भारत मैं हर साल औद्योगिक 1.566cr टन जहरीला कजरा पैदा हो रहा है?

यह एक बेहद गंभीर और चिंताजनक आँकड़ा है। भारत में औद्योगिक विकास के साथ-साथ **कचरा प्रबंधन (Waste Management)** आज के समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन गया है। यहाँ इस समस्या के कुछ मुख्य पहलू और इसके प्रभाव दिए गए हैं: ### 1. कचरे के मुख्य स्रोत भारत में जहरीला या खतरनाक कचरा (Hazardous Waste) मुख्य रूप से इन उद्योगों से निकलता है: * **पेट्रोकेमिकल्स और फार्मास्युटिकल्स:** यहाँ से निकलने वाले रसायन पानी और मिट्टी को बुरी तरह प्रदूषित करते हैं। * **धातु शोधन (Metallurgy):** भारी धातुएँ जैसे सीसा (Lead), पारा (Mercury) और कैडमियम। * **चमड़ा उद्योग (Tanneries):** इसमें क्रोमियम का भारी मात्रा में उपयोग होता है जो कैंसरकारी हो सकता है। * **ई-कचरा (E-waste):** पुराने इलेक्ट्रॉनिक्स से निकलने वाले जहरीले तत्व। ### 2. पर्यावरण और स्वास्थ्य पर प्रभाव अगर इस 1.566 करोड़ टन कचरे का सही निपटान नहीं किया गया, तो इसके परिणाम घातक होते हैं: * **भूजल प्रदूषण:** जहरीले रसायन जमीन में रिसकर पीने के पानी को जहरीला बना देते हैं। * **खाद्य श्रृंखला (Food Chain):** ये रसायन फसलों के जरिए हमारे भोजन में पहुँच जाते हैं, जिससे कैंसर और अंगों की विफलता जैसी बीमारियाँ होती हैं। * **मिट्टी की उर्वरता:** रासायनिक कचरे के कारण जमीन बंजर हो जाती है। ### 3. भारत सरकार के नियम और कदम सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए **Hazardous Waste Management Rules (2016)** लागू किए हैं, जिसके तहत: 1. **कचरे का वर्गीकरण:** कचरे को उसकी प्रकृति के आधार पर अलग करना अनिवार्य है। 2. **TSDF (Treatment, Storage, and Disposal Facilities):** कचरे को सुरक्षित रूप से जलाने या दफनाने के लिए विशेष केंद्रों की स्थापना। 3. **Extended Producer Responsibility (EPR):** कंपनियों की यह जिम्मेदारी है कि वे अपने द्वारा फैलाए गए कचरे का प्रबंधन करें। ### 4. समाधान की राह * **Circular Economy:** कचरे को फेंकने के बजाय उसे 'रीसायकल' करके फिर से उपयोग में लाना। * **Zero Liquid Discharge (ZLD):** कारखानों से एक बूंद भी गंदा पानी बाहर न निकलने देना। * **सख्त निगरानी:** केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा उद्योगों पर कड़ी निगरानी और भारी जुर्माना। > **एक कड़वा सच:** डेटा बताते हैं कि इस कुल कचरे का एक बड़ा हिस्सा आज भी अवैध रूप से नदियों या खाली मैदानों में फेंक दिया जाता है। इसे रोकने के लिए तकनीक के साथ-साथ कड़े राजनीतिक इच्छाशक्ति की भी जरूरत है।

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