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उत्तराखंड में परिसीमन (Delimitation) और नए जिलों के गठन को लेकर राजनैतिक और सामाजिक गलियारों में काफी समय से चर्चाएं गर्म हैं। आपके इन तीनों सवालों का वर्तमान स्थिति और नियमों के आधार पर सटीक विश्लेषण नीचे दिया गया है:
## 1. परिसीमन होने पर कितनी विधानसभा सीटें बनेंगी?
भारत सरकार के नियमों के अनुसार, देश में अगला मुख्य लोकसभा और विधानसभा परिसीमन **2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना के आंकड़ों के आधार पर** किया जाना तय है।
* **वर्तमान स्थिति:** उत्तराखंड विधानसभा में वर्तमान में **70 सीटें** हैं।
* **परिसीमन के बाद अनुमान:** पहाड़ी क्षेत्रों से लगातार हो रहे पलायन और मैदानी इलाकों (जैसे देहरादून, हरिद्वार, उधमसिंह नगर) की तेजी से बढ़ती आबादी के कारण मैदानी क्षेत्रों की सीटें बढ़ने का अनुमान है। कुछ राजनैतिक और विशेषज्ञ आकलनों के अनुसार, परिसीमन के बाद उत्तराखंड में विधानसभा सीटों की संख्या बढ़कर **85 से 90 के बीच** हो सकती है।
> ⚠️ **महत्वपूर्ण तथ्य:** वर्ष **2027 में उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव** होने तय हैं। केंद्र सरकार द्वारा जब तक नए जनगणना के आधिकारिक आंकड़े जारी कर परिसीमन आयोग की रिपोर्ट को लागू नहीं किया जाता, तब तक चुनाव पुरानी 70 सीटों पर ही कराए जाएंगे।
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## 2. उत्तराखंड में कितने जिले बनेंगे?
जिले बनाने का अधिकार पूरी तरह से **राज्य सरकार** के पास होता है, इसके लिए केंद्रीय परिसीमन आयोग की जरूरत नहीं होती।
* **वर्तमान स्थिति:** उत्तराखंड में अभी **13 जिले** हैं।
* **नए जिलों की मांग:** उत्तराखंड में लंबे समय से छोटे प्रशासनिक नियंत्रण के लिए **4 से 6 नए जिलों** की मांग उठती रही है। इनमें प्रमुख रूप से **कोटद्वार, काशीपुर, रुड़की, डीडीहाट, रानीखेत और यमुनोत्री** शामिल हैं।
* भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के घोषणापत्रों में समय-समय पर नए जिलों के गठन की बात कही गई है, लेकिन वर्तमान धामी सरकार या किसी भी कैबिनेट ने अभी तक आधिकारिक रूप से नए जिलों की संख्या पर अंतिम मुहर नहीं लगाई है।
## 3. क्या चकराता और विकासनगर मिलकर एक ही जिला बनेंगे?
जौनसार-बावर (चकराता) और पछवादून (विकासनगर) क्षेत्र के लोगों द्वारा लंबे समय से एक अलग जिले की मांग की जा रही है, जिसे अक्सर **"जौनसार-बावर जिला"** या **"पछवादून जिला"** नाम देने का प्रस्ताव स्थानीय नेताओं द्वारा रखा जाता है।
इसके समीकरण को इस तरह समझा जा सकता है:
* **भौगोलिक और प्रशासनिक तालमेल:** चकराता, त्यूणी और कालसी पहाड़ी/जनजातीय क्षेत्र हैं, जबकि विकासनगर और सहसपुर मैदानी (पछवादून) क्षेत्र में आते हैं। वर्तमान में ये सभी देहरादून जिले का हिस्सा हैं।
* **मांग का आधार:** विकासनगर इन सभी क्षेत्रों का मुख्य व्यापारिक और प्रशासनिक केंद्र है। स्थानीय संगठनों का तर्क है कि यदि चकराता, कालसी, त्यूणी और विकासनगर को मिलाकर एक नया जिला बनाया जाता है, तो पहाड़ी क्षेत्र के लोगों को जिला मुख्यालय (देहरादून) के लंबे चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
* **क्या ऐसा होगा?** राजनैतिक रूप से यह मांग काफी मजबूत है, लेकिन सरकार के स्तर पर अभी तक विकासनगर-चकराता को मिलाकर अलग जिला बनाने की **कोई आधिकारिक घोषणा या शासनादेश (Government Order) जारी नहीं हुआ है**। यह पूरी तरह भविष्य में राज्य सरकार के राजनैतिक निर्णय पर निर्भर करता है।
क्या आप इस परिसीमन के बारे में किसी खास क्षेत्र की राजनैतिक सीटों (जैसे अनुसूचित जनजाति/ST सीट) के प्रभाव को लेकर जानकारी चाहते हैं?
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