भारत के प्रत्येक राज्यों में मेट्रो सिटी में आग से बढ़ती घटनाओं पर रोक न होने के कारण और फायर एनओसी न होना 2019 से कितने राज्यों में आग की घटनाएं छोटे शहर में बढ़ रही है ?

भारत में बड़े मेट्रो शहरों (जैसे दिल्ली, मुंबई) के साथ-साथ अब **छोटे शहरों (टियर-2 और टियर-3 सिटीज)** में भी आग लगने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों और हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 2019 के बाद से यह समस्या पूरे देश में एक गंभीर संकट बन चुकी है। ## 1. 2019 से छोटे शहरों में आग की बढ़ती घटनाएं (राज्यों का विश्लेषण) NCRB और अग्निशमन विभागों के डेटा के अनुसार, भारत के लगभग **सभी प्रमुख राज्यों (20 से अधिक राज्यों)** के छोटे शहरों और कस्बों में 2019 के बाद से आग लगने की घटनाएं और मौतें लगातार बढ़ रही हैं। विशेष रूप से निम्नलिखित राज्यों के छोटे शहरों में सबसे ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं: * **गुजरात (राजकोट, सूरत, जामनगर):** गुजरात के राजकोट में 2024 में हुआ 'टीआरपी गेम ज़ोन' अग्निकांड (33 मौतें) इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। इसके अलावा सूरत के कोचिंग सेंटरों और कपड़ा मिलों वाले छोटे शहरों में लगातार घटनाएं बढ़ी हैं। * **महाराष्ट्र (नागपुर, नासिक, ठाणे, छत्रपति संभाजीनगर):** मुंबई के बाहर मौजूद इन टियर-2 शहरों में औद्योगिक और आवासीय आग की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। NCRB के अनुसार, महाराष्ट्र देश में आग से होने वाली मौतों में शीर्ष राज्यों में रहा है। * **उत्तर प्रदेश (झांसी, मेरठ, कानपुर, नोएडा, गाजियाबाद):** हाल ही में झांसी के मेडिकल कॉलेज में नवजात वार्ड में लगी आग और गाजियाबाद/नोएडा की बहुमंजिला सोसायटियों/कमर्शियल कॉम्प्लेक्सों में लगी आग ने बड़े सवाल खड़े किए हैं। यूपी के छोटे शहरों में अवैध प्लास्टिक और पटाखा फैक्ट्रियां इसका बड़ा कारण हैं। * **मध्य प्रदेश (इंदौर, भोपाल, जबलपुर):** इंदौर और जबलपुर के निजी अस्पतालों और होटलों में आग की कई बड़ी घटनाएं 2019 के बाद दर्ज की गई हैं। * **हरियाणा और पंजाब (लुधियाना, अमृतसर, गुरुग्राम, फरीदाबाद):** इन राज्यों के कपड़ा उद्योगों और केमिकल गोदामों वाले छोटे शहरों में आग लगने की घटनाएं बहुत आम हो गई हैं। > **डेटा नोट:** नवीनतम NCRB रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर साल लगभग **5,900 से अधिक बड़ी आग की घटनाएं** दर्ज की जा रही हैं, जिनमें **5,800 से अधिक लोगों की जान** जा रही है। चिंता की बात यह है कि कुल मौतों में से **60% से अधिक मौतें आवासीय और कमर्शियल इमारतों** में हो रही हैं, जिनमें छोटे शहरों का हिस्सा लगातार बढ़ रहा है। > ## 2. छोटे शहरों में आग बढ़ने और 'फायर NOC' न होने के मुख्य कारण मेट्रो शहरों की तरह छोटे शहरों में भी 'फायर एनओसी' (Fire NOC) न होने और आग पर काबू न पा पाने के पीछे गंभीर कारण हैं: ### क) बुनियादी ढांचे (Infrastructure) का भारी अभाव * **अग्निशमन विभाग के पास आधुनिक साधनों की कमी:** मेट्रो शहरों (जैसे दिल्ली/मुंबई) के पास तो फिर भी हाइड्रोलिक लिफ्ट और आधुनिक गाड़ियां हैं, लेकिन छोटे जिलों और कस्बों के दमकल विभागों के पास बुनियादी गाड़ियां और पानी के टैंकर तक पर्याप्त नहीं होते। * **संकरी सड़कें और पानी के स्रोतों की कमी:** छोटे शहरों के पुराने बाजार और रिहायशी इलाके बेहद संकरे होते हैं। आग लगने पर दमकल की गाड़ी घटना स्थल तक पहुंच ही नहीं पाती। इसके अलावा, शहरों में 'फायर हाइड्रेंट' (सड़कों पर पानी के पाइप) का नेटवर्क बिल्कुल गायब है। ### ख) प्रशासनिक ढिलाई और 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) की अनदेखी * **फायर एनओसी के बिना संचालन:** छोटे शहरों में चलने वाले 80% से अधिक अस्पताल, होटल, मैरिज हॉल, गेमिंग ज़ोन और कोचिंग सेंटर बिना 'फायर एनओसी' के चल रहे हैं। राजकोट गेमिंग ज़ोन हादसे की जांच में भी यह सामने आया था कि प्रबंधन ने कभी फायर एनओसी के लिए आवेदन ही नहीं किया था। * **भ्रष्टाचार और लोकल नेक्सस:** छोटे शहरों में नगर पालिका और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी कड़ाई से जांच नहीं करते। वे बिना सुरक्षा मानकों को देखे या मामूली जुर्माना/रिश्वत लेकर कमर्शियल गतिविधियों की अनुमति दे देते हैं। ### ग) बदलती जीवनशैली और बिजली का बढ़ता लोड (Electrical Load) * **शॉर्ट सर्किट (가장 बड़ा कारण):** छोटे शहरों में तेजी से विकास हुआ है। लोग हर घर और दुकान में एसी (AC), बड़े रेफ्रिजरेटर और भारी मशीनें लगा रहे हैं, लेकिन वहां की **बिजली की वायरिंग आज भी 20-30 साल पुरानी** है। यह पुरानी वायरिंग बढ़ा हुआ लोड नहीं झेल पाती और गर्मियों में शॉर्ट सर्किट होकर भीषण आग का रूप ले लेती है। * **ज्वलनशील सामग्री का उपयोग:** आधुनिक इंटीरियर के नाम पर दुकानों, होटलों और अस्पतालों में प्लास्टिक, फाइबर, फॉल्स सीलिंग और फोम का अंधाधुंध इस्तेमाल हो रहा है, जो आग को चंद सेकंड में फैला देते हैं। ### समाधान क्या है? जब तक **नेशनल बिल्डिंग कोड (NBC) 2016** के नियमों को छोटे शहरों की नगर पालिकाओं में सख्ती से लागू नहीं किया जाता, और बिना फायर एनओसी के चल रही व्यावसायिक इमारतों को तुरंत सील करने की कार्रवाई नहीं होती, तब तक इन हादसों को रोकना नामुमकिन है।

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