भारतीय निवेशकों ने डेट फंड से खींचे हाथ ?

भारतीय डेट फंडों (Debt Funds) से जो पैसा बाहर निकल रहा है (outflows), उसमें **भारतीय संस्थागत निवेशक (Domestic Institutional Investors) और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs/FIIs) दोनों ही शामिल हैं।** हालांकि, दोनों के ऐसा करने की वजहें और तरीके बिल्कुल अलग हैं। आइए इसे आसान शब्दों में समझते हैं कि कौन और क्यों पैसा निकाल रहा है: ### 1. भारतीय संस्थागत निवेशक (Domestic Corporate & Institutional Investors) AMFI (Association of Mutual Funds in India) के हालिया आंकड़ों के अनुसार, डेट फंडों (विशेषकर लिक्विड फंड, ओवरनाइट फंड और शॉर्ट-ड्यूरेशन फंड) से हर कुछ महीनों में जो लाखों करोड़ रुपये का उतार-चढ़ाव दिखता है, उसके पीछे मुख्य रूप से **भारतीय कॉर्पोरेट्स और बड़े बैंक** होते हैं। * **वजह:** ये भारतीय कंपनियां डेट फंड का इस्तेमाल अपना एक्स्ट्रा कैश कुछ दिनों या हफ्तों के लिए पार्क करने के लिए करती हैं। जब भी एडवांस टैक्स चुकाने की तारीख आती है, तिमाही/साल का अंत होता है या कंपनियों को अपने बिजनेस ऑपरेशन्स के लिए नकदी की जरूरत होती है, तो वे एक साथ भारी मात्रा में पैसा निकाल लेती हैं। यह एक रूटीन साइकिल (Corporate Treasury Cycle) है। ### 2. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs/FIIs) हाल के महीनों में विदेशी निवेशकों ने भी भारतीय डेट (बॉन्ड) और इक्विटी मार्केट से बड़े पैमाने पर हाथ खींचे हैं। * **वजह:** * **कमजोर होता रुपया:** भारतीय रुपये में डॉलर के मुकाबले आई गिरावट की वजह से विदेशी निवेशकों का मुनाफा कम हो जाता है, इसलिए वे भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। * **वैश्विक ब्याज दरें और भू-राजनीति:** वैश्विक स्तर पर (विशेषकर अमेरिका में) ब्याज दरें ऊंची बनी हुई हैं और मध्य-पूर्व में तनाव जैसी भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं हैं। ऐसे में विदेशी निवेशक उभरते बाजारों (Emerging Markets) से पैसा निकालकर अमेरिका जैसे सुरक्षित ठिकानों (US Treasuries) में डाल रहे हैं। ### खुदरा (Retail) भारतीय निवेशकों का क्या रुख है? अगर बात आम भारतीय निवेशकों (Retail Investors) की करें, तो वे डेट फंड्स से ज्यादा **इक्विटी (शेयर बाजार) और SIP** की तरफ झुके हुए हैं। > **बदला हुआ नियम:** अप्रैल 2023 से भारत सरकार ने डेट म्यूचुअल फंड्स पर मिलने वाले इंडेक्सेशन के टैक्स फायदे (LTCG Benefit) को खत्म कर दिया था। अब डेट फंड से होने वाली कमाई पर निवेशक के टैक्स स्लैब के हिसाब से ही टैक्स लगता है। इस वजह से कई आम भारतीय निवेशकों ने डेट फंड्स के बजाय बैंक FD या सीधे सरकारी बॉन्ड्स (G-Secs) का रुख कर लिया है। > **संक्षेप में कहें तो:** जो बड़ी बिकवाली या आउटफ्लो दिख रहा है, वह वैश्विक कारणों से **विदेशी निवेशकों (FPIs)** द्वारा और अपनी तात्कालिक जरूरतों के कारण **भारतीय कॉर्पोरेट्स** द्वारा की जा रही है, न कि आम भारतीय निवेशकों के किसी डर या पैनिक की वजह से। क्या आप अपने किसी खास डेट फंड निवेश को लेकर चिंतित हैं या टैक्स नियमों के बारे में कुछ और जानना चाहते हैं?

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