विश्व के देश में जब भी समाज में नफरत द्वेष घृणा बड़ी है एकता कम देश समाज बिखरा और टूटा है ?

जब भी किसी समाज में आपसी भाईचारा कम हुआ है और नफरत, द्वेष या घृणा बढ़ी है, वह देश या राज्य अंदर से खोखला होकर बिखर गया है। इतिहास से लेकर आज (2026) के वैश्विक हालातों तक, यह नियम हर युग में सटीक बैठता है। आइए इसे कुछ ऐतिहासिक उदाहरणों, 2026 की वर्तमान वैश्विक स्थिति और इस पूरे घटनाक्रम में युवाओं की भूमिका के जरिए समझते हैं: ## 1. इतिहास के उदाहरण: जब नफरत ने देशों को तोड़ा * **सोवियत संघ (USSR) का विघटन (1991):** आंतरिक राजनीतिक असंतोष, विभिन्न गणराज्यों के बीच नस्लीय और सांस्कृतिक दूरियां और आपसी अविश्वास के कारण इतना बड़ा महाशक्ति देश 15 स्वतंत्र देशों में बिखर गया। * **युगोस्लाविया का दर्दनाक अंत (1990 का दशक):** यह समाज में नफरत का सबसे भयानक उदाहरण है। सर्ब, क्रोएट और बोस्नियाई समुदायों के बीच जातीय और धार्मिक घृणा इस कदर बढ़ी कि वहां भीषण गृहयुद्ध हुआ और युगोस्लाविया पूरी तरह टूटकर कई छोटे देशों (जैसे सर्बिया, क्रोएशिया, बोस्निया आदि) में बंट गया। * **रवांडा का नरसंहार (1994):** हुतु और तुत्सी समुदायों के बीच रेडियो और प्रचार माध्यमों से फैलाई गई घृणा के कारण कुछ ही महीनों में लाखों लोग मारे गए। समाज ऐसा बिखरा कि उसे वापस सामान्य होने में दशकों लग गए। ## 2. साल 2026 की वैश्विक स्थिति: कौन एकजुट है और कौन बिखर रहा है? ग्लोबल पीस इंडेक्स (GPI) और सोशल प्रोग्रेस इंडेक्स 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया इस समय "महान विखंडन" (Great Fragmentation) के दौर से गुजर रही है। ### क) 2026 में एकजुट और मजबूत सामाजिक ताने-बाने वाले देश: इन देशों में उच्च सामाजिक सुरक्षा, मजबूत कानून व्यवस्था और आपसी विश्वास (Social Cohesion) के कारण एकता बनी हुई है: * **आइसलैंड और न्यूजीलैंड:** ये देश 2026 में भी दुनिया के सबसे शांत और एकजुट देशों में शीर्ष पर हैं। यहां अपराध दर बेहद कम है और समाज में गहरा सामंजस्य है। * **नीदरलैंड और डेनमार्क:** सामाजिक समानता, जीवन की उच्च गुणवत्ता और मजबूत संस्थानों के कारण यहां आंतरिक बिखराव न के बराबर है। * **सिंगापुर और जापान:** एशिया में इन देशों ने अपनी सांस्कृतिक विरासत और कड़े नियमों के बल पर आंतरिक एकता को बहुत मजबूती से थाम रखा है। ### ख) 2026 में बिखराव और गृहयुद्ध झेल रहे देश: नफरत, जातीय संघर्ष और राजनीतिक अस्थिरता के कारण इन देशों का सामाजिक और राष्ट्रीय ढांचा टूट रहा है: * **सूडान:** यहां चल रहे भीषण गृहयुद्ध ने पूरे समाज को कबीलों और गुटों में बांट दिया है, जिससे लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं। * **इथियोपिया:** अदीस अबाबा (केंद्र सरकार) और विभिन्न क्षेत्रीय मिलिशिया (जैसे अमहारा और ओरोमो गुटों) के बीच जातीय संघर्ष के कारण देश आंतरिक रूप से बिखर रहा है। * **म्यांमार:** सैन्य तख्तापलट के बाद से शुरू हुआ गृहयुद्ध और विभिन्न जातीय समूहों (जैसे रोहिंग्या और अन्य विद्रोही गुटों) के बीच अविश्वास देश को लगातार कमजोर कर रहा है। * **यूक्रेन और मध्य पूर्व (गाजा/इजराइल/इरान संघर्ष):** बाहरी और आंतरिक युद्धों के कारण इन क्षेत्रों का सामाजिक ताना-बाना पूरी तरह लहूलुहान हो चुका है। * **अमेरिका और कुछ यूरोपीय देश:** भले ही ये पूरी तरह बिखरे नहीं हैं, लेकिन वैचारिक ध्रुवीकरण और हिंसक प्रदर्शनों (Violent Demonstrations) के कारण इनके समाज में आंतरिक दरारें (Polarization) काफी गहरी हुई हैं। ## 3. युवा क्यों खड़े कर रहे हैं आंदोलन और क्यों कर रहे हैं देश को लीड? आज दुनिया भर में (चाहे वह पर्यावरण आंदोलन हो, बेरोजगारी के खिलाफ प्रदर्शन हो, या सामाजिक न्याय की मांग) युवा वर्ग राष्ट्रीय एकता और सुधार के नारों के साथ सबसे आगे खड़ा है। इसके पीछे कुछ बेहद ठोस मनोवैज्ञानिक और व्यावहारिक कारण हैं: * **भविष्य की चिंता और असुरक्षा:** समाज में जब नफरत बढ़ती है, तो उसका सबसे पहला शिकार आर्थिक अवसर और रोजगार होते हैं। युवा जानते हैं कि अगर देश बिखरेगा, तो उनका भविष्य (करियर, शिक्षा, सुरक्षा) बर्बाद हो जाएगा। इसलिए वे देश को बचाने के लिए सड़कों पर उतरते हैं। * **सोशल मीडिया और वैश्विक जुड़ाव:** आज की युवा पीढ़ी (Gen Z और मिलेंनियल्स) तकनीकी रूप से आपस में जुड़ी हुई है। वे दुनिया के दूसरे हिस्सों के सफल और शांत समाजों को देखते हैं और अपने देश में भी वैसी ही स्थिरता चाहते हैं। वे नफरत की पुरानी राजनीति को खारिज कर रहे हैं। * **पुरानी राजनीति से मोहभंग:** युवा देख रहे हैं कि पारंपरिक राजनेता अक्सर धर्म, जाति या नस्ल के नाम पर समाज को बांटकर अपनी रोटियां सेकते हैं। इस 'बांटो और राज करो' की नीति के खिलाफ युवा 'राष्ट्रीय एकता' और 'विकास' को अपना मुख्य हथियार बना रहे हैं। * **परिवर्तन की अदम्य ऊर्जा:** युवाओं में यथास्थिति (Status Quo) को चुनौती देने का साहस होता है। जब व्यवस्थाएं पंगु हो जाती हैं, तो युवा ही आंदोलन खड़ा करके समाज को एक नई दिशा देते हैं। > **निष्कर्ष:** इतिहास और वर्तमान (2026) दोनों गवाह हैं कि नफरत किसी भी साम्राज्य या देश को दीमक की तरह खा जाती है। ऐसे दौर में युवाओं का राष्ट्रीय एकता के नारों के साथ आगे आना इस बात का प्रतीक है कि समाज की रक्षा केवल और केवल आपसी सद्भाव, समावेशी विकास और एकजुटता से ही संभव है। अगर आपको हमारे ब्लॉक अच्छे लगते हैं जरूर अगला ब्लॉक पड़े और लाइक शेयर करें!

टिप्पणियाँ