भारत देश में विभिन्न धर्म होने के कारण भारतीय पंजीकृत शादियां 2019 से विदेशी मूल महिला से कितनी शादियां अब तक हुई है ?

भारत में 2019 से अब तक (2026) विदेशी मूल की महिलाओं के साथ हुई पंजीकृत (Registered) शादियों का कोई **एकत्रित, केंद्रीयकृत या निश्चित आधिकारिक आंकड़ा (Exact Number) उपलब्ध नहीं है।** भारत सरकार का विदेश मंत्रालय (MEA) या गृह मंत्रालय इस तरह का कोई विशिष्ट राष्ट्रीय डेटाबेस सार्वजनिक रूप से जारी नहीं करता है, जिसमें विशेष रूप से विदेशी महिलाओं और भारतीय पुरुषों के विवाह पंजीकरण की सटीक संख्या दर्ज हो। इस विषय से जुड़े कानूनी और व्यावहारिक पहलुओं को नीचे दिए गए बिंदुओं से समझ सकते हैं: ### 1. विवाह पंजीकरण राज्य का विषय है भारत में शादियों का पंजीकरण केंद्रीय स्तर पर न होकर राज्य सरकारों के **'रजिस्ट्रार ऑफ मैरिज' (Registrar of Marriages)** कार्यालयों द्वारा किया जाता है। यदि कोई भारतीय नागरिक किसी विदेशी महिला से विवाह करता है, तो उनका पंजीकरण संबंधित राज्य के नियमों के तहत 'विशेष विवाह अधिनियम, 1954' (Special Marriage Act) या 'विदेशी विवाह अधिनियम, 1969' (Foreign Marriage Act) के अंतर्गत होता है। चूंकि यह डेटा अलग-अलग राज्यों और जिलों में बिखरा हुआ है, इसलिए पूरे देश का संकलित आंकड़ा मिलना मुश्किल है। ### 2. विभिन्न धर्म और विवाह कानून जैसा कि आपने ज़िक्र किया कि भारत में विभिन्न धर्म हैं, तो भारतीय कानूनों के अनुसार विदेशी नागरिकों की शादी के नियम इस प्रकार काम करते हैं: * **हिंदू विवाह अधिनियम, 1955:** हाल ही में अदालतों (जैसे राजस्थान हाई कोर्ट) ने यह स्पष्ट किया है कि यदि दोनों पक्ष हिंदू रीति-रिवाज से शादी करते हैं, तो साथी के विदेशी होने के बावजूद इस एक्ट के तहत शादी रजिस्टर हो सकती है। * **विशेष विवाह अधिनियम, 1954:** अधिकांश अंतर-सांस्कृतिक या विदेशी नागरिकों के साथ होने वाले विवाह इसी अधिनियम के तहत पंजीकृत किए जाते हैं, क्योंकि इसमें धर्म परिवर्तन की आवश्यकता नहीं होती। इसमें 30 दिन का नोटिस पीरियड अनिवार्य होता है। ### 3. सरकार का ध्यान 'विदेशी दूल्हों' (NRI/OCI) पर अधिक है संसद और विदेश मंत्रालय में अक्सर जो आंकड़े या बिल पेश किए जाते हैं, वे मुख्य रूप से **प्रवासी भारतीय (NRI) या विदेशी पुरुषों द्वारा भारतीय महिलाओं से की जाने वाली शादियों और उनसे जुड़े विवादों/धोखाधड़ी** से संबंधित होते हैं। उदाहरण के लिए: * सरकार ने 'अनिवासी भारतीय (NRI) विवाह पंजीकरण विधेयक' पर काम किया है, ताकि भारतीय महिलाओं के अधिकारों की रक्षा की जा सके। * विदेशी मूल की महिलाओं के भारतीय पुरुषों से विवाह के मामलों में कानूनी विवाद या शिकायतें तुलनात्मक रूप से कम दर्ज होती हैं, इसलिए इस विशिष्ट श्रेणी का डेटा संसद में भी अलग से कम ही रेखांकित किया जाता है। ### 4. वर्तमान बदलाव (2024-2026) हाल के वर्षों में कुछ राज्यों ने विदेशी नागरिकों के विवाह पंजीकरण को लेकर नियमों में ढील दी है या उन्हें अधिक व्यवस्थित किया है। उदाहरण के लिए, उत्तराखंड में लागू हुए समान नागरिक संहिता (UCC) के तहत अब यह प्रावधान किया गया है कि यदि पति या पत्नी में से कोई एक विदेशी नागरिक है, तो वे सीधे रजिस्ट्रार कार्यालय जाकर ऑफलाइन माध्यम से भी जरूरी दस्तावेजों (जैसे वैध पासपोर्ट, वीज़ा, और नागरिकता प्रमाणपत्र) की जांच करवाकर पंजीकरण करा सकते हैं। संक्षेप में कहें तो, भारत में हर साल हजारों की संख्या में विदेशी मूल की महिलाएं (विशेषकर पड़ोसी देशों जैसे नेपाल, बांग्लादेश या फिर पश्चिमी देशों से) भारतीय पुरुषों से विवाह करती हैं, लेकिन **2019 से अब तक का कोई संकलित सरकारी आंकड़ा सार्वजनिक पटल पर मौजूद नहीं है।**

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