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सेक्शन-8 कंपनी, सोसाइटी और ट्रस्ट को बंद करना प्राइवेट कंपनी की तुलना में अधिक जटिल होता है क्योंकि इनमें "जनहित" और "चैरिटी" का तत्व जुड़ा होता है।
यहाँ चारों का तुलनात्मक विवरण, प्रक्रिया और अनुमानित खर्चा दिया गया है:
1. प्राइवेट लिमिटेड कंपनी (Private Limited Company)
इसे बंद करना सबसे सीधा है यदि कोई विवाद या कर्ज न हो।
* प्रक्रिया (Fast Track Exit - STK-2):
* बोर्ड मीटिंग और शेयरधारकों की मंजूरी।
* सभी देनदारियों (Liabilities) का भुगतान।
* C.A. से एसेट और लायबिलिटी का स्टेटमेंट बनवाना।
* ROC (Registrar of Companies) को Form STK-2 जमा करना।
* समय: 6 से 10 महीने।
* अनुमानित सरकारी फीस और प्रोफेशनल खर्चा: ₹15,000 से ₹30,000 (सरकारी फीस ₹10,000 है)।
2. सेक्शन-8 कंपनी (Section-8 Company)
इसे बंद करना सबसे मुश्किल है क्योंकि आपने टैक्स छूट का लाभ लिया होता है।
* प्रक्रिया:
* सेक्शन-8 का स्टेटस बदलकर इसे सामान्य कंपनी में बदलना पड़ता है (Conversion)।
* क्षेत्रीय निदेशक (Regional Director) से अनुमति लेनी पड़ती है।
* सबसे बड़ी शर्त: कंपनी की बची हुई संपत्ति (Assets) किसी दूसरी समान उद्देश्य वाली चैरिटेबल संस्था को दान करनी होगी। आप पैसा आपस में नहीं बांट सकते।
* अंत में STK-2 फॉर्म भरा जाता है।
* समय: 1 से 2 साल।
* अनुमानित खर्चा: ₹50,000 से ₹1,00,000+ (कानूनी जटिलता के कारण)।
3. सोसाइटी (Society)
सोसाइटी राज्यों के 'सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट' के तहत आती है, इसलिए नियम राज्य अनुसार बदल सकते हैं।
* प्रक्रिया (Dissolution):
* गवर्निंग बॉडी की मीटिंग और 3/4 सदस्यों की सहमति।
* रजिस्ट्रार ऑफ सोसाइटीज को सूचना और विज्ञापन (News Paper Ads)।
* संपत्ति का निपटारा: कर्ज चुकाने के बाद बची संपत्ति किसी दूसरी सोसाइटी को देनी होगी।
* रजिस्ट्रार द्वारा नाम काटना।
* समय: 6 महीने से 1 साल।
* अनुमानित खर्चा: ₹10,000 से ₹25,000 (प्रोफेशनल फीस पर निर्भर)।
4. ट्रस्ट (Trust)
ट्रस्ट को बंद करना 'ट्रस्ट डीड' (Trust Deed) की शर्तों पर निर्भर करता है।
* प्रक्रिया:
* यदि डीड में बंद करने का प्रावधान है, तो ट्रस्टी प्रस्ताव पारित करते हैं।
* यदि प्रावधान नहीं है, तो सिविल कोर्ट की अनुमति लेनी पड़ सकती है।
* संपत्ति का हस्तांतरण समान उद्देश्यों वाले दूसरे ट्रस्ट को करना अनिवार्य है।
* चैरिटी कमिश्नर (कुछ राज्यों में) को सूचित करना।
* समय: कोर्ट इन्वॉल्व होने पर 1-3 साल।
* अनुमानित खर्चा: ₹20,000 से ₹50,000 (कोर्ट केस होने पर बढ़ सकता है)।
तुलनात्मक चार्ट (Quick Summary)
| संस्था का प्रकार | बंद करने की कठिनाई | संपत्ति का क्या होगा? | अनुमानित कुल बजट |
|---|---|---|---|
| प्राइवेट कंपनी | आसान | शेयरधारकों में बँट सकती है | ₹15k - ₹30k |
| सेक्शन-8 कंपनी | बहुत कठिन | दूसरी चैरिटी को देना होगा | ₹50k - ₹1 लाख+ |
| सोसाइटी | मध्यम | दूसरी सोसाइटी को देना होगा | ₹10k - ₹25k |
| ट्रस्ट | डीड/कोर्ट पर निर्भर | दूसरे ट्रस्ट को देना होगा | ₹20k - ₹50k |
विशेष चेतावनी:
संस्था को बंद करने से पहले पिछले सभी ITR (Income Tax Return) और Annual Filings पूरे होने चाहिए। यदि कंप्लायंस अधूरे हैं, तो सरकार भारी पेनल्टी वसूलने के बाद ही क्लोजर की अनुमति देगी।
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