- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
जब पूरी धरती पर हिमयुग (Ice Age) आता है, तो वाकई चारों तरफ बर्फ की मोटी चादर बिछ जाती है। लेकिन एक बात समझना जरूरी है: **हिमयुग रातों-रात नहीं आता।** इसे आने में हजारों साल का समय लगता है।
इतने लंबे समय के दौरान पशु-पक्षियों को संभलने का मौका मिल जाता है। वे खुद को बचाने के लिए मुख्यतः तीन तरीके अपनाते हैं:
### 1. महा-पलायन (Mass Migration) – भूमध्य रेखा की ओर दौड़
हिमयुग के दौरान पूरी पृथ्वी बर्फ से ढक तो जाती है, लेकिन पूरी धरती पर बर्फ की मोटाई एक जैसी नहीं होती।
* उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव (Polar Regions) पूरी तरह जम जाते हैं।
* ऐसे में पशु और पक्षी **भूमध्य रेखा (Equator/Tropical Regions)** की ओर चले जाते हैं। यह पृथ्वी का वो मध्य हिस्सा है जहाँ सूरज की किरणें सीधी पड़ती हैं। हिमयुग के चरम पर भी यह इलाका पूरी तरह बर्फ से नहीं ढकता था, बल्कि यहाँ का मौसम आज के ठंडे देशों जैसा हो जाता था। सारे जीव यहीं आकर सिमट जाते थे।
### 2. खुद को बदलना (Evolution)
जो जानवर भाग नहीं पाते थे, वे खुद को ठंड के अनुकूल ढाल लेते थे। हजारों सालों में उनके शरीर की बनावट बदल जाती थी।
* **मोटे फर और चर्बी:** जीवों के शरीर पर ऊन या मोटे फर की परत उग आती थी (जैसे **वूली मैमथ** या **वूली राइनो**)। उनकी त्वचा के नीचे चर्बी (Blubber) की मोटी परत जम जाती थी जो ठंड को अंदर नहीं जाने देती थी।
* **विशाल शरीर:** ठंडे इलाकों में रहने वाले जीवों का शरीर धीरे-धीरे बड़ा हो जाता था, क्योंकि बड़ा शरीर गर्मी को बेहतर तरीके से रोक कर रख सकता है।
### 3. रेफ्यूजिया (Refugia) – कुदरती पनाहगाहें
वैज्ञानिकों ने खोजा है कि हिमयुग के दौरान भी धरती पर कुछ ऐसी जगहें थीं जहाँ आस-पास की तुलना में मौसम थोड़ा गर्म था। इन्हें **'रेफ्यूजिया' (Refugia)** या 'सुरक्षित द्वीप' कहा जाता है।
* ये गहरी घाटियाँ, गुफाएँ या ज्वालामुखी के आस-पास के इलाके होते थे जहाँ पृथ्वी की आंतरिक गर्मी के कारण बर्फ नहीं जमती थी।
* पशु-पक्षी और पौधे इन छोटे-से सुरक्षित हिस्सों में हजारों सालों तक जिंदा रहे और जैसे ही हिमयुग खत्म हुआ, वे फिर से पूरी धरती पर फैल गए।
> **एक दिलचस्प बात:** जो पक्षी उड़ सकते थे, उनके लिए हिमयुग से बचना सबसे आसान था। वे बर्फबारी शुरू होते ही उड़कर गर्म द्वीपों या भूमध्य रेखा के जंगलों में चले जाते थे। आज भी पक्षी जो हर साल सर्दियों में 'माइग्रेशन' (प्रवासन) करते हैं, वह उनकी इसी पुरानी आदत का हिस्सा है।
>
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
टिप्पणियाँ