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भारत में नक्सलवाद (वामपंथी उग्रवाद) को लेकर 31 मार्च 2026 की तारीख एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुई है। गृह मंत्री अमित शाह ने दो साल पहले यह लक्ष्य रखा था कि इस तारीख तक भारत से नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा।
कल और आज (1 अप्रैल 2026) की ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार, इस अभियान के परिणाम कुछ इस प्रकार रहे हैं:
1. 'डेडलाइन' का असर: हथियारों का समर्पण
31 मार्च की समय सीमा समाप्त होते ही, छत्तीसगढ़ के बस्तर, महाराष्ट्र के गढ़चिरौली और ओडिशा के सीमावर्ती इलाकों से नक्सलियों के बड़े पैमाने पर आत्मसमर्पण (Surrender) की खबरें आई हैं।
* बस्तर और सुकमा: पिछले एक हफ्ते में सैकड़ों सक्रिय कैडरों ने हथियार डाले हैं। अकेले सुकमा और बीजापुर जिले में कई 'एरिया कमेटी' के सदस्यों ने आत्मसमर्पण किया है।
* गढ़चिरौली: महाराष्ट्र पुलिस के अनुसार, छत्तीसगढ़ से लगी सीमा पार कर कई हथियारबंद नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जिसमें भारी मात्रा में विस्फोटक और हथियार भी बरामद हुए हैं।
2. गृह मंत्री का बयान (लोकसभा - 30 मार्च 2026)
गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में विश्वास जताया कि भारत अब प्रभावी रूप से "नक्सल-मुक्त" होने की राह पर है। उन्होंने आंकड़ों के जरिए बताया:
* पिछले कुछ वर्षों में लगभग 4,800 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है।
* जो नक्सली मुख्यधारा में नहीं लौटे, उनके खिलाफ कड़े ऑपरेशन चलाए गए।
* सरकार का दावा है कि अब नक्सली केवल कुछ छोटे पॉकेट्स (जैसे अबूझमाड़ के कुछ हिस्से) तक ही सीमित रह गए हैं और उनकी संगठित सैन्य शक्ति पूरी तरह टूट चुकी है।
3. राज्यों की स्थिति
* छत्तीसगढ़: राज्य के उप-मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने घोषणा की है कि छत्तीसगढ़ में 'सशस्त्र नक्सलवाद' का लगभग अंत हो चुका है। अब ध्यान विकास, सड़क निर्माण और स्कूलों पर है।
* ओडिशा: ओडिशा ने खुद को नक्सली प्रभाव से मुक्त घोषित करते हुए अपनी पुरानी आत्मसमर्पण नीति को भी बंद करने की ओर कदम बढ़ाया है, क्योंकि अब वहां सक्रिय कैडर न के बराबर बचे हैं।
* तेलंगाना और आंध्र प्रदेश: इन राज्यों ने पहले ही अपनी सीमाओं को सुरक्षित कर लिया था।
4. नक्सलियों ने हथियार क्यों डाले?
विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे तीन मुख्य कारण रहे हैं:
* घेराबंदी (Choke Points): सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के सप्लाई चेन और रसद के रास्तों को ब्लॉक कर दिया।
* तकनीक का इस्तेमाल: ड्रोन और आधुनिक इंटेलिजेंस (Precise Intelligence) की वजह से जंगल में छिपना मुश्किल हो गया।
* विश्वास बहाली: सरकार की पुनर्वास (Rehabilitation) नीति के तहत सरेंडर करने वालों को घर, नकद सहायता और रोजगार के अवसर दिए जा रहे हैं।
निष्कर्ष: हालांकि 31 मार्च 2026 को एक "अंत" की तरह देखा जा रहा है, लेकिन सुरक्षा बल अभी भी हाई अलर्ट पर हैं। अब मुख्य चुनौती 'बचे हुए बारूदी सुरंगों (IEDs)' को हटाने और इन दुर्गम इलाकों में शासन व प्रशासन को पूरी तरह स्थापित करने की है।
क्या आप इस बारे में और विस्तार से जानना चाहते हैं कि सरेंडर करने वाले नक्सलियों के लिए सरकार की पुनर्वास योजना (Rehabilitation Policy) क्या है?
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