तीन बार चुनाव जीतकर राज्य सरकारें और केंद्र सरकार चौथी बार चुनाव लड़ने के लिए क्या करती है ?
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जब कोई सरकार लगातार **तीन बार (15 साल)** चुनाव जीतकर सत्ता में रह चुकी हो और **चौथी बार** चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रही हो, तो उसके सामने चुनौतियां सामान्य से कहीं ज्यादा बड़ी होती हैं।
15 साल के शासन के बाद जनता में **'एन्टी-इन्कम्बेंसी' (Anti-incumbency / सत्ता विरोधी लहर)** यानी सरकार से ऊब या नाराजगी होना स्वाभाविक है। ऐसे में चौथी बार चुनाव लड़ने और जीतने के लिए केंद्र या राज्य सरकारें बहुत ही आक्रामक, रणनीतिक और लीक से हटकर कदम उठाती हैं:
### 1. 'चेहरा' बदलना या कड़े फैसले लेना (Leadership Refresh)
* **विधायकों/सांसदों के टिकट काटना:** सरकार को पता होता है कि कई क्षेत्रों में स्थानीय नेताओं के खिलाफ भारी गुस्सा है। इसलिए, चौथी बार चुनाव लड़ने से पहले पार्टी **40% से 60% तक मौजूदा विधायकों या सांसदों के टिकट काट देती है** और नए, युवा चेहरों को मौका देती है।
* **मुख्यमंत्री या मंत्रियों को बदलना:** अगर राज्य सरकार है, तो चुनाव से एक-दो साल पहले मुख्यमंत्री तक को बदल दिया जाता है ताकि जनता का गुस्सा शांत हो सके और एक नई शुरुआत का मैसेज जाए।
### 2. 'प्रो-इन्कम्बेंसी' (Pro-incumbency) और बड़े वादों का सहारा
* **ऐतिहासिक कामों पर फोकस:** सरकार अपनी 15 साल की केवल उन्हीं 3-4 बड़ी उपलब्धियों को भुनाती है जिन्होंने देश या राज्य की दिशा बदली हो (जैसे कोई बहुत बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट, राष्ट्रीय सुरक्षा, या कोई गेम-चेंजर योजना)।
* **भविष्य का विजन (Vision Document):** सरकार यह नैरेटिव (विमर्श) बनाती है कि "हमने 15 साल में नींव मजबूत कर दी है, अब चौथी बार में हम इमारत खड़ी करेंगे।" वे अगले 5 या 10 साल का एक बहुत बड़ा और आधुनिक रोडमैप जनता के सामने रखते हैं।
### 3. 'अति-लोकलुभावन' योजनाएं (Hyper-Populist Schemes)
चौथी बार सत्ता में आने के लिए सरकारें खजाना खोलने में पीछे नहीं हटतीं।
* **सीधे खाते में पैसे (Direct Benefit Transfer):** ऐसी योजनाएं लाई जाती हैं जिनका फायदा सीधे हर घर को मिले—जैसे महिलाओं, युवाओं या किसानों के बैंक खातों में हर महीने एक निश्चित राशि भेजना।
* **लोन माफी या मुफ्त सुविधाएं:** किसानों की कर्जमाफी, बिजली-पानी पूरी तरह मुफ्त करना, या पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने जैसे बड़े फैसले आखिरी साल में लिए जा सकते हैं।
### 4. विपक्ष को पूरी तरह बिखेरना (Splitting the Opposition)
15 साल बाद विपक्ष बहुत मजबूत होने की कोशिश करता है। सरकार इसे रोकने के लिए साम, दाम, दंड, भेद का इस्तेमाल करती है:
* **गठबंधन और सेंधमारी:** विपक्ष के बड़े और असंतुष्ट नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल करना।
* **वोटों का ध्रुवीकरण/बिखराव:** ऐसी रणनीति बनाना जिससे विपक्ष का वोट बैंक आपस में बंट जाए (जैसे किसी तीसरी छोटी पार्टी या निर्दलीय उम्मीदवारों को अंदरूनी हवा देना)।
### 5. सामाजिक और सांगठनिक किलेबंदी (Micro-Targeting)
* **जातिगत और धार्मिक समीकरणों को री-सेट करना:** सरकार कुछ नए सामाजिक वर्गों (Castes/Communities) को साधने के लिए नए आरक्षण, विशेष पैकेज या उनके समाज के बड़े प्रतीकों (मूर्तियों, स्मारकों) का निर्माण करती है।
* **पन्ना प्रमुख से भी आगे की तैयारी:** 15 साल में पार्टी का संगठन बहुत बड़ा हो जाता है। सरकार और पार्टी मिलकर हर एक वोटर के घर तक बार-बार पहुंचने के लिए 'माइक्रो-मैनेजमेंट' करती है।
### भारत में इसके कुछ बड़े उदाहरण:
* **केंद्र सरकार (UPA - मनमोहन सिंह सरकार):** 2004 और 2009 में दो बार जीतने के बाद जब 2014 में तीसरी बार (10 साल बाद) चुनाव लड़ने उतरी, तो वह एंटी-इन्कम्बेंसी नहीं संभाल पाई और हार गई।
* **गुजरात भाजपा सरकार:** वहां पार्टी 1995 से (लगभग 30 साल से) लगातार चुनाव जीत रही है। वे हर बार बड़ी संख्या में एंटी-इन्कम्बेंसी से बचने के लिए टिकट काटते हैं और चेहरे बदलते हैं (यहाँ तक कि 2021 में चुनाव से पहले पूरी कैबिनेट और मुख्यमंत्री बदल दिए गए थे)।
* **पश्चिम बंगाल (वामपंथी/Left फ्रंट):** कम्युनिस्ट सरकार ने लगातार 7 बार (34 साल) राज किया। उनका मुख्य हथियार बेहद मजबूत और कैडर-बेस्ड संगठन था, जो हर गांव के स्तर पर लोगों को पार्टी से जोड़े रखता था।
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