डॉ आंबेडकर को पहले जाना तब देश ने माना,अंबेडकर जयंती पर कुछ खास?

बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के बारे में यह कहना बिल्कुल सटीक है कि **"जब देश ने उन्हें जाना, तब उनकी महत्ता को माना।"** वे केवल एक संविधान निर्माता नहीं थे, बल्कि एक विचार थे, जो सदियों से सोए हुए समाज को जगाने के लिए मशाल बनकर आए। 14 अप्रैल को उनकी जयंती के अवसर पर, आइए उनके व्यक्तित्व के उन पहलुओं को याद करें जिन्होंने भारत की नींव को मजबूती दी: ### 1. शिक्षा: सबसे शक्तिशाली शस्त्र बाबा साहेब का मानना था कि शिक्षा ही वह एकमात्र रास्ता है जिससे गुलामी की जंजीरें काटी जा सकती हैं। उनका नारा आज भी गूंजता है: > **"शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो।"** > उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से डॉक्टर ऑफ साइंस की उपाधि प्राप्त की, जो उस दौर में किसी भारतीय के लिए एक असाधारण उपलब्धि थी। > ### 2. केवल दलितों के नहीं, 'मानवता' के मसीहा अक्सर उन्हें केवल एक खास वर्ग का नेता मान लिया जाता है, लेकिन डॉ. अंबेडकर का योगदान पूरे भारत के लिए था: * **महिलाओं के अधिकार:** 'हिंदू कोड बिल' के जरिए उन्होंने महिलाओं को संपत्ति और तलाक जैसे कानूनी अधिकार दिलाने की नींव रखी। * **मजदूरों का हित:** आज जो हम **8 घंटे काम** की शिफ्ट देखते हैं, वह डॉ. अंबेडकर की ही देन है (इससे पहले यह 12-14 घंटे हुआ करती थी)। * **अर्थशास्त्र की नींव:** भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की स्थापना उन्हीं के शोध "The Problem of the Rupee" पर आधारित है। ### 3. संविधान: भारत की आत्मा डॉ. अंबेडकर ने संविधान के माध्यम से भारत को एक सूत्र में पिरोया। उन्होंने सुनिश्चित किया कि भारत एक ऐसा लोकतंत्र बने जहाँ: * जाति, धर्म या लिंग के आधार पर कोई भेदभाव न हो। * हर नागरिक को 'एक वोट, एक मूल्य' का अधिकार मिले। * कमजोर वर्गों को मुख्यधारा में लाने के लिए सुरक्षा कवच (आरक्षण) प्राप्त हो। ### इस जयंती पर कुछ खास विचार * **आंतरिक सुधार:** जयंती मनाने का अर्थ केवल मूर्ति पर माला चढ़ाना नहीं, बल्कि उनके द्वारा लिखे गए साहित्य को पढ़ना और तर्कसंगत सोच विकसित करना है। * **समतामूलक समाज:** बाबा साहेब चाहते थे कि भारत में 'स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व' (Liberty, Equality, Fraternity) के सिद्धांत केवल किताबों में न रहें, बल्कि हमारे व्यवहार में आएं। * **राष्ट्र प्रथम:** वे कहते थे, *"मैं पहले भी भारतीय हूँ और अंत में भी भारतीय ही हूँ।"* उनकी देशभक्ति उनके हर निर्णय में झलकती थी। **निष्कर्ष** आज का भारत यदि आधुनिक और प्रगतिशील है, तो उसका श्रेय काफी हद तक डॉ. अंबेडकर की दूरदर्शिता को जाता है। उन्हें जानना ही लोकतंत्र को जानना है। ** जय हिंद जय भारत!**

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