2027 तक भारतीय बाजार से रूठे रहेंगे विदेशी निवेशक बोफा की रिपोर्ट ?
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ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म **बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) ग्लोबल रिसर्च** ने हाल ही में भारतीय शेयर बाजार और विदेशी निवेशकों (FPI/FII) को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली और सतर्क करने वाली रिपोर्ट जारी की है।
बोफा (BofA) के इंडिया रिसर्च हेड अमिश शाह के मुताबिक, **विदेशी निवेशक कम से कम 2027 या 2028 से पहले बड़े पैमाने पर भारतीय बाजारों में वापस नहीं लौटने वाले हैं।** यानी 2026 और आने वाले कुछ समय तक वे भारतीय बाजार से काफी हद तक दूरी बनाए रख सकते हैं।
इस रिपोर्ट के पीछे बोफा ने मुख्य रूप से 3 बड़े कारण बताए हैं:
### 1. एशियन मार्केट में AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की धूम
इस समय वैश्विक निवेशकों का पूरा ध्यान **AI ओरिएंटेड (कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित) सेक्टर्स** पर है।
* ताइवान, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे अन्य एशियाई बाजारों में तकनीकी और सेमीकंडक्टर कंपनियां बहुत मजबूत हैं। वहाँ कंपनियों की अर्निंग (कमाई) के अनुमान बढ़ाए जा रहे हैं, जबकि भारत में पारंपरिक मैन्युफैक्चरिंग, बैंकिंग और सर्विसेज का बोलबाला है। विदेशी निवेशक अपना पैसा भारत से निकालकर उन देशों में लगा रहे हैं जहाँ AI की वजह से तेज ग्रोथ दिख रही है।
### 2. भारत में 'अर्निंग डाउनग्रेड' (कंपनियों की घटती कमाई)
* बोफा की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय कंपनियों की अर्निंग ग्रोथ (मुनाफे की रफ्तार) में उम्मीद के मुताबिक बढ़ोतरी नहीं हो रही है, बल्कि इसमें 'डाउनग्रेड' (कटौती) देखा जा रहा है।
* जब तक भारतीय कंपनियों का प्रॉफिट मार्जिन और अर्निंग मजबूत नहीं होती, तब तक विदेशी फंड्स भारत में पैसा लगाने से हिचकेंगे।
### 3. भारतीय बाजार का महंगा वैल्यूएशन (High Valuations)
विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय शेयर बाजार इस समय दुनिया के अन्य बाजारों की तुलना में काफी **महंगा (Expensive)** है। अन्य एशियाई देशों में शेयर कम कीमत (आकर्षक वैल्यूएशन) पर मिल रहे हैं, जबकि भारत में पीई रेशियो (P/E Ratio) काफी हाई है। बिना मजबूत मुनाफे के इतनी ऊंची कीमत चुकाना विदेशी निवेशकों को रास नहीं आ रहा है।
### 4. कमजोर होता रुपया (Weakening Rupee)
डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में आई कमजोरी भी एक बड़ी वजह है। विदेशी निवेशकों के लिए मुद्रा (Currency) का कमजोर होना उनके मुनाफे को कम कर देता है, जिसके कारण अकेले साल 2026 में अब तक रिकॉर्ड **23 अरब डॉलर** की विदेशी पूंजी भारत से बाहर जा चुकी है।
## क्या भारतीय बाजार पूरी तरह क्रैश हो जाएगा?
बोफा की रिपोर्ट भले ही विदेशी निवेशकों (FIIs) को लेकर निराशाजनक हो, लेकिन भारतीय बाजार के लिए एक अच्छी बात भी है:
* **घरेलू निवेशकों का दम (DIIs & SIP):** विदेशी निवेशक भले ही बिकवाली कर रहे हैं, लेकिन भारत के घरेलू संस्थागत निवेशक (जैसे म्यूचुअल फंड्स) और आम जनता की **SIP (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान)** के पैसे ने भारतीय बाजार को एक मजबूत सहारा दे रखा है। इसी वजह से FII की इतनी बड़ी बिकवाली के बाद भी बाजार पूरी तरह ताश के पत्तों की तरह नहीं बिखरा है।
> **निचोड़:** बोफा की रिपोर्ट साफ इशारा करती है कि जब तक भारत में कॉर्पोरेट अर्निंग की रफ्तार तेज नहीं होती और वैश्विक स्तर पर AI का क्रेज थोड़ा थमता नहीं, तब तक **2027 तक भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों का रुख 'रूठा' हुआ ही रहेगा।** यह समय लंबी अवधि के निवेशकों के लिए संभलकर और अच्छे वैल्यूएशन वाले शेयरों को चुनने का है।
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विदेशी निवेशकों की इस बिकवाली के बीच आप बाजार के माहौल को समझने के लिए Biz Tak का यह वीडियो विश्लेषण देख सकते हैं, जिसमें विस्तार से बताया गया है कि बोफा की भविष्यवाणियों और कंपनियों की अर्निंग ग्रोथ का भारतीय बाजार पर आगे क्या असर होने वाला है।
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