2017 से 2024 के बीच में 87000 सरकारी स्कूल बंद हो गए क्या कारण है ?

भारत में पिछले एक दशक (विशेषकर 2014-15 से 2024 के बीच) में बड़ी संख्या में सरकारी स्कूलों के बंद होने या कम होने की खबर संसद और सरकारी आंकड़ों (जैसे UDISE+ डेटा) के माध्यम से सामने आई है। हाल ही में सरकार द्वारा संसद में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में लगभग **93,000 सरकारी स्कूल** कम हुए हैं। सरकार और शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इन स्कूलों के बंद होने या संख्या घटने के मुख्य रूप से **3 बड़े कारण** हैं: ### 1. स्कूलों का विलय या 'रैशलाइजेशन' (School Merging / Rationalisation) यह सबसे प्रमुख कारण है। सरकार ने स्कूलों को पूरी तरह "ताला लगाकर बंद" करने के बजाय **विलय (Merge)** करने की नीति अपनाई है। * **कम नामांकन (Low Enrollment):** कई गांवों या कस्बों में ऐसे स्कूल थे जहां छात्रों की संख्या 15-20 से भी कम रह गई थी। * **संसाधनों का सही उपयोग:** शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत हर स्कूल में पर्याप्त शिक्षक, खेल का मैदान, बिजली और शौचालय होने चाहिए। सरकार का तर्क है कि 10-15 बच्चों वाले अलग-अलग स्कूल चलाने के बजाय, उन्हें पास के किसी बड़े स्कूल में मिला दिया जाए ताकि वहां बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षक उपलब्ध कराए जा सकें। * उत्तर प्रदेश (लगभग 25,000) और मध्य प्रदेश (लगभग 29,000) जैसे राज्यों में इस नीति के तहत बड़े पैमाने पर स्कूलों का एकीकरण किया गया। ### 2. प्राइवेट स्कूलों की तरफ बढ़ता रुझान (Shift to Private Schools) पिछले कुछ वर्षों में ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में भी माता-पिता का झुकाव निजी (Private) स्कूलों की तरफ तेजी से बढ़ा है। * लोगों में यह धारणा मजबूत हुई है कि प्राइवेट स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम और बेहतर अनुशासन मिलता है। * सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जहां एक तरफ सरकारी स्कूलों की संख्या घटी है, वहीं **प्राइवेट अनएडेड (बिना सहायता प्राप्त) स्कूलों की संख्या में बढ़ोतरी** देखी गई है। छात्रों की कमी के कारण कई सरकारी स्कूलों में ताला लगाने की नौबत आ गई। ### 3. जनसांख्यिकीय बदलाव और प्रवासन (Demographic Shift & Migration) * **घटती प्रजनन दर (Fertility Rate):** भारत में कुल प्रजनन दर (TFR) में गिरावट आई है (यह 2.2 से घटकर 2.0 पर आ गई है)। इसका सीधा मतलब है कि देश में अब स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों की आबादी का प्रतिशत पहले के मुकाबले कम हो रहा है। * **पलायन (Migration):** ग्रामीण क्षेत्रों से परिवारों का शहरों की ओर पलायन बढ़ा है। इसके कारण गांवों के स्कूलों में बच्चों की संख्या लगातार कम होती गई और शहरों के स्कूलों पर दबाव बढ़ा। ### इस कदम को लेकर चिंताएं और आलोचनाएं भले ही सरकार इसे 'संसाधनों का सही प्रबंधन' कह रही हो, लेकिन शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पर गंभीर चिंताएं जताई हैं: * **ड्रॉपआउट (Dropout) का खतरा:** स्कूल दूर होने की वजह से ग्रामीण इलाकों के गरीब बच्चों, विशेषकर **लड़कियों**, की पढ़ाई छूटने का खतरा बढ़ जाता है क्योंकि वे लंबी दूरी तय करके दूसरे गांव के स्कूल में नहीं जा पातीं। * **बुनियादी कमियां:** आलोचकों का कहना है कि सरकार को स्कूल बंद करने के बजाय वहां शिक्षकों की कमी को दूर करना चाहिए था और बुनियादी सुविधाएं सुधारनी चाहिए थीं ताकि छात्र संख्या दोबारा बढ़ सके।

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