20 दिन बाद मिली बबीता उत्तराखंड के बुग्याल में उत्तराखंड एक सुंदर पहाड़ी प्रदेश है जहां पर लाखों पर्यटक आते जाते हैं ?

उत्तराखंड के बुग्यालों और सुदूर पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यटकों या ट्रैकर्स का लापता होना और सुरक्षा मानकों की अनदेखी वास्तव में एक गंभीर चिंता का विषय है। पहाड़ों की खूबसूरती जितनी आकर्षित करती है, वहां का मौसम और भूगोल उतना ही अप्रत्याशित और खतरनाक होता है। बिना पंजीकरण और बिना तैयारी के निर्जन क्षेत्रों में जाना न केवल पर्यटकों की जान जोखिम में डालता है, बल्कि खोज और बचाव (Search and Rescue) दलों के लिए भी बड़ी चुनौती बनता है। उत्तराखंड सरकार ने हाल ही में (मई-जून 2026 में) ट्रैकिंग और पर्वतारोहण के लिए एक सख्त **'रेगुलेटरी फ्रेमवर्क'** और नीतियां तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है, जिसमें ट्रैकर्स का पंजीकरण, स्वास्थ्य प्रमाणपत्र और गाइडों के लिए ट्रेनिंग अनिवार्य करने का प्रस्ताव है। इस व्यवस्था को और अधिक पुख्ता, सुरक्षित और राजस्व (Income) बढ़ाने वाला बनाने के लिए निम्नलिखित व्यावहारिक सुझाव अपनाए जा सकते हैं, जिन्हें दुनिया के अन्य देशों ने सफलतापूर्वक लागू किया है: ## 1. सुरक्षा और ट्रैकिंग प्रबंधन के लिए मुख्य सुझाव * **अनिवार्य डिजिटल पंजीकरण और बायोमेट्रिक चेकपोस्ट:** हर ट्रेक रूट के शुरुआती बिंदु (Base Camp) पर डिजिटल और बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन अनिवार्य हो। जब तक कोई ट्रैकर अपनी वापसी दर्ज नहीं कराता, तब तक सिस्टम में उसका स्टेटस 'एक्टिव' दिखना चाहिए। * **सटीक ट्रैकिंग के लिए GPS/सटेलाइट ट्रैकर (RFID/SOS Tags):** निर्जन और बिना नेटवर्क वाले क्षेत्रों में जाने वाले प्रत्येक दल या ट्रैकर को वन विभाग या टूर ऑपरेटर की ओर से एक सैटेलाइट-बेस्ड SOS डिवाइस या RFID टैग दिया जाना चाहिए। किसी भी दुर्घटना की स्थिति में इससे तुरंत लोकेशन का पता लगाया जा सकता है। * **लोकल गाइड और पोर्टर अनिवार्य करना:** किसी भी हाई-अल्टीट्यूड (उच्च हिमालयी) क्षेत्र या बुग्याल में बिना प्रमाणित स्थानीय गाइड के जाने पर पूर्ण प्रतिबंध होना चाहिए। स्थानीय गाइड मौसम और रास्तों को बेहतर समझते हैं। * **अनिवार्य चिकित्सा प्रमाण पत्र (Medical Fitness) और बीमा:** ट्रैक पर जाने से ठीक पहले बेस कैंप पर बीपी, ऑक्सीजन लेवल की जांच हो और हर ट्रेकर का 'माउंटेन रेस्क्यू इंश्योरेंस' (Himalayan Rescue Insurance) अनिवार्य किया जाए, ताकि रेस्क्यू का खर्च बीमा कंपनी उठाए, न कि सरकार पर बोझ पड़े। ## 2. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाए जा रहे सफल मॉडल दुनिया के कई देशों ने एडवेंचर टूरिज्म को बेहद सुरक्षित और मुनाफेदार (High Income) बनाया है: ### नेपाल (TIMS और स्थानीय परमिट प्रणाली) * **कार्यप्रणाली:** नेपाल ने **TIMS (Trekkers' Information Management Systems)** कार्ड लागू किया है। इसके अलावा, कई संवेदनशील क्षेत्रों में अकेले (Solo) ट्रैकिंग पर पूरी तरह प्रतिबंध है; आपको लाइसेंस प्राप्त गाइड ले जाना ही होगा। * **कमाई और सुरक्षा:** परमिट फीस से सरकार को भारी राजस्व मिलता है और हर ट्रैकर का डेटा सेंट्रलाइज्ड होता है। ### स्विट्जरलैंड और आल्प्स क्षेत्र (REGA और डिजिटल मैपिंग) * **कार्यप्रणाली:** यहाँ **REGA (Swiss Air-Rescue)** नाम की एक गैर-लाभकारी संस्था काम करती है। ट्रैकर्स एक ऐप डाउनलोड करते हैं। यदि वे किसी संकट में हैं, तो ऐप का 'SOS' बटन दबाते ही स्विस रेस्क्यू हेलीकॉप्टर उनकी सटीक जीपीएस लोकेशन पर पहुंच जाता है। * **कमाई और सुरक्षा:** लोग सालाना रेस्क्यू सब्सक्रिप्शन (Patronage) लेते हैं, जिससे करोड़ों डॉलर का फंड बनता है। ### न्यूजीलैंड (Department of Conservation - DOC मॉडल) * **कार्यप्रणाली:** न्यूजीलैंड में 'ग्रेट वॉक्स' (Great Walks) के लिए महीनों पहले ऑनलाइन बुकिंग होती है। ट्रैक की एक निश्चित 'कैरिंग कैपेसिटी' (क्षमता) तय है, उससे ज्यादा लोगों को अनुमति नहीं मिलती। हर ट्रैक पर वन विभाग के 'हट्स' (Huts) और वॉर्डन होते हैं, जो शाम को चेक करते हैं कि बुकिंग वाले सभी लोग सुरक्षित पहुंचे या नहीं। * **कमाई और सुरक्षा:** पर्यावरण भी सुरक्षित रहता है और बुकिंग फीस से सरकार को बड़ी कमाई होती है। ## 3. त्वरित कार्रवाई (Quick Action) और जान-माल की रक्षा के उपाय * **SDRF और स्थानीय टास्क फोर्स की चौकियां:** संवेदनशील बुग्यालों के पास सीजन के दौरान 'मिनी रेस्क्यू स्टेशन' स्थापित हों, जहां सैटेलाइट फोन और प्राथमिक चिकित्सा किट के साथ SDRF या स्थानीय प्रशिक्षित युवाओं की टीम तैनात रहे। * **ड्रोन आधारित निगरानी:** खराब मौसम या लापता होने की स्थिति में थर्मल-कैमरा (Thermal Camera) से लैस ड्रोन का उपयोग किया जाए, जो घने जंगलों या कोहरे में भी इंसानी शरीर की गर्मी को पहचान कर उसकी लोकेशन बता सकते हैं। * **गैर-कानूनी एंट्री पर भारी जुर्माना:** बिना परमिट या बिना गाइड के प्रतिबंधित रास्तों पर जाने वालों और अवैध रूप से पर्यटकों को ले जाने वाली एजेंसियों पर भारी आर्थिक जुर्माना और जेल का प्रावधान होना चाहिए। **निष्कर्ष:** यदि उत्तराखंड सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर की तर्ज पर **"नो परमिट, नो ट्रैकिंग"** और **"अनिवार्य लोकल गाइड"** के नियम को सख्ती से जमीन पर लागू करती है, तो इससे न केवल बबीता जैसी अन्य घटनाओं को समय रहते रोका जा सकेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और इको-टूरिज्म से राज्य की आय में भी भारी बढ़ोतरी होगी।

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