उत्तराखण्ड राज्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर अमल करने में बहुत सक्रियता दिखाई है। मुख्यमंत्री **पुष्कर सिंह धामी** के नेतृत्व में राज्य सरकार ने मई 2026 में ईंधन और ऊर्जा बचाने के लिए कई महत्वपूर्ण और कड़े निर्णय लिए हैं।
उत्तराखण्ड में उठाए गए प्रमुख कदम निम्नलिखित हैं:
### 1. सरकारी काफिलों में 50% की कटौती
मुख्यमंत्री धामी ने अपने और अपने सभी मंत्रियों के वाहनों के काफिले (Convoy) के आकार को **आधा (50%)** करने का आदेश दिया है। अब मुख्यमंत्री के काफिले में गाड़ियों की संख्या 9 से घटाकर केवल 5 कर दी गई है।
### 2. साप्ताहिक 'नो व्हीकल डे' (No Vehicle Day)
राज्य कैबिनेट ने सप्ताह में एक दिन **'नो व्हीकल डे'** घोषित करने का निर्णय लिया है। इस दिन सरकारी कर्मचारी और अधिकारी निजी या सरकारी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करेंगे या पैदल चलेंगे।
### 3. 'वर्क फ्रॉम होम' और वर्चुअल मीटिंग्स
ईंधन बचाने के लिए सरकार ने 'कोविड-काल' की तर्ज पर:
* अधिकारियों को **Work From Home** के लिए प्रोत्साहित किया है।
* सरकारी विभागों में फिजिकल मीटिंग्स की जगह **वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग** को अनिवार्य बनाने की दिशा में कदम उठाए हैं ताकि यात्रा कम हो।
### 4. इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा
उत्तराखण्ड सरकार ने एक नई EV पॉलिसी को मंजूरी दी है, जिसके तहत:
* अब से सरकार द्वारा खरीदी जाने वाली नई गाड़ियों में **50% गाड़ियाँ इलेक्ट्रिक** होंगी।
* कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी जैसे नेता खुद सार्वजनिक रूप से **इलेक्ट्रिक स्कूटर** चलाते हुए देखे गए हैं ताकि जनता को प्रेरित किया जा सके।
### 5. 'एक अधिकारी, एक वाहन' नीति
ऐसे अधिकारी जो एक से अधिक विभागों का कार्यभार संभाल रहे हैं, उन्हें अब केवल **एक ही आधिकारिक वाहन** उपयोग करने की अनुमति होगी। इससे पहले अलग-अलग विभागों के लिए अलग गाड़ियाँ इस्तेमाल करने का चलन था।
### 6. अन्य महत्वपूर्ण उपाय
* **हवाई यात्रा पर लगाम:** मंत्रियों और अधिकारियों की अनावश्यक विदेश यात्राओं पर रोक लगा दी गई है।
* **एसी (AC) का सीमित उपयोग:** सरकारी और निजी इमारतों में एयर कंडीशनर के उपयोग को कम करने के निर्देश दिए गए हैं।
* **कम तेल वाला भोजन:** सरकार ने स्कूलों, अस्पतालों और होटलों में 'लो-ऑयल मेनू' को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान शुरू किया है ताकि खाद्य तेल के आयात पर निर्भरता कम हो सके।
उत्तराखण्ड सरकार का मानना है कि इन "छोटे लेकिन प्रभावी" बदलावों से न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि वैश्विक संकट के समय देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
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