कोई पर्यटक अगर उत्तराखंड नहीं जाएंगे तो उत्तराखंड के लोग भूखे मर जाएंगे क्या अन्य पर्यटन देशों मैं ?

किसी भी पर्यटन-प्रधान अर्थव्यवस्था (Tourism-based economy) के मूल आधार को छूता है। इसका सीधा और सरल जवाब है: **नहीं, पर्यटक नहीं जाएंगे तो लोग भूखे नहीं मरेंगे, लेकिन उनका जीवन स्तर बहुत कठिन हो जाएगा और अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी।** उत्तराखंड या दुनिया के अन्य पर्यटन देशों और राज्यों के संदर्भ में इस स्थिति को हम कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं के जरिए समझ सकते हैं: ## 1. उत्तराखंड की जमीनी हकीकत: क्या लोग भूखे मर जाएंगे? अगर उत्तराखंड में पर्यटन पूरी तरह बंद हो जाए, तो लोग भूखे नहीं मरेंगे, क्योंकि उत्तराखंड के समाज के पास एक पारंपरिक बैकअप प्लान हमेशा रहता है: * **पारंपरिक खेती और पशुपालन:** उत्तराखंड के गांवों में आज भी लोग अपनी जमीन पर खेती (जैसे मंडुआ, झंगोरा, दालें) और पशुपालन करते हैं। भले ही इससे बहुत पैसा न मिले, लेकिन यह उनके जिंदा रहने और पेट भरने के लिए अनाज दे देता है। * **पलायन (Migration) बढ़ेगा:** अगर पर्यटन बंद हुआ, तो भुखमरी से बचने के लिए पहाड़ों से शहरों (जैसे दिल्ली, चंडीगढ़, मुंबई) की तरफ पलायन बहुत तेजी से बढ़ जाएगा। युवा नौकरी की तलाश में बाहर चले जाएंगे, जिससे पहाड़ खाली ("भूतिया गांव" या Ghost Villages) हो जाएंगे। ## 2. पर्यटन बंद होने का असली असर क्या होता है? भूखे न मरने का मतलब यह नहीं है कि असर नहीं पड़ेगा। उत्तराखंड की लगभग **25% से 30% अर्थव्यवस्था** प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पर्यटन और चारधाम यात्रा पर टिकी है। पर्यटन रुकने से: * **रोजगार का संकट:** होटल मालिक, गाइड, टैक्सी ड्राइवर, ढाबे वाले, खच्चर वाले और स्थानीय हस्तशिल्प बेचने वाले छोटे दुकानदार पूरी तरह बेरोजगार हो जाएंगे। * **आर्थिक मंदी:** जब इन लोगों के पास पैसा नहीं होगा, तो वे बाजार से सामान नहीं खरीदेंगे। इससे कपड़े, मोबाइल, राशन और अन्य व्यापार भी ठप हो जाएंगे। ## 3. क्या दुनिया के अन्य पर्यटन देशों में लोग भूखे मर जाते हैं? दुनिया में कई ऐसे देश हैं जिनकी पूरी अर्थव्यवस्था पर्यटन पर चलती है, जैसे **मालदीव, श्रीलंका, थाईलैंड, या बहामास**। जब इन देशों में पर्यटक आना बंद होते हैं (जैसा हमने **कोविड-19 महामारी** के समय देखा था), तो वहां भुखमरी तो नहीं फैली, लेकिन देश बहुत बड़े संकट में आ गए: ### उदाहरण 1: मालदीव (Maldives) मालदीव की जीडीपी का एक बहुत बड़ा हिस्सा पर्यटन से आता है। जब पर्यटकों का आना कम या बंद होता है, तो वहां के लोग भूखे नहीं मरते क्योंकि वे **मछली पकड़ने (Fishing)** के अपने पारंपरिक व्यवसाय पर लौट आते हैं। लेकिन देश की तिजोरी खाली हो जाती है, जिससे दवाइयां और जरूरी सामान बाहर से मंगाना मुश्किल हो जाता है। ### उदाहरण 2: श्रीलंका (Sri Lanka) कोविड-19 और आंतरिक फैसलों के कारण जब श्रीलंका में पर्यटन पूरी तरह ठप हो गया, तो वहां भुखमरी तो नहीं हुई, लेकिन देश का **आर्थिक दिवालियापन (Economic Crisis)** हो गया। पेट्रोल, गैस और दूध जैसी बुनियादी चीजों के लिए लोगों को मीलों लंबी लाइनों में लगना पड़ा। ## 4. देश और राज्य इसके लिए क्या उपाय करते हैं? कोई भी समझदार सरकार अपनी पूरी आबादी को केवल एक सेक्टर (पर्यटन) के भरोसे नहीं छोड़ती। इसे विज्ञान की भाषा में **"डाइवर्सिफिकेशन" (विविधीकरण)** कहते हैं। यदि पर्यटन प्रभावित होता है, तो अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए ये रास्ते अपनाए जाते हैं: 1. **स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा:** कृषि, बागवानी (जैसे सेब, खुबानी की खेती), और हर्बल प्रोडक्ट्स (जड़ी-बूटियों) का प्रसंस्करण। 2. **आईटी और वर्क फ्रॉम होम:** उत्तराखंड जैसे शांत राज्यों को अब "होमस्टे" के साथ-साथ 'वर्क फ्रॉम माउंटेन' के रूप में विकसित किया जा रहा है ताकि आईटी सेक्टर के लोग वहां रहकर काम कर सकें। 3. **हैंडीक्राफ्ट और कुटीर उद्योग:** स्थानीय ऊनी कपड़े, जैविक उत्पाद और कलाकृतियों को ऑनलाइन बाजार (जैसे एमेझॉन, फ्लिपकार्ट) के जरिए दुनिया भर में बेचना। > **निष्कर्ष:** मनुष्य स्वभाव से बहुत जुझारू है। अगर पर्यटक नहीं आएंगे, तो उत्तराखंड या दुनिया का कोई भी समाज भूखा नहीं मरेगा; वे जीने का कोई न कोई दूसरा रास्ता (जैसे खेती या पलायन) ढूंढ ही लेंगे। लेकिन, पर्यटन उनके जीवन को आसान, समृद्ध और आधुनिक बनाने का एक मुख्य जरिया है, इसलिए पर्यटन का बने रहना राज्य की प्रगति के लिए बेहद जरूरी है। >

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