- Get link
- X
- Other Apps
- Get link
- X
- Other Apps
भारतीय रेलवे में वेटिंग टिकट के साथ यात्रा करना अब पहले के मुकाबले कहीं अधिक जोखिम भरा और महंगा हो गया है। सरकार और रेलवे बोर्ड ने ट्रेनों में बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने और कंफर्म टिकट वाले यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 1 मई 2025 से नियमों में बड़े बदलाव किए हैं।
यहाँ इसके मुख्य कारण दिए गए हैं:
1. रिजर्व्ड कोच में प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध (Strict Ban)
नए नियमों के अनुसार, अब वेटिंग टिकट (चाहे वह खिड़की वाला हो या ऑनलाइन) लेकर आप स्लीपर (Sleeper) या AC कोच में यात्रा नहीं कर सकते।
* पहले क्या होता था: काउंटर (खिड़की) से लिए गए वेटिंग टिकट को वैध माना जाता था और यात्री स्लीपर कोच में कहीं भी एडजस्ट होकर यात्रा कर लेते थे।
* अब क्या है: अब वेटिंग टिकट धारकों को केवल जनरल (अनारक्षित) कोच में ही यात्रा करने की अनुमति है। यदि आप स्लीपर या AC कोच में पाए जाते हैं, तो आपको अगले स्टेशन पर उतार दिया जाएगा।
2. भारी जुर्माना (Hefty Penalties)
रेलवे ने अनाधिकृत रूप से रिजर्व्ड कोच में चढ़ने वालों के लिए जुर्माने की राशि और सख्ती बढ़ा दी है:
* Sleeper Class: पकड़े जाने पर ₹250 का जुर्माना प्लस बोर्डिंग स्टेशन से अगले स्टेशन तक का किराया।
* AC Class: पकड़े जाने पर ₹440 का जुर्माना प्लस किराया।
* अतिरिक्त कार्रवाई: TTE को अब अधिकार दिए गए हैं कि वे यात्रियों को तुरंत डिब्बे से बाहर निकालें और जरूरत पड़ने पर RPF की मदद लें।
3. स्टेशन पर प्रवेश की सीमा (Station Access Control)
रेलवे ने देश के 60 प्रमुख स्टेशनों पर भीड़ नियंत्रण के नए तंत्र लागू किए हैं:
* अब प्लेटफॉर्म पर केवल कंफर्म टिकट वाले यात्रियों को ही प्राथमिकता दी जाती है।
* वेटिंग टिकट धारकों के लिए स्टेशनों के बाहर 'डेजिग्नेटेड वेटिंग एरिया' बनाए गए हैं। ट्रेन आने पर ही उन्हें केवल जनरल कोच की ओर जाने की अनुमति दी जाती है।
4. ऑनलाइन टिकट का ऑटो-कैंसिलेशन
अगर आपने IRCTC से ऑनलाइन वेटिंग टिकट बुक किया है और चार्ट बनने के बाद भी वह वेटिंग में ही है, तो वह टिकट स्वतः (Automatically) कैंसिल हो जाता है। ऐसी स्थिति में आपके पास कोई वैध टिकट नहीं होता और ट्रेन में चढ़ना 'बिना टिकट यात्रा' (Ticketless Travel) माना जाता है, जिसमें जेल तक का प्रावधान हो सकता है।
5. वेटिंग लिस्ट की सीमा में कटौती
रेलवे ने अब वेटिंग टिकट जारी करने की संख्या को भी सीमित कर दिया है। अब कुल सीटों की क्षमता का केवल 25% ही वेटिंग टिकट जारी किए जा रहे हैं, ताकि ट्रेनों में और स्टेशनों पर भीड़ को प्रबंधित किया जा सके।
निष्कर्ष:
वेटिंग टिकट पर यात्रा करना अब न केवल आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है, बल्कि आपको बीच रास्ते में ट्रेन से उतरना भी पड़ सकता है, जिससे आपकी पूरी यात्रा खराब हो सकती है।
- Get link
- X
- Other Apps
Comments