भारत में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहला इच्छा मृत्यु का केस?

भारत में 'इच्छा मृत्यु' (Euthanasia) से जुड़ा पहला और सबसे महत्वपूर्ण मामला अरुणा रामचंद्र शानबाग बनाम भारत संघ (2011) का है। हालांकि, हाल ही में मार्च 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने एक और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जो भारत में 'पैसिव यूथेनेशिया' (Passive Euthanasia) के कार्यान्वयन का पहला वास्तविक मामला बन गया है। यहाँ दोनों मामलों का विवरण दिया गया है: 1. अरुणा शानबाग केस (2011): आधारशिला यह वह मामला था जिसने भारत में इच्छा मृत्यु की कानूनी बहस को जन्म दिया। * पृष्ठभूमि: अरुणा शानबाग मुंबई के केईएम (KEM) अस्पताल में एक नर्स थीं। 1973 में एक हमले के दौरान उनके मस्तिष्क को गंभीर क्षति पहुँची, जिसके बाद वह 42 वर्षों तक 'परमानेंट वेजिटेटिव स्टेट' (PVS) में रहीं। * सुप्रीम कोर्ट का फैसला (7 मार्च, 2011): कोर्ट ने अरुणा के लिए इच्छा मृत्यु की याचिका को तो खारिज कर दिया (क्योंकि अस्पताल की नर्सें उनकी देखभाल करना चाहती थीं), लेकिन पहली बार भारत में 'पैसिव यूथेनेशिया' (जीवन रक्षक प्रणाली हटाना) को कानूनी मान्यता दी। * महत्व: इसी फैसले ने भविष्य के लिए दिशा-निर्देश तय किए कि किन परिस्थितियों में एक मरीज को गरिमा के साथ मरने का अधिकार दिया जा सकता है। 2. हरीश राणा केस (मार्च 2026): पहला व्यवहारिक प्रयोग कल, यानी 11 मार्च, 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने भारत के इतिहास में पहली बार किसी मरीज की जीवन रक्षक प्रणाली को हटाने (Passive Euthanasia) का सीधा आदेश दिया है। * मामला: 32 वर्षीय हरीश राणा पिछले 13 सालों से 'वेजिटेटिव स्टेट' में थे। वे 2013 में एक ऊँची इमारत से गिर गए थे, जिससे उनका शरीर पूरी तरह लकवाग्रस्त हो गया था। * सुप्रीम कोर्ट का आदेश: जस्टिस पारदीवाला और जस्टिस विश्वनाथन की पीठ ने एम्स (AIIMS) को निर्देश दिया कि हरीश की 'क्लीनिकली असिस्टेड न्यूट्रिशन' (CAN) यानी ट्यूब के जरिए दिया जाने वाला भोजन और दवाएं बंद कर दी जाएं ताकि वे शांति से अंतिम सांस ले सकें। * ऐतिहासिक क्यों है? यह भारत का पहला ऐसा केस है जहाँ कोर्ट ने 2018 के 'कॉमन कॉज' फैसले के नियमों का उपयोग करते हुए वास्तव में लाइफ सपोर्ट हटाने की अनुमति दी है। मुख्य अंतर समझें: | प्रकार | स्थिति | भारत में कानूनी स्थिति | |---|---|---| | एक्टिव यूथेनेशिया | जहरीला इंजेक्शन देकर जान लेना। | अवैध (इसे हत्या माना जाता है)। | | पैसिव यूथेनेशिया | इलाज या जीवन रक्षक प्रणाली (जैसे वेंटिलेटर या फीडिंग ट्यूब) को हटा देना। | कानूनी (सुप्रीम कोर्ट के सख्त नियमों के अधीन)। |

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