पेड़ों में पाई जाने वाली गोंद औषधि के क्या-क्या फायदे और नुकसान ?

पेड़ों से निकलने वाली गोंद (Gum) प्रकृति का एक अनमोल वरदान है। आयुर्वेद में इसका उपयोग सदियों से औषधीय रूप में किया जा रहा है। अलग-अलग पेड़ों की गोंद की तासीर, उनके फायदे और असर दिखाने का समय अलग-अलग होता है। आइए जानते हैं गोंद के सामान्य फायदे, नुकसान और मुख्य पेड़ों की गोंद के विशिष्ट लाभों के बारे में: ## गोंद खाने के सामान्य फायदे और नुकसान ### फायदे (Benefits): * **हड्डियों और जोड़ों की मजबूती:** लगभग सभी प्रकार की गोंद कैल्शियम और प्रोटीन से भरपूर होती हैं, जो जोड़ों के दर्द और गठिया (Arthritis) में आराम देती हैं। * **इम्यूनिटी और कमजोरी दूर करना:** यह शरीर को तुरंत ऊर्जा देती है और प्रसव (Delivery) के बाद महिलाओं की कमजोरी दूर करने के लिए इसके लड्डू खिलाए जाते हैं। * **पाचन तंत्र में सुधार:** गोंद में फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो कब्ज को दूर करती है और आंतों को स्वस्थ रखती है। * **त्वचा के लिए वरदान:** यह एंटी-एजिंग गुणों से भरपूर होती है, जो झुर्रियों को कम करने में मदद करती है। ### नुकसान (Side Effects): * **पाचन संबंधी समस्या:** यदि गोंद को बिना भुने या सही मात्रा से अधिक खाया जाए, तो पेट फूलना, गैस या पेट दर्द की समस्या हो सकती है। * **पानी की कमी:** गोंद शरीर में पानी सोखती है। इसे खाते समय यदि पर्याप्त पानी न पिया जाए, तो कब्ज बढ़ सकती है। * **गर्भावस्था में सावधानी:** कुछ गोंद की तासीर बहुत गर्म होती है, इसलिए गर्भवती महिलाओं को बिना डॉक्टर की सलाह के इसका सेवन नहीं करना चाहिए। ## प्रमुख पेड़ों की गोंद: लाभ और असर का समय हर गोंद का शरीर पर असर दिखने का समय व्यक्ति की उम्र, पाचन शक्ति और बीमारी की गंभीरता पर निर्भर करता है। आमतौर पर नियमित सेवन के **7 से 15 दिनों** में सुधार दिखने लगता है। ### 1. बबूल की गोंद (Babool Gum / Gond Kikar) यह भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली गोंद है। इसकी तासीर गर्म होती है (इसलिए इसे सर्दियों में खाया जाता है)। * **लाभ:** जोड़ों का दर्द, कमर दर्द, शारीरिक कमजोरी और पुरुषों में धातु दुर्बलता को दूर करती है। यह फेफड़ों के लिए भी अच्छी है। * **कितने दिन में लाभ:** नियमित रूप से सुबह खाली पेट गुनगुने दूध के साथ 1-2 ग्राम लेने पर **7 से 10 दिनों** में कमर और जोड़ों के दर्द में आराम महसूस होने लगता है। ### 2. कीकर या ढाक की गोंद (Palash / Kamarkas) इसे 'कमरकस' भी कहा जाता है क्योंकि यह कमर को मजबूती देने के लिए प्रसिद्ध है। * **लाभ:** महिलाओं में प्रसव के बाद गर्भाशय की कमजोरी, कमर दर्द और लिकोरिया (सफेद पानी) की समस्या में यह अचूक है। * **कितने दिन में लाभ:** प्रसव के बाद या सामान्य कमजोरी में इसे लड्डू या दूध के साथ लेने से **10 से 15 दिनों** में शरीर की सुस्ती दूर होती है और कमर मजबूत होती है। ### 3. नीम की गोंद (Neem Gum) नीम की गोंद में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण होते हैं। * **लाभ:** यह खून को साफ करती है, त्वचा के रोग (जैसे कील-मुंहासे, एक्जिमा), और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाती है। यह शुगर कंट्रोल करने में भी मददगार है। * **कितने दिन में लाभ:** त्वचा के विकारों और खून की अशुद्धि में इसका असर **15 से 20 दिनों** में त्वचा पर चमक और मुंहासों की कमी के रूप में दिखने लगता है। ### 4. सहजन की गोंद (Drumstick / Moringa Gum) सहजन (मुनगा) की गोंद पोषक तत्वों का पावरहाउस मानी जाती है। * **लाभ:** यह जोड़ों के गंभीर दर्द, साइटिका, अस्थमा और पेट के कीड़ों को खत्म करने में बहुत प्रभावी है। यह दिमागी ताकत भी बढ़ाती है। * **कितने दिन में लाभ:** वात रोग (जोड़ों के दर्द) में इसका सेवन करने से **12 से 15 दिनों** में सूजन और दर्द कम होने लगता है। ### 5. गोंद कतीरा (Tragacanth Gum) **ध्यान दें:** यह अन्य गोंद से बिल्कुल अलग है। इसकी तासीर **ठंडी** होती है और इसे पानी में भिगोने पर यह जेली जैसा फूल जाता है। इसे गर्मियों में खाया जाता है। * **लाभ:** गर्मियों में लू से बचाता है, हाथ-पैरों की जलन दूर करता है, नकसीर (नाक से खून आना) रोकता है और वजन घटाने में मदद करता है। * **कितने दिन में लाभ:** गर्मी के विकारों या पेट की जलन में यह मात्र **2 से 3 दिनों** में ही अपना ठंडा असर दिखा देता है। ## सेवन का सही तरीका और मात्रा * **मात्रा:** एक सामान्य वयस्क को दिनभर में **5 से 10 ग्राम** से अधिक गोंद का सेवन नहीं करना चाहिए। * **तरीका:** गर्म तासीर वाली गोंद (बबूल, पालश) को हमेशा शुद्ध घी में भूनकर (पॉपकॉर्न की तरह फूलने के बाद) पीसकर दूध या लड्डू के रूप में लें। गोंद कतीरा को रातभर पानी में भिगोकर ही इस्तेमाल करें। > **सलाह:** यदि आप किसी पुरानी बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज से पीड़ित हैं, तो किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह के बाद ही इसे अपनी डाइट में शामिल करें। >

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