विश्व के सभी देशों के आदिवासी का मूल निवासी होने का अस्तित्व और भारत के मूल निवासी आदिवासी हैं क्या प्रमाणिकता है ?
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दुनिया भर में 'मूल निवासी' (Indigenous Peoples) और भारत में 'आवासी/आदिवासी' (Tribals/Adivasis) के अस्तित्व और उनकी प्रामाणिकता को साबित करने के लिए विज्ञान, इतिहास और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पास मजबूत प्रमाण हैं।
इसे हम दो भागों में समझ सकते हैं: पहला, वैश्विक स्तर पर मूल निवासियों का अस्तित्व और दूसरा, भारत के आदिवासियों की प्रामाणिकता।
## 1. विश्व के देशों में मूल निवासी होने का अस्तित्व (वैश्विक प्रमाण)
दुनिया भर में किसी समुदाय को वहाँ का 'मूल निवासी' मानने के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) और वैज्ञानिकों ने कुछ कड़े मापदंड और प्रमाण तय किए हैं:
* **ऐतिहासिक निरंतरता (Historical Continuity):** मूल निवासी वे लोग हैं जो किसी देश या क्षेत्र में औपनिवेशिक (Colonial) ताकतों या अन्य संस्कृतियों के आने से बहुत पहले से वहाँ रह रहे थे। जैसे- अमेरिका के 'नेटिव अमेरिकन्स' (Red Indians) और ऑस्ट्रेलिया के 'एबोरिजिनल्स' (Aborigines)।
* **आनुवंशिक और जीनोम साक्ष्य (Genetic Evidence):** आधुनिक डीएनए (DNA) मैपिंग और जीवाश्मों (Fossils) के अध्ययन से यह साबित हो चुका है कि इन समुदायों का आनुवंशिक इतिहास उस विशेष जमीन से हजारों सालों से जुड़ा हुआ है, जो बाद में आए प्रवासियों (Migrants) से बिल्कुल अलग है।
* **अंतरराष्ट्रीय कानून (संयुक्त राष्ट्र घोषणापत्र - UNDRIP):** साल 2007 में संयुक्त राष्ट्र ने *'मूल निवासियों के अधिकारों पर घोषणापत्र'* पारित किया। इसके तहत उन लोगों को मूल निवासी माना गया जिनकी अपनी विशिष्ट भाषा, संस्कृति, सामाजिक नियम और अपनी पैतृक भूमि (Ancestral Land) से गहरा आध्यात्मिक संबंध है।
## 2. क्या भारत के आदिवासी ही यहाँ के मूल निवासी हैं? (प्रामाणिकता और साक्ष्य)
भारत के संदर्भ में 'आदिवासी' शब्द का अर्थ ही है **'आदि काल से रहने वाले लोग'** (Original Inhabitants)। इस बात को सिद्ध करने के लिए हमारे पास तीन सबसे बड़े और प्रामाणिक वैज्ञानिक आधार हैं:
### क) आनुवंशिक प्रमाण (Genetic Proof) – सबसे बड़ा वैज्ञानिक आधार
हाल के वर्षों में सेलुलर और आणविक जीवविज्ञान केंद्र (CCMB, हैदराबाद) और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा भारत की आबादी के डीएनए पर बड़े शोध किए गए हैं।
* **एन्सेस्ट्रल साउथ इंडियन (ASI):** जेनेटिक रिसर्च में पाया गया है कि भारत की आबादी मुख्य रूप से दो प्राचीन जीनोम समूहों से मिलकर बनी है— 'एन्सेस्ट्रल नॉर्थ इंडियन' (ANI) और 'एन्सेस्ट्रल साउथ इंडियन' (ASI)।
* **निष्कर्ष:** भारत के आदिवासी समुदायों (जैसे भील, गोंड, संथाल, मुंडा और अंडमान की जनजातियां) में **ASI (Ancestral South Indian)** जीन का प्रतिशत सबसे शुद्ध और पुराना है। यह डीएनए साबित करता है कि उत्तर-पश्चिम या मध्य एशिया से लोगों (जैसे इंडो-आर्यन) के आने से बहुत पहले, ये लोग इस उपमहाद्वीप के मूल निवासी थे।
### ख) भाषाई साक्ष्य (Linguistic Evidence)
भारत के आदिवासियों की भाषाएं भारत की सबसे प्राचीन भाषा परिवारों से जुड़ी हैं:
* **ऑस्ट्रो-एशियाई और द्रविड़ियन भाषाएं:** संथाल, मुंडा और हो जैसी जनजातियां जो ऑस्ट्रो-एशियाई भाषाएं बोलती हैं, और गोंड या कुड़ुख जैसी जनजातियां जो द्रविड़ियन भाषाएं बोलती हैं— इनके भाषाई मूल भारत के सबसे पुराने भाषाई ढांचे को दर्शाते हैं, जो संस्कृत या इंडो-यूरोपियन भाषाओं के आने से पहले से यहाँ मौजूद था।
### ग) पुरातात्विक और सांस्कृतिक साक्ष्य (Archaeological & Cultural)
* **प्रकृति पूजा (Animism):** आदिवासियों की संस्कृति वेदों या मूर्तिकला से पुरानी है। वे आज भी 'सरना धरम' या प्रकृति पूजा (नदी, पहाड़, पेड़, जंगल) को मानते हैं। सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization) के कई अवशेषों और शैलचित्रों (Rock Paintings, जैसे भीमबेटका) में प्रकृति और पशु-पूजा के जो प्रमाण मिले हैं, वे आज के आदिवासी रीति-रिवाजों से सीधे मेल खाते हैं।
* **संवैधानिक मान्यता:** भारत का संविधान अपनी **पांचवीं और छठी अनुसूची (5th & 6th Schedule)** के तहत आदिवासी क्षेत्रों को विशेष स्वायत्तता और उनके जल, जंगल, जमीन पर अधिकार देता है, जो परोक्ष रूप से इस भूमि पर उनके सबसे पुराने दावे और विशिष्टता को स्वीकार करता है।
> **सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला (2011):**
> भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 'कैलाश बनाम महाराष्ट्र राज्य' मामले में अपने फैसले में स्पष्ट रूप से कहा था कि: *"भारत के आदिवासी (एसटी) ही इस देश के वास्तविक मूल निवासी (Original Inhabitants) हैं। बाकी की लगभग 92% आबादी उन प्रवासियों के वंशज हैं जो समय-समय पर बाहर से आकर यहाँ बसते गए।"*
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**संक्षेप में कहें तो:** विज्ञान (DNA), इतिहास, भाषा और देश की सर्वोच्च अदालत तीनों इस बात की पुष्टि करते हैं कि भारत के आदिवासी ही इस भूमि के सबसे प्राचीन और प्रामाणिक मूल निवासी हैं।
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