भारत का न्यूक्लियर ब्रीडर रिएक्टर कौन सी एडवांस स्टेज का रिएक्टर है?

भारत का परमाणु कार्यक्रम विशेष रूप से **थ्री-स्टेज परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम (Three-Stage Nuclear Power Programme)** पर आधारित है। आपका सवाल जिस रिएक्टर की ओर इशारा कर रहा है, वह इस कार्यक्रम के **दूसरे चरण (Stage 2)** का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे **प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR)** कहा जाता है। ### PFBR की मुख्य विशेषताएं * **स्थान:** यह तमिलनाडु के **कलपक्कम** में स्थित है। * **क्षमता:** इसकी उत्पादन क्षमता **500 MWe** है। * **तकनीक:** यह एक 'फास्ट ब्रीडर' रिएक्टर है, जिसका अर्थ है कि यह जितना ईंधन (Fissile material) खर्च करता है, उससे कहीं अधिक नया ईंधन पैदा करता है। ### भारत का थ्री-स्टेज प्रोग्राम: एक नज़र में भारत के पास थोरियम का विशाल भंडार है, लेकिन थोरियम को सीधे ईंधन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसी चुनौती से निपटने के लिए डॉ. होमी जहांगीर भाभा ने तीन चरणों वाली रणनीति बनाई थी: | चरण | रिएक्टर का प्रकार | मुख्य ईंधन | उद्देश्य | |---|---|---|---| | **स्टेज 1** | दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWR) | प्राकृतिक यूरेनियम | प्लूटोनियम-239 का उत्पादन करना। | | **स्टेज 2** | **फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBR)** | प्लूटोनियम और यूरेनियम | थोरियम से यूरेनियम-233 बनाना और ऊर्जा पैदा करना। | | **स्टेज 3** | ब्रीडर रिएक्टर (थोरियम आधारित) | थोरियम और यू-233 | भारत के विशाल थोरियम भंडार का पूर्ण उपयोग करना। | ### यह "एडवांस" क्यों है? 1. **स्वदेशी तकनीक:** PFBR पूरी तरह से भारत में डिजाइन और विकसित किया गया है। रूस के बाद भारत दूसरा ऐसा देश है जिसके पास व्यावसायिक स्तर पर संचालित होने वाला फास्ट ब्रीडर रिएक्टर है। 2. **ऊर्जा सुरक्षा:** यह चरण भारत को तीसरे चरण (थोरियम आधारित ऊर्जा) की ओर ले जाने वाला पुल है, जो भारत को आने वाले सदियों के लिए ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बना सकता है। 3. **सुरक्षा:** इसमें लिक्विड सोडियम (Liquid Sodium) को कूलेंट के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, जो उच्च तापमान पर भी स्थिर रहता है। हाल ही में (मार्च 2024 में), प्रधानमंत्री ने कलपक्कम में इसके **"कोर लोडिंग" (Core Loading)** की शुरुआत की, जो इस रिएक्टर के चालू होने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। क्या आप इस बारे में और विस्तार से जानना चाहते हैं कि थोरियम को बिजली में कैसे बदला जाता है?

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