासन ने क्या कदम उठाए?
इस घटना के बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने स्वतः संज्ञान (Suo-Motu Cognizance) लिया और जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक (SP) और स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAIL) को नोटिस जारी कर रिपोर्ट मांगी।
प्रशासनिक स्तर पर समझौते के बाद फिलहाल स्थिति को इस प्रकार संभाला गया:
* **काम पर रोक:** प्रशासन ने लिखित आश्वासन दिया है कि जब तक आदिवासियों की पुनर्वास और मुआवजे से जुड़ी पुरानी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक इस क्षेत्र में **परियोजना का काम निलंबित (Suspend)** रहेगा।
* **मुआवजा:** मृतक एतो एक्का के परिवार को ₹20 लाख (कुल सहायता) का मुआवजा, उनकी पत्नी को अनुकंपा के आधार पर नौकरी और दोनों बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने का वादा किया गया है।
* **कमेटी का गठन:** विस्थापन से जुड़ी समस्याओं के निवारण के लिए 'पुनर्वास एवं परिधीय विकास सलाहकार समिति' (RPDAC) की बैठक बुलाने का निर्णय लिया गया है।
### निष्कर्ष (अभी आदिवासी कहां हैं?)
बरकानी के आदिवासी **कहीं गए नहीं हैं, वे आज भी अपनी जमीन पर डटे हुए हैं और शांतिपूर्ण तरीके से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।** हालांकि, प्रशासनिक कार्रवाई और कुछ स्थानीय नेताओं की गिरफ्तारियों के बाद वहां एक डर और सन्नाटे का माहौल जरूर बन गया था, जिसे मीडिया रिपोर्ट्स में 'कब्रगाह जैसा माहौल' कहकर दर्शाया गया है।
आदिवासी समाज आज भी अपनी जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए कानूनी और सामाजिक लड़ाई लड़ रहा है ताकि उन्हें अपनी ही जमीन से बेघर न होना पड़े।
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