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NCRB रिपोर्ट 2022 के किसी विशेष वर्ग (जैसे छात्र, किसान या महिलाएं) से संबंधित डेटा के बारे में "परंपरा बनाम आधुनिकता" ?
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NCRB 2022 की रिपोर्ट समाज के विभिन्न वर्गों की स्थिति का एक गंभीर चित्र प्रस्तुत करती है। इस रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में भारत में कुल 1,70,924 आत्महत्याएं दर्ज की गईं, जो 2021 की तुलना में 3.3% अधिक हैं।
विभिन्न वर्गों से संबंधित मुख्य डेटा यहाँ दिया गया है:
1. छात्र (Students)
छात्रों में आत्महत्या के मामले पिछले कुछ वर्षों से चिंताजनक बने हुए हैं।
* संख्या: 2022 में 13,044 छात्रों ने आत्महत्या की। यह कुल आत्महत्याओं का लगभग 7.6% है।
* मुख्य कारण: 'परीक्षा में विफलता' (Failure in Examination) आत्महत्या का एक बड़ा कारण रहा, जो कुल छात्र आत्महत्याओं के 1.2% से अधिक के लिए जिम्मेदार था। इसके अलावा शैक्षणिक दबाव और भविष्य की अनिश्चितता भी महत्वपूर्ण कारक रहे।
* हॉटस्पॉट: कोचिंग हब जैसे कि कोटा (राजस्थान) में छात्रों के सुसाइड क्लस्टर्स की रिपोर्ट विशेष रूप से चिंता का विषय रही।
2. किसान और कृषि क्षेत्र (Farmers & Agricultural Sector)
कृषि क्षेत्र में संकट कम होने का नाम नहीं ले रहा है।
* कुल संख्या: कृषि क्षेत्र से जुड़े 11,290 लोगों ने 2022 में अपनी जान दी।
* वर्गीकरण: इनमें 5,207 किसान/काश्तकार थे और 6,083 खेतिहर मजदूर (Agricultural Labourers) थे। खेतिहर मजदूरों की संख्या किसानों से अधिक रही।
* राज्य: महाराष्ट्र इस मामले में सबसे ऊपर रहा (4,248 आत्महत्याएं), इसके बाद कर्नाटक (2,392) और आंध्र प्रदेश (917) का स्थान रहा।
* कारण: बेमौसम बारिश, सूखा, फसल की बर्बादी और ऋणग्रस्तता (Indebtedness) इसके प्रमुख कारण माने गए हैं।
3. महिलाएं (Women)
महिलाओं के लिए यह रिपोर्ट सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य दोनों मोर्चों पर चुनौतियों को दर्शाती है।
* आत्महत्या: 2022 में लगभग 48,000 महिलाओं ने आत्महत्या की। इनमें से 52% से अधिक (करीब 25,309) गृहिणियां (Housewives) थीं।
* अपराध: महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुल 4,45,256 मामले दर्ज किए गए, जो 2021 की तुलना में 4% अधिक हैं।
* घरेलू हिंसा: महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में सबसे बड़ा हिस्सा 'पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता' (Cruelty by Husband or Relatives) का था, जो कुल मामलों का 31.4% है।
तुलनात्मक विवरण (टेबल)
| वर्ग | कुल आत्महत्याएं (2022) | मुख्य कारण / विशेषता |
|---|---|---|
| दिहाड़ी मजदूर | 45,194 (26.4%) | आर्थिक अस्थिरता |
| गृहिणियां | 25,309 (14.8%) | पारिवारिक कलह, मानसिक दबाव |
| छात्र | 13,044 (7.6%) | परीक्षा का दबाव, करियर की चिंता |
| किसान | 11,290 (6.6%) | कर्ज, फसल की विफलता |
यह डेटा स्पष्ट करता है कि भारत में सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता है, विशेषकर उन वर्गों के लिए जो आर्थिक रूप से कमजोर या अत्यधिक मानसिक दबाव में हैं।
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