आखिर खेतों की फसल में खड़ा गेहूं का दान क्यों सिकुड़ रहा है ?

खेतों में खड़ी गेहूं की फसल का दाना सिकुड़ना (Grain Shriveling) इस समय किसानों के लिए एक बेहद गंभीर समस्या बना हुआ है। कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे कोई एक कारण नहीं, बल्कि **जलवायु परिवर्तन (Climate Change)** से लेकर **खेती के तरीकों** तक कई प्रमुख कारक जिम्मेदार हैं। आइए इसके पीछे के मुख्य वैज्ञानिक और व्यावहारिक तथ्यों को समझते हैं: ## 1. टर्मिनल हीट वेव (Terminal Heat Wave) — सबसे बड़ा कारण गेहूं का दाना सिकुड़ने की सबसे मुख्य वजह **'तर्मिनल हीट'** यानी फसल पकने के अंतिम चरण (मार्च-अप्रैल के दौरान) में अचानक तापमान का बहुत अधिक बढ़ जाना है। * **तापमान का गणित:** गेहूं की फसल में जब दाना बन रहा होता है (Milking & Grain Filling Stage), तब आदर्श तापमान **20^\circ\text{C} से 25^\circ\text{C}** होना चाहिए। लेकिन ग्लोबल वार्मिंग के कारण यदि तापमान अचानक **30^\circ\text{C} से 35^\circ\text{C}** या उससे ऊपर चला जाता है, तो पौधा 'स्ट्रेस' (तनाव) में आ जाता है। * **असर:** तेज गर्मी के कारण पौधे के भीतर का स्टार्च और नमी तेजी से सूख जाती है। दाने को पूरा पोषण मिलने से पहले ही वह असमय पक जाता है, जिससे दाना छोटा, हल्का और सिकुड़ा हुआ रह जाता है। ## 2. 'वेस्टर्न डिस्टर्बेंस' (पश्चिमी विक्षोभ) का गायब होना या देरी से आना मौसम चक्र में बदलाव के कारण सर्दियों के महीनों (जनवरी-फरवरी) में होने वाली बारिश या तो कम हो गई है या उसका समय बदल गया है। * दाना बनने के समय यदि हवा में नमी (Humidity) अचानक बहुत कम हो जाए और तेज, शुष्क व गर्म हवाएं (लू) चलने लगें, तो पौधे की पत्तियां सूखने लगती हैं। पत्तियां सूखने से **प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis)** की प्रक्रिया धीमी हो जाती है, जिससे दाने का आकार नहीं बढ़ पाता। ## 3. गेहूं बोने के समय में देरी (Late Sowing) कई इलाकों में धान की लेट कटाई या गन्ने के खेतों के खाली न होने के कारण किसान गेहूं की बुवाई नवंबर के बजाय दिसंबर या जनवरी में करते हैं। * **नुकसान:** देर से बोई गई फसल का दाना ठीक उसी समय बनता है जब मार्च-अप्रैल की भीषण गर्मी शुरू होती है। समय से बोई गई फसल गर्मी आने से पहले ही मजबूत हो चुकी होती है, लेकिन पछेती (Late) फसल गर्मी की मार नहीं झेल पाती और उसका दाना सिकुड़ जाता है। ## 4. नमी की कमी और सिंचाई का गलत प्रबंधन दाना भरने की अवस्था (Flushing/Milking Stage) में गेहूं के पौधे को सबसे ज्यादा पानी की जरूरत होती है। * यदि इस महत्वपूर्ण समय पर खेत में पर्याप्त नमी न हो या सिंचाई में देरी हो जाए, तो पौधा मिट्टी से पोषक तत्व नहीं खींच पाता। पानी की कमी के कारण दाना खोखला और झुर्रीदार (Shriveled) रह जाता है। ## 5. संतुलित उर्वरकों की कमी खेतों में केवल यूरिया (नाइट्रोजन) का अंधाधुंध इस्तेमाल करना और **पोटाश (Potassium)** व **फास्फोरस** की अनदेखी करना भी इसके लिए जिम्मेदार है। पोटाश पौधे को गर्मी और सूखे से लड़ने की ताकत देता है और दानों की चमक व वजन बढ़ाता है। इसकी कमी से दाने कमजोर रह जाते हैं। ## किसान भाई इस नुकसान से कैसे बचें? (वैज्ञानिक उपाय) * **गर्मी सहन करने वाली किस्में (Heat-Tolerant Varieties):** पूसा संस्थान (IARI) और कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा विकसित नई किस्में (जैसे DBW-187, DBW-303, HD-3385) लगाएं, जो तेज गर्मी में भी दाने को सिकुड़ने नहीं देतीं। * **समय पर बुवाई:** गेहूं की बुवाई **25 अक्टूबर से 15 नवंबर** के बीच पूरी कर लें, ताकि फसल मार्च की भीषण गर्मी से पहले पककर तैयार हो जाए। * **स्प्रिंकलर (फव्वारा) सिंचाई:** मार्च के महीने में जब तापमान बढ़ने लगे, तो हल्की सिंचाई फव्वारे से करें। इससे खेत का तापमान 1-2^\circ\text{C} तक कम हो जाता है और फसल 'हीट स्ट्रेस' से बच जाती है। * **पोटेशियम नाइट्रेट (13:0:45) का छिड़काव:** दाना बनते समय 1\% पोटेशियम नाइट्रेट का स्प्रे करने से पौधों को गर्मी से लड़ने की शक्ति मिलती है और दानों का भराव अच्छा होता है।

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