भारत में अंधविश्वास जादू टोने पर किन राज्यों मैं कानून है और कौनसा अंधविश्वास जादू बिल संसद में पेंडिंग है ?
भारत में अंधविश्वास, जादू-टोना और डायन प्रथा (Witch-Hunting) जैसी कुप्रथाओं को रोकने के लिए अभी तक कोई **एक केंद्रीय (राष्ट्रीय) कानून नहीं है**। हालांकि, कई राज्यों ने अपने स्तर पर कड़े कानून बनाए हैं, और राष्ट्रीय स्तर पर कानून बनाने के लिए संसद में प्रयास जारी हैं।
इस विषय से जुड़ी पूरी कानूनी स्थिति नीचे दी गई है:
## 1. किन राज्यों में अंधविश्वास और जादू-टोने के खिलाफ कानून हैं?
भारत के विभिन्न राज्यों में दो मुख्य श्रेणियों के तहत कानून बनाए गए हैं—एक **काला जादू और अंधविश्वास विरोधी कानून** और दूसरा **डायन प्रथा (Witch-Hunting) विरोधी कानून** (जिसका शिकार ग्रामीण इलाकों में ज्यादातर महिलाएं होती हैं)।
### क) व्यापक काला जादू और अंधविश्वास विरोधी कानून वाले राज्य:
* **महाराष्ट्र (2013):** महाराष्ट्र देश का पहला राज्य था जिसने ऐसा कानून बनाया। सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की हत्या के बाद *'महाराष्ट्र नरबलि और अन्य अमानवीय, अनिष्टकारी व अघोरी प्रथाएं तथा काला जादू रोकथाम व उन्मूलन अधिनियम, 2013'* लागू किया गया। इसके तहत नरबलि, चमत्कारी इलाज के दावे और अंधविश्वास के नाम पर यौन या आर्थिक शोषण गैर-जमानती अपराध हैं।
* **कर्नाटक (2017/2020):** कर्नाटक ने *'अमानवीय बुराइयों और काला जादू रोकथाम व उन्मूलन अधिनियम'* पारित किया, जो 2020 से पूरी तरह प्रभावी हुआ। इसके तहत 'अमानवीय' धार्मिक अनुष्ठानों (जैसे सुलाने वाली नुकीली छड़ों को गाल के आर-पार करना, नग्न जुलूस निकालना आदि) पर प्रतिबंध है।
### ख) डायन प्रथा और ओझा/जादू-टोना विरोधी कानून वाले राज्य:
भारत के कई राज्यों में महिलाओं को 'डायन' या 'डाइन' कहकर प्रताड़ित करने और ओझाओं द्वारा किए जाने वाले शोषण को रोकने के लिए कड़े कानून हैं:
* **बिहार (1999):** देश में सबसे पहले बिहार ने *'डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम, 1999'* लागू किया था।
* **झारखंड (2001):** बिहार से अलग होने के बाद झारखंड ने भी इसे अपनाया क्योंकि वहां यह समस्या काफी गंभीर थी।
* **छत्तीसगढ़ (2005):** यहाँ इस कानून को *'छत्तीसगढ़ टोनाही प्रताड़ना निवारण अधिनियम, 2005'* कहा जाता है (वहां डायन को स्थानीय भाषा में टोनाही कहते हैं)।
* **ओडिशा (2013):** *'ओडिशा डायन प्रथा रोकथाम अधिनियम'*।
* **राजस्थान (2015):** *'राजस्थान डायन-प्रथा निवारण अधिनियम'* जिसके तहत पीड़ित के पुनर्वास की भी व्यवस्था है।
* **असम (2015/2018):** *'असम डायन शिकार (निषेध, रोकथाम और संरक्षण) अधिनियम'* को 2018 में राष्ट्रपति की मंजूरी मिली, यह इस श्रेणी के सबसे कड़े कानूनों में से एक है।
*नोट: हरियाणा ने भी हाल ही में 'हरियाणा नरबलि और काला जादू रोकथाम विधेयक, 2024' का मसौदा (Draft) तैयार कर राज्य स्तर पर इसे पारित करने की प्रक्रिया शुरू की है।*
## 2. संसद (Parliament) में कौन से बिल पेंडिंग या चर्चा में हैं?
राष्ट्रीय स्तर पर एक समान कानून न होने के कारण संसद में समय-समय पर 'प्राइवेट मेंबर बिल' (Private Member Bills) पेश किए जाते रहे हैं। वर्तमान में और हाल के वर्षों में निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिल संसद के पटल पर आए हैं:
### 'द प्रिवेंशन ऑफ ब्लैक मैजिक, विच-हंटिंग एंड सुपरस्टीशियस प्रैक्टिसेस बिल' (The Prevention of Black Magic, Witch-Hunting and Superstitious Practices Bill)
यह राष्ट्रीय स्तर का एक बेहद महत्वपूर्ण प्राइवेट मेंबर बिल है, जिसे राज्यसभा सांसद संजीव अरोड़ा द्वारा संसद में प्रस्तुत किया गया है।
* **बिल की मुख्य बातें:**
* **कड़े दंड का प्रावधान:** काला जादू करने वालों के लिए 10 साल तक की जेल और यदि किसी महिला को डायन बताकर प्रताड़ित करने से उसकी मृत्यु हो जाती है, तो दोषी को उम्रकैद या मौत की सजा का प्रावधान है।
* **डिजिटल मीडिया पर रोक:** सोशल मीडिया, यूट्यूब, व्हाट्सएप या विज्ञापनों के जरिए 'चमत्कारी इलाज', भूत-प्रेत भगाने के दावे या अलौकिक शक्तियों का प्रचार करने पर पूरी तरह रोक लगाने का प्रस्ताव है।
* **विशेष टास्क फोर्स और कोर्ट:** देश स्तर पर गृह मंत्रालय के तहत एक 'स्पेशल एनफोर्समेंट टास्क फोर्स' और मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए 'विशेष अदालतें' (Special Courts) बनाने का प्रस्ताव है।
* **पीड़ित मुआवजा फंड:** पीड़ितों के मानसिक और शारीरिक पुनर्वास के लिए न्यूनतम ₹5 लाख से ₹10 लाख तक के मुआवजे का प्रावधान है।
### पूर्व में पेंडिंग रहे बिल
इससे पहले साल 2016 में भी लोकसभा में *'प्रिवेंशन ऑफ विच-हंटिंग बिल'* लाया गया था, लेकिन वह संसद सत्र के समाप्त होने के साथ ही निष्प्रभावी (Lapse) हो गया था।
## वर्तमान में कार्रवाई का आधार क्या है?
चूंकि केंद्रीय स्तर पर कोई विशिष्ट 'काला जादू विरोधी कानून' नहीं है, इसलिए अभी देश की पुलिस ऐसे मामलों में **भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS)** (जो पहले IPC थी) की विभिन्न धाराओं का सहारा लेती है:
* **हत्या/नरबलि के लिए:** धारा 103 (पहले IPC 302)
* **धोखाधड़ी के लिए:** धारा 318 (पहले IPC 420)
* **धार्मिक भावनाओं को आहत करना:** धारा 299 (पहले IPC 295A)
* इसके अलावा, **'औषधि और चमत्कारिक उपचार (आक्षेपणीय विज्ञापन) अधिनियम, 1954'** (Drugs and Magic Remedies Act, 1954) के तहत जादुई ताबीज या मंत्रों द्वारा गंभीर बीमारियों को ठीक करने का दावा करने वाले विज्ञापनों पर कानूनी कार्रवाई की जाती है।
टिप्पणियाँ