- Get link
- X
- Other Apps
- Get link
- X
- Other Apps
प्राइवेट लिमिटेड कंपनी और प्रोपराइटरशिप (Proprietorship) के बीच आयकर (Income Tax) के नियम जमीन-आसमान की तरह अलग हैं।
यहाँ विस्तार से समझिए कि कब रिटर्न भरना अनिवार्य है और कब नहीं:
1. प्राइवेट लिमिटेड कंपनी (Private Limited Company)
प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को कानून की नजर में एक "अलग कानूनी इकाई" (Separate Legal Entity) माना जाता है।
* कब भरनी पड़ती है? हमेशा। चाहे कंपनी में ₹1 का भी बिजनेस न हुआ हो, या कंपनी घाटे (Loss) में हो, या बैंक अकाउंट में जीरो बैलेंस हो—कंपनी के लिए ITR-6 भरना हर साल अनिवार्य है।
* कब नहीं भरनी पड़ती? ऐसा कोई विकल्प नहीं है। जब तक कंपनी MCA (Ministry of Corporate Affairs) के रिकॉर्ड में "Active" है और बंद (Strike off) नहीं हुई है, तब तक हर साल रिटर्न भरना ही होगा।
* अंतिम तिथि (Deadline): आमतौर पर 31 अक्टूबर (क्योंकि कंपनी का ऑडिट अनिवार्य होता है)।
2. प्रोपराइटरशिप (Proprietorship / Individual)
प्रोपराइटरशिप में व्यक्ति और उसका बिजनेस एक ही माने जाते हैं। इसलिए इसके नियम व्यक्तिगत (Individual) टैक्स स्लैब पर आधारित होते हैं।
* कब भरनी पड़ती है (अनिवार्य):
* यदि आपकी कुल वार्षिक आय (Total Income) बेसिक एग्जेंप्शन लिमिट (जैसे ₹2.5 लाख या ₹3 लाख, स्कीम के अनुसार) से अधिक है।
* यदि आपका टर्नओवर (Sales) एक निश्चित सीमा से अधिक है (Audit के केस में)।
* यदि आपने ₹1 लाख से अधिक का बिजली बिल भरा है या ₹2 लाख से अधिक विदेश यात्रा पर खर्च किए हैं।
* यदि आप बिजनेस के घाटे (Loss) को अगले साल के लिए कैरी फॉरवर्ड करना चाहते हैं (ताकि भविष्य के मुनाफे से उसे एडजस्ट कर सकें)।
* कब नहीं भरनी पड़ती (वैकल्पिक):
* यदि आपकी कुल आय टैक्स छूट की सीमा (Basic Exemption Limit) से कम है। उदाहरण के लिए, अगर पूरे साल की कमाई ₹2 लाख ही है, तो कानूनन रिटर्न भरना अनिवार्य नहीं है।
* अंतिम तिथि (Deadline): * बिना ऑडिट वाले केस में: 31 जुलाई।
* अगर बिजनेस का टर्नओवर ज्यादा है और ऑडिट जरूरी है: 31 अक्टूबर।
मुख्य अंतर: एक नज़र में
| विवरण | प्राइवेट लिमिटेड कंपनी | प्रोपराइटरशिप (Individual) |
|---|---|---|
| निल (Nil) रिटर्न | अनिवार्य (Mandatory) | वैकल्पिक (Optional) |
| कानूनी स्थिति | अलग इकाई (Separate Entity) | मालिक के साथ जुड़ी हुई |
| इनकम टैक्स फॉर्म | ITR-6 | ITR-3 या ITR-4 (Presumptive) |
| ऑडिट | हमेशा अनिवार्य | केवल टर्नओवर सीमा पार होने पर |
प्रोपराइटर के लिए एक खास सलाह:
भले ही आपकी आय सीमा से कम हो, फिर भी Nil ITR भरने के बड़े फायदे हैं:
* बैंक से लोन (Loan) लेने में आसानी होती है (3 साल की ITR मांगी जाती है)।
* वीजा (Visa) आवेदन के लिए जरूरी है।
* यह आपकी आय का सबसे ठोस सरकारी प्रमाण है।
- Get link
- X
- Other Apps
Comments