थमेंगी विकास की रफ्तार बढ़ेगी महंगाई की मार ?
विश्व आर्थिक मंच (**World Economic Forum - WEF**) द्वारा जारी ताज़ा **चीफ इकोनॉमिस्ट आउटलुक (Chief Economists Outlook)** में दुनिया भर के शीर्ष अर्थशास्त्रियों ने महंगाई को लेकर गंभीर चिंता जताई है। पिछले कुछ महीनों में भू-राजनीतिक तनावों के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था का परिदृश्य काफी बदल गया है।
ताज़ा सर्वे के अनुसार, महंगाई (Inflation) को लेकर अर्थशास्त्रियों का रुख इस प्रकार है:
## 1. महंगाई बढ़ने की आशंका (गहराती चिंता)
सर्वे में शामिल **94% अर्थशास्त्रियों** का मानना है कि अगले 12 महीनों में वैश्विक स्तर पर महंगाई और बढ़ेगी। अर्थशास्त्रियों के बीच इस बात को लेकर लगभग पूर्ण सहमति है कि महंगाई अब अल्पावधि (Short-term) के लिए सबसे बड़ा वैश्विक आर्थिक जोखिम बनकर उभरी है।
## 2. महंगाई बढ़ने के मुख्य कारण
अर्थशास्त्रियों ने बढ़ती महंगाई के पीछे मुख्य रूप से सप्लाई-चेन में आ रही रुकावटों और वैश्विक तनावों को जिम्मेदार ठहराया है:
* **ऊर्जा और खाद्य पदार्थों की कीमतें:** पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी संकट और **स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz)** के बंद होने से ईंधन (ईंधन, फर्टिलाइजर) और अनाज की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे इनकी कीमतें तेजी से भाग रही हैं।
* **बढ़ता रक्षा बजट:** आईएमएफ और डब्ल्यूईएफ दोनों के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि दुनिया भर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण देश अपना **डिफेंस बजट (रक्षा खर्च)** बढ़ा रहे हैं, जो शॉर्ट-टर्म में महंगाई को और हवा दे रहा है।
## 3. अलग-अलग क्षेत्रों (Regions) पर असर
महंगाई का असर पूरी दुनिया में एक जैसा नहीं रहेगा। अर्थशास्त्रियों ने विभिन्न देशों के लिए यह अनुमान लगाया है:
| क्षेत्र/देश | अर्थशास्त्रियों का अनुमान |
|---|---|
| **भारत (India)** | भारत की आर्थिक विकास दर मजबूत रहेगी, लेकिन **61% अर्थशास्त्रियों** का अनुमान है कि भारत को अगले साल **उच्च या अत्यधिक उच्च महंगाई** का सामना करना पड़ सकता है। |
| **अमेरिका (US)** | यहाँ भी खपत और निवेश अच्छा है, लेकिन आधे से अधिक अर्थशास्त्री मानते हैं कि अमेरिका में महंगाई उच्च स्तर पर बनी रहेगी। |
| **यूरोप (Europe)** | यूरोप सबसे नाजुक स्थिति में है, जहाँ ऊर्जा संकट के कारण **स्टैगफ्लेशन (Stagflation - आर्थिक मंदी के साथ उच्च महंगाई)** का खतरा मंडरा रहा है। |
| **दक्षिण-पूर्वी एशिया** | इस क्षेत्र के **62% अर्थशास्त्रियों** का मानना है कि ऊर्जा आयात पर निर्भरता के कारण यहाँ ईंधन की कीमतें काफी बढ़ेंगी। |
## केंद्रीय बैंकों के लिए चुनौती
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि महंगाई के इस नए उछाल के कारण केंद्रीय बैंकों (जैसे RBI या US Fed) के लिए ब्याज दरों में कटौती करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। उन्हें महंगाई पर लगाम लगाने के लिए अपनी सख्त मौद्रिक नीतियों (Tight Monetary Policies) को लंबे समय तक जारी रखना पड़ सकता है, जिससे वैश्विक विकास दर थोड़ी धीमी (Slowing down) होने की आशंका है।
**संक्षेप में कहें तो,** वैश्विक अर्थशास्त्रियों का स्पष्ट संदेश है कि दुनिया अभी "महंगाई के चक्रव्यूह" से बाहर नहीं निकली है, बल्कि हालिया युद्ध और सप्लाई-चेन के संकटों ने इसे और अधिक अनिश्चित और महंगा बना दिया है।
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