भारत के कई राज्यों में स्वच्छता अभियान के लिए ली गई गाड़ियां ग्रामीण क्षेत्रों में धूल खा रही है ?

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण और शहरी) के तहत देश के कई राज्यों में कचरा संग्रहण और साफ-सफाई के लिए गाड़ियां (जैसे ई-रिक्शा, छोटा हाथी, ट्रैक्टर और हाइड्रोलिक वाहन) बांटी गई थीं। लेकिन प्रशासनिक लापरवाही, बजट (ईंधन और रखरखाव) की कमी, और ड्राइवरों की अनुपलब्धता के कारण कई राज्यों के ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में ये गाड़ियां डंपिंग यार्ड या पंचायत भवनों के बाहर धूल खा रही हैं। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और स्थानीय शिकायतों के अनुसार, मुख्य रूप से निम्नलिखित राज्यों में इस तरह की समस्याएं बड़े पैमाने पर सामने आई हैं: ### 1. उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश के कई जिलों (जैसे बुंदेलखंड के ग्रामीण इलाके, पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी के कुछ जिलों) की ग्राम पंचायतों में स्वच्छता अभियान के तहत लाखों रुपये की लागत से खरीदी गई गाड़ियाँ धूल फांक रही हैं। कई जगहों पर ग्रामीणों की शिकायत है कि गाड़ियाँ तो आ गईं, लेकिन उनके लिए ईंधन (डीजल/पेट्रोल) का बजट न होने या चलाने वाले सफाईकर्मी की नियुक्ति न होने के कारण वे खड़ी-खड़ी कबाड़ हो रही हैं। ### 2. बिहार बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों (लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत) में कई पंचायतों को कचरा उठाने के लिए पैडल रिक्शा और ई-रिक्शा दिए गए थे। कई जिलों में सही रखरखाव न होने, बैटरियां खराब हो जाने और कचरा प्रोसेसिंग यूनिट्स (WPU) के सुचारू रूप से काम न करने की वजह से ये गाड़ियां ब्लॉक मुख्यालयों या पंचायत परिसरों में सड़ रही हैं। ### 3. मध्य प्रदेश एमपी के कई ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में 'कचरा कलेक्शन व्हीकल्स' को लेकर स्थानीय स्तर पर शिकायतें आती रही हैं। ग्राम पंचायतों के पास इन गाड़ियों के मेंटेनेंस और ड्राइवरों को वेतन देने का पर्याप्त फंड न होने के कारण कई गाड़ियां कबाड़ में तब्दील हो रही हैं। ### 4. पंजाब पंजाब के भी कई कस्बों और ग्रामीण नगर निकायों में करोड़ों की गाड़ियां और उपकरण धूल खा रहे हैं। हाल ही में मोगा जैसे क्षेत्रों से भी ऐसी रिपोर्ट आई थीं जहां स्वच्छ भारत मिशन के तहत मिलीं नई गाड़ियां और ट्रैक्टर अफसरों की लापरवाही और आपसी तालमेल की कमी के कारण महीनों तक बिना इस्तेमाल के खड़े रहे, जिससे उनकी बैटरियां तक गायब हो गईं। ### 5. झारखंड और राजस्थान * **झारखंड:** यहां के कई आदिवासी और दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में गाड़ियां भेजी तो गईं, लेकिन संकरी गलियों, सड़कों की खराब स्थिति और कचरा डंप करने के लिए निश्चित जगह न होने के कारण गाड़ियों का इस्तेमाल बंद हो गया। * **राजस्थान:** मरुस्थलीय और ग्रामीण क्षेत्रों में दूरी अधिक होने के कारण गाड़ियों का संचालन महंगा पड़ता है। बजट के अभाव में पंचायतों ने इन गाड़ियों को खड़ा कर दिया है। ### गाड़ियाँ धूल खाने के मुख्य कारण: * **रखरखाव और ईंधन के बजट की कमी:** सरकार की तरफ से गाड़ियां तो दे दी गईं, लेकिन रोज डीजल डलवाने और गाड़ी खराब होने पर उसे ठीक कराने का स्थाई फंड कई ग्राम पंचायतों के पास नहीं है। * **सफाईकर्मियों और ड्राइवरों की कमी:** कई पंचायतों में गाड़ियां चलाने के लिए स्वीकृत पद या कुशल ड्राइवर ही नहीं हैं। * **कचरा निस्तारण केंद्र (Segregation Sheds) न होना:** गाड़ी कचरा उठा भी ले, तो उसे डंप कहाँ करना है और रीसायकल कैसे करना है, इसका कोई ठोस ढांचा ग्रामीण स्तर पर तैयार नहीं हो पाया। ### भारत के कई राज्यों में यह घटना या दर्शाती है कि समाज में अभी भी स्वच्छता के लिए जागरूक होने की कमी है संसाधन मुहैया कराने पर भी प्रशासन कार्य को आगे नहीं बढ़ा पाए हैं ना ही संसाधन जुड़ पाते हैं और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर के!

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