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भारत में मधुमेह (Diabetes) की स्थिति अब एक "मूक महामारी" (Silent Epidemic) का रूप ले चुकी है। ICMR-INDIAB (2023-24) की रिपोर्ट और IDF (International Diabetes Federation) 2026 के नवीनतम अनुमानों के अनुसार, भारत में मधुमेह के मरीजों की संख्या 10 करोड़ (101 मिलियन) को पार कर गई है।
यहाँ 2026 के आंकड़ों के अनुसार राज्यों और शहरों की विस्तृत स्थिति दी गई है:
राज्यों में मधुमेह का प्रसार (State-wise Prevalence)
आंकड़े बताते हैं कि दक्षिण भारत और अधिक आय वाले राज्यों में इसका प्रसार सबसे अधिक है, लेकिन अब उत्तर भारत के राज्यों में भी यह तेजी से बढ़ रहा है।
| राज्य | प्रसार (Prevalence %) | स्थिति |
|---|---|---|
| गोवा | ~26.4% | भारत में सबसे अधिक प्रसार वाला राज्य। |
| पुडुचेरी | ~26.3% | शहरीकरण के कारण बहुत उच्च दर। |
| केरल | ~25.5% | खान-पान और जीवनशैली यहाँ मुख्य कारक हैं। |
| चंडीगढ़ | ~20.4% | उत्तर भारत में सबसे अधिक प्रभावित केंद्र शासित प्रदेश। |
| तमिलनाडु | ~19.6% | दक्षिण भारत का प्रमुख हॉटस्पॉट। |
| पंजाब | ~12.7% | उत्तर भारत में तेजी से बढ़ता आंकड़ा। |
| उत्तर प्रदेश/बिहार | ~7% - 9% | राष्ट्रीय औसत से कम, लेकिन मरीजों की कुल संख्या (आबादी के कारण) बहुत अधिक है। |
शहरों में मधुमेह का आंकड़ा (City-wise Trends)
2026 की रिपोर्टों के अनुसार, मेट्रो शहरों में रहने वाला लगभग हर चौथा वयस्क या तो मधुमेह से पीड़ित है या 'प्री-डायबिटिक' है।
* कोलकाता: हालिया रिपोर्ट (नवंबर 2025-26) के अनुसार, कोलकाता की लगभग 28% आबादी मधुमेह से ग्रस्त है। यहाँ बच्चों में टाइप-1 डायबिटीज की दर भी 10% वार्षिक से बढ़ रही है।
* हैदराबाद: इसे भारत की 'डायबिटीज राजधानी' में से एक माना जाता है, जहाँ प्रसार 22-25% के बीच है।
* दिल्ली और मुंबई: इन महानगरों में प्रसार 20% के करीब है। यहाँ 'फास्ट फूड' कल्चर और सुस्त जीवनशैली (Sedentary Lifestyle) मुख्य कारण हैं।
* चेन्नई: यहाँ जागरूकता अधिक होने के बावजूद, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट (सफेद चावल) का अधिक सेवन प्रसार को 20% से ऊपर बनाए हुए है।
2026 के कुछ महत्वपूर्ण और चौंकाने वाले तथ्य
* प्री-डायबिटीज (Prediabetes): भारत में लगभग 13.6 करोड़ (136 मिलियन) लोग प्री-डायबिटिक हैं। इसका मतलब है कि यदि जीवनशैली नहीं बदली गई, तो ये लोग अगले 2-3 वर्षों में पूर्ण मधुमेह रोगी बन जाएंगे।
* युवाओं में बढ़ता खतरा: पहले यह बीमारी 40 के बाद होती थी, लेकिन अब 25-30 वर्ष के युवाओं में भी टाइप-2 डायबिटीज के मामले सामान्य हो गए हैं।
* ग्रामीण बनाम शहरी: हालांकि शहरों में दर (16.4%) अधिक है, लेकिन ग्रामीण भारत (8.9%) में भी यह आंकड़ा पिछले दशक के मुकाबले दोगुना हो गया है।
मुख्य कारण (2026 का परिप्रेक्ष्य)
* कार्बोहाइड्रेट की अधिकता: भारतीय भोजन में 60-70% ऊर्जा कार्बोहाइड्रेट (चावल, गेहूं) से आती है, जबकि प्रोटीन और स्वस्थ वसा की कमी है।
* पेट का मोटापा (Abdominal Obesity): भारतीयों में वजन भले ही सामान्य हो, लेकिन पेट के आसपास की चर्बी 'इंसुलिन रेजिस्टेंस' पैदा करती है।
* डिजिटल जीवनशैली: शारीरिक मेहनत में कमी और स्क्रीन टाइम में बढ़ोतरी।
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