दुनिया में सबसे ज्यादा जो रिसर्च करते हैं वह क्रिमिनल ही करते हैं ?

अगर हम सीधे तौर पर देखें, तो वैज्ञानिक, डॉक्टर और प्रोफेसर्स सबसे ज़्यादा ऑफिशियल रिसर्च करते हैं। लेकिन अगर हम **"बारीकी से प्लानिंग करने, हर छोटी-सी चूक को भांपने और सिस्टम की कमियों को ढूंढने"** को रिसर्च मानें, तो क्रिमिनल्स (खासकर हाई-प्रोफाइल या साइबर क्रिमिनल्स) वाकई बहुत खतरनाक स्तर की रिसर्च करते हैं। इसे हम कुछ इस तरह समझ सकते हैं: ### 1. सिस्टम की कमियों (Loopholes) की खोज एक क्रिमिनल किसी भी अपराध को अंजाम देने से पहले कानून, सुरक्षा व्यवस्था, टेक्नोलॉजी और इंसानी व्यवहार (Human Behavior) का बहुत गहराई से अध्ययन करता है। वे यह ढूंढने में अपनी पूरी ताकत लगा देते हैं कि सिस्टम में ऐसी कौन सी जगह है जहाँ सुरक्षा सबसे कमज़ोर है। ### 2. साइबर क्राइम और एडवांस्ड रिसर्च आज के दौर में जो साइबर क्रिमिनल्स या हैकर्स हैं, वे कोडिंग, एल्गोरिदम और नए-नए सॉफ्टवेयर्स पर दिन-रात रिसर्च करते हैं। जब तक कोई कंपनी अपने सिस्टम को सेफ करने के लिए पैच (Security Update) बनाती है, तब तक क्रिमिनल्स उसका नया तोड़ ढूंढ चुके होते हैं। ### 3. "री-सर्च" बनाम "क्रिमिनल माइंड" * **साइंटिफिक रिसर्च:** इसका मकसद कुछ नया खोजना या दुनिया की भलाई के लिए ज्ञान को बढ़ाना होता है। * **क्रिमिनल रिसर्च:** इसका मकसद किसी बने-बनाए सिस्टम को तोड़ना और अपने फायदे के लिए उसका गलत इस्तेमाल करना होता है। इसे रिसर्च से ज़्यादा **'रेकी' (Reconnaissance) या 'जासूसी'** कहा जाता है। > **एक दिलचस्प पहलू:** क्रिमिनल्स की इसी 'खतरनाक रिसर्च' का मुकाबला करने के लिए पुलिस, फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स और एथिकल हैकर्स (Ethical Hackers) को उनसे भी दोगुनी रिसर्च करनी पड़ती है। यानी क्रिमिनल के दिमाग को समझने के लिए कानून को भी लगातार रिसर्च मोड में रहना पड़ता है। > तो वैधानिक या क्रेडेंशियल के तौर पर भले ही वे रिसर्चर न कहलाएं, लेकिन उनका दिमाग किसी शातिर और बारीक स्टडी करने वाले रिसर्चर की तरह ही काम करता है—बस उनकी दिशा गलत होती है। क्या आपके यहां भी कोई ऐसी कोई क्रिमिनल घटना घटी है जिसका आपको पता ना हो?

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