भारत के किन बड़े छोटे शहरों में 2026 के उच्च रक्तचाप मरीजों का आंकड़ा ?

भारत के शहरों में 2026 के ताजा आंकड़ों और स्वास्थ्य रिपोर्टों (जैसे ICMR-INDIAB और हालिया राष्ट्रीय सर्वेक्षण) के अनुसार, उच्च रक्तचाप (Hypertension) का प्रसार गांवों की तुलना में शहरों में काफी अधिक है। 2026 तक शहरी भारत में लगभग 28-30% वयस्क इस बीमारी से प्रभावित हैं। यहाँ कुछ प्रमुख बड़े और छोटे शहरों के रुझान दिए गए हैं: बड़े शहरों में प्रसार (Metros & Major Cities) मेट्रो शहरों में जीवनशैली, प्रदूषण और काम के तनाव के कारण आंकड़े चौंकाने वाले हैं: * हैदराबाद और चेन्नई: अपोलो हेल्थ रिपोर्ट 2025-26 के अनुसार, इन शहरों में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का प्रसार देश में सबसे अधिक है। हैदराबाद में लगभग 33% और चेन्नई में 30% वयस्कों में उच्च रक्तचाप पाया गया है। * दिल्ली (NCR): दिल्ली में प्रसार लगभग 28-30% के बीच बना हुआ है। यहाँ मध्यम आय वर्ग (MIG) और झुग्गी बस्तियों (Urban Slums) दोनों में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। * मुंबई और नागपुर: महाराष्ट्र के इन प्रमुख शहरों में प्रसार 25% से 28% के करीब है। * बेंगलुरु: यहाँ के कामकाजी युवाओं (आईटी सेक्टर) में उच्च रक्तचाप और 'प्री-हाइपरटेंशन' (130-139/85-89 mmHg) की दर तेजी से बढ़ी है। छोटे और मध्यम शहरों में स्थिति (Tier-2 & Tier-3 Cities) अध्ययन बताते हैं कि अब छोटे शहर भी इस मामले में बड़े शहरों के बराबर आ रहे हैं: * पंजाब के शहर (लुधियाना, अमृतसर): जनवरी 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, लुधियाना में उच्च रक्तचाप का प्रसार 15.8% (कुल आबादी में) दर्ज किया गया है, जो उत्तर भारत के अन्य शहरों की तुलना में अधिक है। * सिक्किम के शहर (गंगटोक): सिक्किम के शहरी क्षेत्रों में पुरुषों में प्रसार 41% तक देखा गया है, जो देश के किसी भी शहर में सबसे अधिक में से एक है। * केरल के शहर (कोच्चि, तिरुवनंतपुरम): यहाँ साक्षरता अधिक होने के बावजूद खान-पान की आदतों के कारण प्रसार 30% से ऊपर है। 2026 के आंकड़ों का सारांश (अनुमानित) | शहर / क्षेत्र | अनुमानित प्रसार (%) | विशेष टिप्पणी | |---|---|---| | हैदराबाद | 33% | खान-पान और तनाव मुख्य कारण। | | अमृतसर | 31.2% | जीवनशैली में बदलाव का बड़ा असर। | | चेन्नई | 30% | दक्षिण भारत में उच्च प्रसार। | | दिल्ली | 29% | प्रदूषित वातावरण और सुस्त जीवनशैली। | | लखनऊ | 26% | उत्तर भारत के औसत से अधिक। | चिंताजनक रुझान: युवा और प्री-हाइपरटेंशन * 35 की उम्र से खतरा: हालिया रिसर्च (नवंबर 2025) सुझाव देती है कि अब 35 वर्ष की आयु से ही ब्लड प्रेशर की जांच अनिवार्य होनी चाहिए, क्योंकि 35-39 आयु वर्ग में मरीजों की संख्या में भारी उछाल देखा गया है। * साइलेंट किलर: शहरों में 70-80% लोगों का ब्लड प्रेशर अनियंत्रित रहता है क्योंकि उन्हें अपनी बीमारी का पता ही नहीं चलता। > सरकारी पहल: भारत सरकार ने "75/25" लक्ष्य रखा है, जिसके तहत 2025-26 के अंत तक 7.5 करोड़ मरीजों को मानक उपचार के दायरे में लाने की कोशिश की जा रही है।

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