देहरादून के सिडकुल सेलाकुई क्षेत्र में मजदूरों का फूटा गुस्सा फैक्ट्री पर लगाए शोषण के आरोप ?

देहरादून के **सेलाकुई औद्योगिक क्षेत्र** में हाल ही में (14 मई, 2026) हजारों मजदूरों का गुस्सा फूट पड़ा। यह विरोध प्रदर्शन इतना व्यापक था कि इसकी तुलना नोएडा के बड़े श्रमिक आंदोलनों से की जाने लगी है। मुख्य रूप से **डिक्सन (Dixon) कंपनी** के कर्मचारियों ने सड़कों पर उतरकर फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोला। श्रमिकों द्वारा लगाए गए आरोप और उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं: ### मजदूरों के मुख्य आरोप और मांगें * **वेतन में वृद्धि:** मजदूरों का आरोप है कि बढ़ती महंगाई के बावजूद उनके वेतन में उचित बढ़ोतरी नहीं की जा रही है। उनकी मांग है कि वेतन को बढ़ाकर सम्मानजनक स्तर (लगभग ₹20,000) पर लाया जाए। * **ओवरटाइम का भुगतान:** श्रमिकों ने शिकायत की है कि उनसे तय घंटों से ज्यादा काम लिया जाता है, लेकिन उसका उचित भुगतान नहीं मिलता। * **साप्ताहिक अवकाश:** कई मजदूरों ने आरोप लगाया कि उन्हें सप्ताह में एक दिन की अनिवार्य छुट्टी भी ठीक से नहीं मिल रही है। * **बुनियादी सुविधाओं का अभाव:** कार्यस्थल पर पीने के साफ पानी, कैंटीन में भोजन की गुणवत्ता और अन्य जरूरी सुविधाओं की कमी को लेकर भी रोष जताया गया। * **शोषण के आरोप:** मजदूरों का कहना है कि कंपनी प्रबंधन और ठेकेदारों द्वारा उन पर काम का अत्यधिक दबाव बनाया जाता है और विरोध करने पर नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है। ### प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई * **भारी पुलिस बल तैनात:** प्रदर्शन के उग्र होते ही विकासनगर और आसपास के कई थानों की पुलिस फोर्स को मौके पर तैनात किया गया ताकि कानून-व्यवस्था न बिगड़े। * **प्रशासनिक मध्यस्थता:** नायब तहसीलदार और पुलिस अधिकारियों ने कंपनी मैनेजमेंट और मजदूर प्रतिनिधियों के बीच बातचीत कराने की कोशिश की। * **वर्तमान स्थिति:** घंटों चले हंगामे के बाद प्रशासन ने मध्यस्थता कर मामले को शांत कराया है। प्रबंधन की ओर से मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया गया है, लेकिन मजदूर अभी भी ठोस लिखित समाधान की मांग कर रहे हैं। ### औद्योगिक क्षेत्र पर प्रभाव सेलाकुई उत्तराखंड का एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र है। इस तरह के बड़े आंदोलनों से न केवल उत्पादन प्रभावित होता है, बल्कि औद्योगिक शांति पर भी सवाल खड़े होते हैं। जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते श्रमिकों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो यह आंदोलन अन्य फैक्ट्रियों तक भी फैल सकता है। क्या आप इस विरोध प्रदर्शन से संबंधित किसी विशेष कंपनी या सरकारी श्रम कानूनों के बारे में अधिक जानकारी चाहते हैं?

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