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टाटा ग्रुप भारत का सबसे पुराना और सम्मानित बिजनेस ग्रुप है। टाटा की कार्यशैली की खास बात यह है कि यहाँ प्रमोटर (जैसे रतन टाटा) अपनी निजी संपत्ति बढ़ाने के बजाय चैरिटी (टाटा ट्रस्ट) पर ध्यान देते हैं, जबकि ग्रुप को चलाने वाले **प्रोफेशनल सीईओ** को उनकी योग्यता के अनुसार वैश्विक स्तर का वेतन दिया जाता है।
वित्त वर्ष **2024-25 (FY25)** की ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, टाटा ग्रुप के प्रमुख अधिकारियों का सैलरी पैकेज इस प्रकार है:
### 1. एन. चंद्रशेखरन (Executive Chairman, टाटा संस)
टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी 'टाटा संस' के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन इस समय भारत के सबसे अधिक वेतन पाने वाले प्रोफेशनल अधिकारियों में से एक हैं।
* **सालाना सैलरी:** लगभग **₹155.81 करोड़** (FY25)
* **ब्रेकअप:** इसमें से करीब ₹15.1 करोड़ फिक्स्ड सैलरी है और शेष **₹140.7 करोड़ कमीशन (प्रॉफिट पर आधारित)** है।
* **बढ़ोतरी:** पिछले साल की तुलना में उनके पैकेज में 15% का इजाफा हुआ है।
### 2. के. कृतिवासन (CEO, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज - TCS)
टाटा ग्रुप की सबसे मुनाफे वाली कंपनी TCS के प्रमुख का वेतन भी काफी चर्चा में रहता है।
* **सालाना सैलरी:** लगभग **₹26.52 करोड़** (FY24-25)
* **ब्रेकअप:** इसमें ₹1.39 करोड़ बेस सैलरी और ₹23 करोड़ कमीशन शामिल है।
### 3. अन्य प्रमुख कंपनियों के सीईओ
टाटा की अन्य बड़ी कंपनियों के अधिकारियों का अनुमानित पैकेज इस प्रकार है:
| अधिकारी | पद | कंपनी | सालाना सैलरी (FY25) |
|---|---|---|---|
| **टी. वी. नरेंद्रन** | CEO & MD | टाटा स्टील | **₹17.3 करोड़** |
| **सौरभ अग्रवाल** | Executive Director | टाटा संस | **₹32.7 करोड़** |
| **गोपाल विट्ठल** | CEO | भारती एयरटेल (पूर्व टाटा संबंध) | **₹20.24 करोड़** |
### टाटा ग्रुप की सैलरी नीति की विशेषताएँ:
1. **प्रॉफिट कमीशन:** टाटा ग्रुप में फिक्स्ड सैलरी कम रखी जाती है, लेकिन कंपनी के मुनाफे में से मिलने वाला कमीशन (Commission on Profit) बहुत अधिक होता है। इसका मतलब है कि अगर कंपनी अच्छा प्रदर्शन करेगी, तभी सीईओ को बड़ी सैलरी मिलेगी।
2. **समानता और नैतिकता:** टाटा ग्रुप के सीईओ का वेतन अदानी या रिलायंस के कुछ शीर्ष अधिकारियों की तुलना में कभी-कभी कम लग सकता है, लेकिन यह ग्रुप अपने कर्मचारियों के कल्याण और समाज सेवा के लिए जाना जाता है।
3. **प्रोफेशनल लीडरशिप:** टाटा ग्रुप ने यह साबित किया है कि बिना परिवार के सदस्य हुए भी (जैसे चंद्रशेखरन), कोई व्यक्ति अपनी काबिलियत के दम पर देश की सबसे बड़ी सैलरी पा सकता है।
###**'प्रोफेशनल मैनेजर'** अब नए जमाने के राजा बन गए हैं, एन. चंद्रशेखरन इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं। वे एक इंटर्न के रूप में TCS में आए थे और आज अपनी योग्यता के दम पर पूरे टाटा साम्राज्य का नेतृत्व कर रहे हैं और करोड़ों का पैकेज ले रहे हैं।
यह बदलाव भारत में इस बात का संकेत है कि अब "डिग्री और पद" से ज्यादा **"परफॉर्मेंस और विजन"** को VIP दर्जा और आर्थिक सम्मान दिया जाता है।
क्या आपको लगता है कि एक प्रोफेशनल का ₹155 करोड़ कमाना समाज के लिए प्रेरणादायक है, या इससे अमीर और गरीब के बीच की खाई और अधिक गहरी होती जा रही है?
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