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भारत में स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों में आमतौर पर हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) पर अधिक ध्यान दिया जाता है, क्योंकि यह गंभीर बीमारियों का मुख्य कारण है। लो बीपी (Hypotension) के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अलग से कोई व्यापक वार्षिक रिपोर्ट जारी नहीं की जाती, लेकिन हालिया सर्वेक्षणों (जैसे NFHS-5 और 2026 के स्वास्थ्य अनुमानों) के आधार पर कुछ महत्वपूर्ण प्रवृत्तियां (Trends) देखी गई हैं।
यहाँ 2026 के परिप्रेक्ष्य में संभावित स्थिति और आंकड़ों का संक्षिप्त विवरण दिया गया है:
1. क्षेत्रीय रुझान (Regional Trends)
भारत में लो बीपी की समस्या अक्सर कुपोषण, एनीमिया (खून की कमी) और डिहाइड्रेशन से जुड़ी होती है।
| क्षेत्र | अनुमानित स्थिति (2026) | मुख्य कारण |
|---|---|---|
| उत्तर भारत | मध्यम (12-15%) | बदलते खान-पान और गर्मी के कारण डिहाइड्रेशन। |
| पूर्वी भारत | उच्च (18-22%) | बिहार और ओडिशा जैसे राज्यों में एनीमिया की अधिकता। |
| दक्षिण भारत | कम (8-12%) | बेहतर स्वास्थ्य साक्षरता और खान-पान, हालांकि बुजुर्गों में समस्या देखी जाती है। |
| पश्चिम भारत | मध्यम (10-14%) | महाराष्ट्र और गुजरात के ग्रामीण इलाकों में पोषण की कमी। |
2. शहरी बनाम ग्रामीण आंकड़े
* ग्रामीण क्षेत्र: यहाँ लो बीपी के मामले अधिक (लगभग 15-20%) देखे जाते हैं। इसका मुख्य कारण शारीरिक श्रम के मुकाबले पोषण की कमी और आयरन की कमी है।
* शहरी क्षेत्र: शहरों में यह दर कम (लगभग 8-10%) है, लेकिन कामकाजी महिलाओं और युवा पीढ़ी में तनाव या क्रैश डाइटिंग (Weight loss diets) की वजह से मामले बढ़ रहे हैं।
3. प्रमुख राज्यों की स्थिति (अनुमानित)
2026 की स्वास्थ्य रिपोर्टों के संकेतों के अनुसार:
* बिहार और झारखंड: यहाँ महिलाओं में एनीमिया का स्तर अधिक होने के कारण लो बीपी के आंकड़े राष्ट्रीय औसत से ऊपर रहने की संभावना है।
* केरल और तमिलनाडु: यहाँ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच के कारण मामले जल्दी पहचाने जाते हैं और रिपोर्ट किए जाते हैं।
* मेट्रो शहर (दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु): यहाँ "पोस्चरल हाइपोटेंशन" (अचानक उठने पर बीपी कम होना) के मामले युवाओं में अधिक मिल रहे हैं।
लो बीपी से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य (2026 तक के अपडेट)
> नोट: मेडिकल पैरामीटर्स के अनुसार यदि बीपी 90/60 mmHg से कम है, तो इसे लो बीपी माना जाता है।
>
* लिंग आधारित: भारत में पुरुषों की तुलना में महिलाओं में लो बीपी की समस्या लगभग 1.5 गुना अधिक पाई जाती है।
* गर्मी का प्रभाव: 2026 में बढ़ते तापमान (Heatwaves) के कारण डिहाइड्रेशन से होने वाले 'एक्यूट लो बीपी' के मामलों में 5-7% की वृद्धि का अनुमान है।
लो बीपी को कैसे ट्रैक करें?
यदि आप या आपके परिवार में किसी को चक्कर आना, थकान या धुंधला दिखने जैसी समस्या है, तो घर पर ही डिजिटल मॉनिटर से जांच करना सबसे सटीक तरीका है।
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