नक्सल पुनर्वास और आत्मसमर्पण नीति?

भारत सरकार की नक्सल पुनर्वास और आत्मसमर्पण नीति (Surrender & Rehabilitation Policy) का मुख्य उद्देश्य नक्सलियों को हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में वापस लाना है। 2026 में इस नीति को और भी अधिक उदार और भविष्योन्मुखी बनाया गया है। यहाँ इस योजना के मुख्य पहलू दिए गए हैं: 1. तत्काल आर्थिक सहायता और सावधि जमा (FD) * एकमुश्त अनुदान: आत्मसमर्पण करने वाले प्रत्येक नक्सली को तुरंत ₹5 लाख से ₹8 लाख (उनके पद और रैंक के आधार पर) की वित्तीय सहायता दी जाती है। * सावधि जमा (FD): इस राशि का एक हिस्सा बैंक में FD के रूप में जमा किया जाता है, जिसे 3 साल की "अच्छे व्यवहार" की अवधि पूरी होने के बाद निकाला जा सकता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पैसा भविष्य के लिए सुरक्षित रहे। 2. हथियारों के बदले पुरस्कार (Incentives for Weapons) हथियार डालने पर अतिरिक्त नकद पुरस्कार दिया जाता है: * AK-47/56: ₹2 लाख से ₹3 लाख तक। * LMG/Rocket Launcher: ₹5 लाख तक। * पिस्तौल/रिवॉल्वर: ₹50,000 से ₹1 लाख। * IED/विस्फोटक: ₹10,000 से ₹25,000 प्रति किलो। 3. आवास और आजीविका (Housing & Livelihood) * प्रधानमंत्री आवास योजना: आत्मसमर्पण करने वालों को रहने के लिए पक्का मकान बनाने हेतु वित्तीय सहायता दी जाती है। * कृषि भूमि: कुछ राज्यों में (जैसे छत्तीसगढ़ और ओडिशा) खेती के लिए जमीन देने का भी प्रावधान है ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें। 4. शिक्षा और कौशल विकास (Skill Development) * व्यावसायिक प्रशिक्षण: सरकार उन्हें ड्राइविंग, कंप्यूटर रिपेयरिंग, खेती की आधुनिक तकनीक, या सिलाई-कढ़ाई जैसे कार्यों का प्रशिक्षण देती है। * मासिक वजीफा (Stipend): प्रशिक्षण की अवधि के दौरान उन्हें लगभग ₹5,000 से ₹8,000 प्रति माह का वजीफा दिया जाता है ताकि वे अपना खर्च उठा सकें। 5. कानूनी मदद और सुरक्षा * केस की समीक्षा: आत्मसमर्पण करने वालों के खिलाफ दर्ज छोटे मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाती है। हालांकि, जघन्य अपराधों (जैसे हत्या) के मामले अदालती प्रक्रिया के अधीन रहते हैं, लेकिन वकील का खर्च सरकार वहन करती है। * सुरक्षा: उन्हें और उनके परिवारों को पूर्व साथियों (नक्सलियों) के बदले की भावना से बचाने के लिए विशेष सुरक्षा या सुरक्षित घरों (Safe Houses) में रखा जाता है। राज्यवार विशेष पहल (विशेष रूप से 2026 के लिए): | राज्य | विशेष नीति | |---|---| | छत्तीसगढ़ (बस्तर) | 'लोन वर्राटू' (घर वापस आइए) अभियान के तहत गांव-गांव में पोस्टर लगाकर परिवारों के जरिए वापसी की अपील। | | महाराष्ट्र (गढ़चिरौली) | आत्मसमर्पण करने वालों को स्थानीय पुलिस भर्ती में विशेष प्राथमिकता या सुरक्षा सहायक के रूप में नियुक्ति। | | ओडिशा | आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली की शादी के लिए आर्थिक सहायता और बच्चों के लिए मुफ्त उच्च शिक्षा। | सबसे बड़ी चुनौती: 'भरोसा' पुनर्वास नीति की सफलता का सबसे बड़ा आधार भरोसा है। सरकार अब केवल आत्मसमर्पण नहीं करवा रही, बल्कि उन्हें 'विकास दूत' बना रही है। कई पूर्व नक्सली अब सुरक्षा बलों को रास्तों और बारूदी सुरंगों (IEDs) की जानकारी देने में मदद कर रहे हैं, जिससे सुरक्षा बलों और ग्रामीणों के बीच का फासला कम हुआ है। क्या आपको लगता है कि आर्थिक लाभ और सुरक्षा की गारंटी उन कट्टरपंथी विचारधारा वाले नेताओं को भी बदलने में सफल होगी जो अभी भी जंगलों में छिपे हैं?

टिप्पणियाँ