- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
भारत से करोड़पतियों (Millionaires) के बाहर जाने का सिलसिला पिछले कई वर्षों से जारी है, लेकिन राहत की बात यह है कि हाल के सालों में इस संख्या में **गिरावट** देखी गई है।
'हेनले प्राइवेट वेल्थ माइग्रेशन रिपोर्ट' (Henley Private Wealth Migration Report) के आंकड़ों के अनुसार, भारत से बाहर जाने वाले हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNWIs) का विवरण इस प्रकार है:
### **सालाना आंकड़े (अनुमानित)**
| वर्ष | देश छोड़ने वाले करोड़पतियों की संख्या |
|---|---|
| **2025 (अनुमानित)** | **3,500** |
| **2024** | **4,300** |
| **2023** | **5,100** (कुछ रिपोर्ट्स में 6,500 तक का अनुमान था) |
| **2022** | **7,500** |
### **प्रमुख बिंदु:**
* **कब से शुरू हुआ यह रुझान?**
करोड़पतियों का पलायन भारत के लिए नया नहीं है, लेकिन 2014 के बाद से इस पर अधिक चर्चा होने लगी। आंकड़ों के अनुसार, **2014 से 2020** के बीच लगभग **35,000** अमीर उद्यमियों ने देश छोड़ा था।
* **गिरावट का कारण:** विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में लौटते हुए निवेश के अवसर और बेहतर होती अर्थव्यवस्था के कारण अब कम लोग देश छोड़ रहे हैं। 2022 में यह संख्या 7,500 थी, जो 2025 तक घटकर 3,500 रहने का अनुमान है।
* **पसंदीदा देश:** भारतीय अमीरों की पहली पसंद **UAE (दुबई)**, **सिंगापुर**, **अमेरिका** और **ऑस्ट्रेलिया** जैसे देश बने हुए हैं। इसका मुख्य कारण वहां के सरल टैक्स कानून, बेहतर जीवनशैली और 'गोल्डन वीजा' जैसी सुविधाएं हैं।
* **चिंता का विषय:** हालांकि जाने वालों की संख्या कम हो रही है, फिर भी पलायन करने वाले ये 3,500 लोग अपने साथ लगभग **26.2 अरब डॉलर** की संपत्ति बाहर ले जा सकते हैं, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक "ब्रेन ड्रेन" और "कैपिटल ड्रेन" जैसा है।
**संक्षेप में:** भारत अभी भी दुनिया में करोड़पतियों के पलायन के मामले में (चीन और ब्रिटेन के बाद) तीसरे स्थान पर है, लेकिन देश के भीतर करोड़पतियों के बनने की रफ्तार (72% वृद्धि पिछले दशक में) जाने वालों की तुलना में कहीं अधिक है।
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
टिप्पणियाँ