भारत में जेलों और कैदियों के सुधार (Prison Reforms) को लेकर कानूनी व्यवस्था में एक बहुत बड़ा बदलाव आया है। लंबे समय तक भारत की जेलें अंग्रेजों के जमाने के **'प्रिजन्स एक्ट, 1894' (The Prisons Act, 1894)** से चलती थीं,
लेकिन हाल ही में सरकार ने इसे बदलकर **'मॉडल प्रिजन्स एंड करेक्शनल सर्विसेज एक्ट, 2023' (Model Prisons and Correctional Services Act, 2023)** तैयार किया है।
इन दोनों कानूनों और कैदी सुधार से जुड़े पहलुओं को समझना जरूरी है:
## 1. पुराना कानून: प्रिजन्स एक्ट, 1894 (अंग्रेजों के जमाने का)
यह भारत में जेल प्रशासन का मूल और सबसे पुराना कानून था। लेकिन इसमें सबसे बड़ी कमी यह थी कि इसका उद्देश्य **कैदियों का सुधार करना नहीं था**।
* **उद्देश्य:** अपराधियों को समाज से दूर बंद रखना, जेल में कड़ा अनुशासन बनाए रखना और उन्हें प्रताड़ित या दंडित करना था।
* **कमियां:** इस कानून में कैदियों के पुनर्वास (Rehabilitation), उनकी मानसिक सेहत, शिक्षा या समाज में वापसी को लेकर कोई खास प्रावधान नहीं थे।
## 2. नया कानून: मॉडल प्रिजन्स एंड करेक्शनल सर्विसेज एक्ट, 2023 (सुधारात्मक कानून)
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 130 साल पुराने औपनिवेशिक कानून को पूरी तरह बदलते हुए यह नया मॉडल एक्ट तैयार किया है। इसके नाम में ही **'करेक्शनल सर्विसेज' (सुधारात्मक सेवाएं)** जोड़ा गया है, जिसका मतलब है कि जेल अब 'सजा देने का घर' नहीं, बल्कि 'सुधार गृह' बनेगी।
### इस नए एक्ट के तहत कैदी सुधार के मुख्य प्रावधान (Key Reformative Features):
* **पुनर्वास और समाज में वापसी (Rehabilitation):** जेल से छूटने के बाद कैदी अपराध का रास्ता छोड़ दें, इसके लिए जेलों में व्यावसायिक प्रशिक्षण (Vocational Training), कौशल विकास (Skill Development) और पढ़ाई-लिखाई की व्यवस्था की गई है।
* **कैदियों का वर्गीकरण (Segregation & Classification):** पहली बार अपराध करने वाले युवाओं, आदतन अपराधियों (Hardened Criminals), नशे के आदी कैदियों और विचाराधीन कैदियों को अलग-अलग बैरकों में रखा जाएगा, ताकि सामान्य कैदी बड़े अपराधियों की संगति से बच सकें।
* **विशेष सुरक्षा और प्राइवेसी:** महिला कैदियों और **ट्रांसजेंडर (Transgender)** कैदियों के लिए जेलों में अलग और सुरक्षित आवास की व्यवस्था करने का सख्त नियम है।
* **मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य:** कैदियों की काउंसिलिंग, मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल और उनके साथ मानवीय गरिमा (Dignity) से पेश आने के लिए जेल स्टाफ के व्यवहार में बदलाव (Attitudinal Change) लाने की नीतियां बनाई गई हैं।
* **अच्छे आचरण पर इनाम:** जो कैदी जेल के नियमों का पालन करते हैं और सुधरने की इच्छा दिखाते हैं, उन्हें **पेरोल (Parole), फर्लो (Furlough)** और समय से पहले रिहाई (Premature Release) जैसे कानूनी प्रोत्साहन दिए जाएंगे।
* **ओपन जेल (Open Prisons) को बढ़ावा:** अच्छे आचरण वाले कैदियों के लिए खुली जेलों और सेमी-ओपन जेलों का प्रावधान है, जहाँ वे काम कर सकते हैं और सामान्य जीवन की आदत डाल सकते हैं।
## 3. यह कानून राज्यों में कैसे लागू होता है?
भारत के संविधान के अनुसार, 'जेल' **राज्य सूची (State List)** का विषय है। इसका मतलब है कि केंद्र सरकार ने यह 'मॉडल एक्ट 2023' एक मार्गदर्शिका (Guide) के रूप में बनाया है।
* अब यह देश के सभी **राज्यों की जिम्मेदारी है** कि वे इस नए मॉडल कानून को अपने-अपने राज्यों की विधानसभा में पास करें, पुराने 'प्रिजन्स एक्ट 1894' को रद्द करें और अपने जेल मैनुअल को नया रूप दें।
इसके अलावा, तीन अन्य पुराने कानूनों (The Prisoners Act, 1900 और The Transfer of Prisoners Act, 1950) को भी इसी नए कानून में समाहित (Assimiliate) कर दिया गया है ताकि कानूनी प्रक्रिया सरल हो सके।
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