भारत में ग्लोबल फॉरेस्ट वॉच के पर्यावरण आंकड़े क्या कहते हैं?

**ग्लोबल फॉरेस्ट वॉच (Global Forest Watch - GFW)** के हालिया आंकड़ों (2024-2026) के अनुसार, भारत में वनों की स्थिति को लेकर कुछ चिंताजनक और कुछ मिश्रित संकेत मिले हैं। GFW सैटेलाइट डेटा का उपयोग करके पेड़ों के आवरण (Tree Cover) में होने वाले बदलावों की निगरानी करता है। भारत के संदर्भ में मुख्य आंकड़े और निष्कर्ष निम्नलिखित हैं: ### 1. प्राथमिक वनों का नुकसान (Primary Forest Loss) * **2024 का डेटा:** भारत ने 2024 में लगभग **18,200 हेक्टेयर** प्राथमिक वन (पुराने और घने जंगल) खो दिए। यह 2023 (17,700 हेक्टेयर) की तुलना में वृद्धि दर्शाता है। * **लंबी अवधि का प्रभाव:** 2002 से 2024 के बीच, भारत ने अपने कुल 'ह्यूमिड प्राइमरी फॉरेस्ट' का लगभग **5.4%** हिस्सा खो दिया है। ### 2. ट्री कवर लॉस (Tree Cover Loss) * **कुल गिरावट:** 2001 से 2024 के बीच, भारत ने कुल **2.31 मिलियन हेक्टेयर** ट्री कवर खोया है। यह भारत के कुल ट्री कवर में लगभग **7.1%** की कमी के बराबर है। * **कार्बन उत्सर्जन:** इस नुकसान के कारण पर्यावरण में भारी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड (लगभग 1.29 गीगाटन CO2 उत्सर्जन के बराबर) मुक्त हुई है। ### 3. वनाग्नि (Forest Fires) का बढ़ता खतरा GFW के ताज़ा अलर्ट्स (अप्रैल 2026 तक) के अनुसार: * भारत में **वनाग्नि** अब वनों के नुकसान का एक बड़ा कारण बनती जा रही है। * 2024 में आग के कारण होने वाले प्राथमिक वन नुकसान में **158% की भारी वृद्धि** देखी गई। * ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश और असम जैसे राज्य आग की घटनाओं से सबसे अधिक प्रभावित रहे हैं। ### 4. राज्यों की स्थिति (State-wise Data) भारत में वनों की कटाई और नुकसान का सबसे अधिक प्रभाव **पूर्वोत्तर राज्यों** में देखा गया है: * **असम:** 2001-2024 के बीच सबसे अधिक नुकसान (लगभग 3.4 लाख हेक्टेयर) यहीं हुआ। * **मिजोरम, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश:** इन राज्यों में भी खेती (झूम खेती), बुनियादी ढांचे के विकास और आग के कारण वनों में बड़ी कमी आई है। ### 5. सकारात्मक पहलू: वनों का बढ़ना (Tree Cover Gain) GFW यह भी बताता है कि नुकसान के साथ-साथ भारत ने सुधार भी किया है: * 2000 से 2020 के बीच भारत ने लगभग **1.78 मिलियन हेक्टेयर** ट्री कवर हासिल भी किया है। * भारत वर्तमान में वनों के मामले में एक **'नेट कार्बन सिंक'** बना हुआ है, यानी हमारे जंगल जितनी कार्बन छोड़ते हैं, उससे कहीं अधिक सोखते हैं। ### निष्कर्ष आंकड़े बताते हैं कि जहां एक ओर वृक्षारोपण अभियानों से हरियाली बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर हमारे **प्राचीन और प्राकृतिक जंगल (Primary Forests)** तेजी से खत्म हो रहे हैं। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि नए लगाए गए पेड़ कभी भी पुराने प्राकृतिक वनों की जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन की जगह नहीं ले सकते। क्या आप भारत के किसी विशेष राज्य या क्षेत्र के वनों के आंकड़ों के बारे में जानना चाहते हैं?

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