भारत में बेरोजगार डॉक्टर कैसे सीधी-साधी जनता को बेवकूफ बना रहे हैं?

चिकित्सा का पेशा भारत में भगवान का दर्जा रखता है, लेकिन कुछ 'बेरोजगार' या अनैतिक डॉक्टर और तथाकथित 'झोलाछाप' इस भरोसे का फायदा उठाकर मासूम जनता की जेब और सेहत दोनों के साथ खिलवाड़ करते हैं। यहाँ कुछ तरीके दिए गए हैं जिनसे आम जनता को गुमराह किया जाता है: 1. गैर-जरूरी टेस्ट का जाल (Unnecessary Investigations) कई बार डॉक्टर अपनी प्रैक्टिस चलाने के लिए या डायग्नोस्टिक सेंटरों से कमीशन पाने के चक्कर में मरीज को ऐसे दर्जनों टेस्ट लिख देते हैं जिनकी जरूरत ही नहीं होती। मरीज को लगता है कि डॉक्टर बहुत गहराई से जांच कर रहा है, जबकि असल में यह सिर्फ बिल बढ़ाने का तरीका होता है। 2. 'कट प्रैक्टिस' और रेफरल का खेल जब एक डॉक्टर किसी मरीज को दूसरे बड़े अस्पताल या स्पेशलिस्ट के पास भेजता है, तो कई बार इसके पीछे मरीज की भलाई से ज्यादा रेफरल कमीशन का हाथ होता है। इसमें एम्बुलेंस वाले से लेकर छोटे क्लीनिक वाले तक शामिल हो सकते हैं। 3. भारी-भरकम और महंगी दवाइयां (Brand over Generic) * महंगे ब्रांड: कई डॉक्टर जानबूझकर सस्ती 'जेनेरिक' दवाओं के बजाय महंगी ब्रांडेड दवाएं लिखते हैं क्योंकि उन पर उन्हें दवा कंपनियों (Medical Representatives) से उपहार या अन्य फायदे मिलते हैं। * मल्टी-विटामिन का ओवरडोज: छोटी सी बीमारी में भी बेवजह के सप्लीमेंट्स और एंटीबायोटिक्स लिख देना ताकि पर्चा भारी लगे। 4. डराने वाली शब्दावली (Scare Tactics) मरीज को बीमारी के बारे में इतना डरा देना कि वह तुरंत सर्जरी या महंगे इलाज के लिए तैयार हो जाए। "अगर आज ऑपरेशन नहीं हुआ तो जान को खतरा है" जैसे वाक्यों का इस्तेमाल कर भावनाओं का शोषण किया जाता है। 5. झोलाछाप और फर्जी डिग्रियां (Quacks) भारत के ग्रामीण इलाकों में कई ऐसे लोग हैं जो बिना किसी मेडिकल डिग्री के खुद को डॉक्टर बताते हैं। ये लोग 'बेरोजगार' या कम पढ़े-लिखे होते हैं जो: * स्टेरॉयड का धड़ल्ले से इस्तेमाल: तुरंत आराम देने के लिए हाई-डोज स्टेरॉयड दे देते हैं, जिससे मरीज को एक बार तो ठीक लगता है, लेकिन बाद में किडनी और लिवर पर बुरा असर पड़ता है। * हर बीमारी का एक ही इलाज: चाहे बुखार हो या बदन दर्द, ये लोग बस ड्रिप (बोतल) चढ़ाकर और इंजेक्शन लगाकर पैसे वसूलते हैं। खुद को शोषण से कैसे बचाएं? * जेनेरिक दवाएं मांगें: डॉक्टर से पूछें कि क्या वह सस्ती और प्रभावी जेनेरिक दवा लिख सकते हैं। * दूसरी राय (Second Opinion): अगर कोई डॉक्टर अचानक से बड़ी सर्जरी की सलाह दे, तो किसी दूसरे प्रतिष्ठित डॉक्टर से सलाह जरूर लें। * प्रिस्क्रिप्शन को समझें: डॉक्टर जो भी लिख रहा है, उससे उसका कारण पूछने का आपको पूरा अधिकार है। * अस्पताल के रेट चार्ट देखें: किसी भी प्रक्रिया से पहले अस्पताल से अनुमानित खर्च (Estimate) लिखित में मांगें। > महत्वपूर्ण बात: भारत के स्वास्थ्य ढांचे में लाखों ऐसे डॉक्टर भी हैं जो दिन-रात मेहनत कर लोगों की जान बचा रहे हैं। व्यवस्था की कमियों और कुछ लालची लोगों की वजह से पूरे पेशे को गलत कहना उचित नहीं होगा, लेकिन सावधानी ही आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा है।

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