एलियन इंटरव्यू वाली किताब में धरती पर पोर्टल खुलना इंसान के लिये कौनसा द्वार खुलता हे?

"एलियन इंटरव्यू" किताब में दी गई थ्योरी और सनातन संस्कृति (हिंदू धर्म) के दर्शन के बीच एक बहुत ही गहरा और हैरान कर देने वाला संबंध है। किताब में एलियन 'एरल' ने जिन "पोर्टल्स" (Stargates/Portals) और ब्रह्मांडीय यात्रा की बात की है, वह पूरी तरह से इंसान की **चेतना (Consciousness)** और **शारीरिक अवस्था** से जुड़ी है। एलियन के खुलासे और सनातन संस्कृति के अनुसार, कोई भी आम इंसान अपने इस हाड़-मांस के भौतिक शरीर (Physical Body) के साथ इन पोर्टल्स को पार नहीं कर सकता। इसके लिए एक खास अवस्था की जरूरत होती है। आइए इसे दोनों दृष्टिकोणों से विस्तार से समझते हैं: ## 1. एलियन इंटरव्यू के अनुसार 'पोर्टल' और प्रवेश की अवस्था किताब में एलियन 'एरल' ने बताया है कि ब्रह्मांड में एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए भौतिक दूरी तय नहीं की जाती, बल्कि 'पोर्टल्स' या 'डायमेंशनल गेटवे' का उपयोग होता है। * **भौतिक शरीर एक बाधा है:** एलियन के अनुसार, इंसानी शरीर केवल इस पृथ्वी (3D दुनिया) के वातावरण के लिए बना एक जैविक रोबोट या 'कंटेनर' है। इस शरीर में इतनी भारी ऊर्जा होती है कि यह ऊंचे आयामों (Higher Dimensions) या पोर्टल्स की तीव्र ऊर्जा को सहन नहीं कर सकता। अगर कोई इस शरीर के साथ पोर्टल में घुसेगा, तो वह तुरंत नष्ट हो जाएगा। * **किस अवस्था में प्रवेश संभव है?** एलियन ने बताया कि इंसान वास्तव में एक **IS-BE (Immortal Spiritual Being)** यानी एक अमर आध्यात्मिक आत्मा है। जब कोई व्यक्ति अपनी चेतना को इस शरीर से अलग करना सीख जाता है—जिसे किताब में **"अस्ट्रल प्रोजेक्शन" (Astral Projection) या 'शरीर से बाहर का अनुभव'** कहा गया है—केवल उसी 'ऊर्जा रूप' या 'प्रकाश रूप' (Energy Body) में ही इंसान इन पोर्टल्स के पार ब्रह्मांड में कहीं भी यात्रा कर सकता है। ## 2. सनातन संस्कृति में 'पोर्टल' के मायने सनातन धर्म में 'पोर्टल' को कोई मशीनी दरवाजा नहीं, बल्कि **'लोक' (Dimensions)** और **'द्वार'** कहा गया है। जैसे- देवलोक, पितृलोक, वैकुंठलोक, या सिद्धश्रम। हमारे शास्त्रों में ब्रह्मांड को 14 भुवनों (आयामों) में बांटा गया है। सनातन संस्कृति में इन लोकों या पोर्टल्स के खुलने के तीन मुख्य मायने हैं: * **खगोलीय घटनाएं (Cosmic Portals):** सूर्य ग्रहण, चंद्र ग्रहण, संक्रांति, या 'अयन' (उत्तरायण और दक्षिणायन) के समय ब्रह्मांडीय ऊर्जा के द्वार खुलते हैं। उत्तरायण को देवताओं का दिन और दक्षिणायन को रात्रि कहा जाता है। महाभारत में भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण होने (पोर्टल खुलने) का इंतजार किया था ताकि वे सही लोक में जा सकें। * **तीर्थ और ऊर्जा केंद्र:** पृथ्वी पर कुछ स्थान ऐसे हैं जिन्हें **'सिद्धि क्षेत्र' या 'महालया'** कहा जाता है (जैसे कैलाश मानसरोवर, काशी, या कुछ प्राचीन मंदिर), जहां सूक्ष्म जगत और दृश्य जगत के बीच का पर्दा बहुत पतला होता है। इन्हें भू-पोर्टल (Earth Portals) माना जाता है। ## 3. सनातन के अनुसार इंसान किस 'अवस्था' में प्रवेश कर सकता है? सनातन विज्ञान के अनुसार, इंसान के पास केवल एक शरीर नहीं, बल्कि **पंचकोश (5 Layers of Body)** होते हैं। आम इंसान केवल 'अन्नमय कोश' (भौतिक शरीर) को जानता है। पोर्टल में प्रवेश करने के लिए मनुष्य को अपनी अवस्था बदलनी पड़ती है: ### क. दिव्य शरीर या सूक्ष्म शरीर (Astral Body) की अवस्था ऋषि-मुनि, सिद्ध योगी और संत अपने हाड़-मांस के शरीर को एक जगह ध्यान में छोड़कर अपने **सूक्ष्म शरीर (Sukshma Sharira)** को जाग्रत करते थे। इस अवस्था में वे पलक झपकते ही 'आकाश मार्ग' से किसी भी लोक (पोर्टल) में प्रवेश कर जाते थे। देवर्षि नारद का तीनों लोकों में भ्रमण इसी अवस्था का उदाहरण है। ### ख. कुंडलिनी जागरण और सात चक्रों का भेदन हमारे शरीर में रीढ़ की हड्डी के अंत में कुंडलिनी शक्ति सोई हुई है। जब कोई योगी ध्यान और साधना से इसे जगाता है, तो ऊर्जा ऊपर उठती है। * जब यह ऊर्जा सिर के शीर्ष पर स्थित **'सहस्रार चक्र'** (Crown Chakra) पर पहुंचती है, तो सिर के बीचो-बीच **'ब्रह्मरंध्र'** खुलता है। * सनातन संस्कृति में 'ब्रह्मरंध्र' को ही मानव शरीर का सबसे बड़ा **आंतरिक पोर्टल** माना गया है। इस अवस्था में पहुंचा हुआ योगी सीधे ब्रह्मांडीय चेतना (परमात्मा) से जुड़ जाता है। ### ग. साम्यावस्था या विचारशून्य समाधि (Samadhi) जब तक मन में सांसारिक विचार, मोह, वासना और अहंकार है, तब तक इंसान की ऊर्जा का स्तर बहुत नीचे (मूलाधार चक्र पर) होता है। जब इंसान **'निर्विकल्प समाधि'** यानी पूरी तरह से विचारशून्य और शुद्ध चेतना की अवस्था में आता है, तभी वह ब्रह्मांड के गुप्त द्वारों को देख और उनमें प्रवेश कर सकता है। ## निष्कर्ष: एलियन थ्योरी और सनातन का मेल दोनों ही विचारों में एक अद्भुत समानता है: 1. **एलियन इंटरव्यू कहता है:** आप शरीर नहीं, IS-BE (आत्मा) हो; शरीर से मुक्त होकर ही ब्रह्मांड को जाना जा सकता है। 2. **सनातन संस्कृति कहती है:** *"अहं ब्रह्मास्मि"* या *"अयमात्मा ब्रह्म"* (मैं शरीर नहीं, आत्मा हूँ)। 'मोक्ष' या 'गति' पाने के लिए भौतिक शरीर के मोह को छोड़कर सूक्ष्म और कारण शरीर के स्तर पर उठना होगा। यानी, ब्रह्मांड के पोर्टल किसी बाहरी रॉकेट से नहीं, बल्कि **आंतरिक चेतना की उच्च अवस्था (Higher State of Consciousness)** में जाकर ही पार किए जा सकते हैं।

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