एक व्यक्ति को अपनी संपत्ति का कितना प्रतिशत बच्चों के लिए छोड़ना चाहिए?

यह एक बहुत ही व्यक्तिगत निर्णय है, लेकिन वित्तीय विशेषज्ञों और सफल अभिभावकों के अनुभवों के आधार पर एक 'आदर्श संतुलन' बनाया जा सकता है। इसका कोई एक तय प्रतिशत नहीं है, बल्कि यह 'जरूरत' और 'विरासत' के बीच का बंटवारा है। आम तौर पर, एक समझदारी भरा फॉर्मूला कुछ इस तरह दिख सकता है: 1. सुरक्षा निधि (20-30%): बुनियादी जरूरतें इतनी संपत्ति बच्चों के नाम होनी चाहिए जो उनके जीवन की बुनियादी जरूरतों को सुरक्षित करे। * शिक्षा: दुनिया की बेहतरीन शिक्षा का खर्च। * घर: रहने के लिए एक सुरक्षित छत। * आपातकालीन फंड: स्वास्थ्य या किसी अप्रत्याशित संकट के समय काम आने वाला पैसा। > तर्क: यह हिस्सा बच्चों को एक 'सेफ्टी नेट' देता है ताकि वे गरीबी के डर के बिना अपने सपनों का पीछा कर सकें। > 2. विकास और निवेश (30-40%): बिजनेस या करियर के लिए यह हिस्सा सीधे कैश के रूप में देने के बजाय ट्रस्ट या निवेश के रूप में होना चाहिए। * इसे तब दिया जाना चाहिए जब बच्चा एक निश्चित उम्र (जैसे 25 या 30 साल) पार कर ले और अपनी योग्यता साबित कर दे। * यह पूंजी उनके स्टार्टअप, उच्च शिक्षा या किसी बड़े प्रोफेशनल लक्ष्य के लिए 'सीड मनी' (Seed Money) का काम करती है। 3. चैरिटी या समाज (30-50%): खुद की मेहनत की प्रेरणा दुनिया के कई सफल लोग अपनी संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा समाज को लौटा देते हैं। * जब बच्चों को पता होता है कि उन्हें हजारों करोड़ रुपये मुफ्त में नहीं मिलने वाले, तो उनकी 'काम करने की भूख' जीवित रहती है। * यह उन्हें खुद की पहचान बनाने और समाज के प्रति जिम्मेदार बनने के लिए प्रेरित करता है। बच्चों को प्रेरित करने के 3 'गोल्डन रूल्स' अगर आप चाहते हैं कि आपके बच्चे मेहनत करें, तो संपत्ति के प्रतिशत से ज्यादा इन बातों पर ध्यान देना जरूरी है: * शिक्षा बनाम नकद (Skills over Cash): बच्चों को महंगी कारों के बजाय 'महंगे स्किल्स' और 'अनुभव' दें। ज्ञान वह संपत्ति है जिसे वे कभी गँवा नहीं सकते। * मैचिंग ग्रांट (Matching Grant): एक बहुत ही प्रभावी तरीका यह है कि आप कहें, "तुम अपनी मेहनत से जितना कमाओगे, मैं उतना ही अपनी संपत्ति से तुम्हें जोड़कर दूंगा।" इससे उन्हें ज्यादा मेहनत करने का प्रोत्साहन मिलता है। * वित्तीय साक्षरता: उन्हें बचपन से ही पैसे के प्रबंधन, निवेश और घाटे के बारे में सिखाएं। जिसे पैसे की 'कीमत' पता होती है, वह उसे 'बर्बाद' नहीं करता। निष्कर्ष (मेरा सुझाव) एक मध्यमवर्गीय या उच्च-मध्यमवर्गीय परिवार के लिए 50-50 का नियम बेहतरीन काम करता है: * 50% संपत्ति: बच्चों के भविष्य, शिक्षा और सुरक्षा के लिए। * 50% संपत्ति: आपके स्वयं के रिटायरमेंट, सामाजिक कार्यों या चैरिटी के लिए। इससे बच्चों को यह संदेश जाता है कि उनके पास एक मजबूत आधार (Base) तो है, लेकिन शिखर (Peak) तक उन्हें खुद ही चढ़ना होगा। क्या आपको लगता है कि आजकल के दौर में बच्चों को संघर्ष (Struggle) का अनुभव कराना जरूरी है, या उन्हें हर सुख-सुविधा देना ही एक माता-पिता का असली कर्तव्य है?

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