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हाईटेक नर्सरी में पौधों को मिट्टी से पोषण नहीं मिलता, इसलिए उन्हें 'फर्टिगेशन' (Fertigation) यानी पानी के साथ घुली हुई खाद देना अनिवार्य है। चूंकि छोटे पौधों (Seedlings) की जड़ें बहुत नाजुक होती हैं, इसलिए पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ते ही पौधे जल सकते हैं।
2026 की आधुनिक तकनीकों के अनुसार 'न्यूट्रीएंट सॉल्यूशन' बनाने का सटीक तरीका यहाँ दिया गया है:
1. जरूरी सामग्री और उपकरण
एक पेशेवर सॉल्यूशन बनाने के लिए आपके पास ये तीन चीजें होनी चाहिए:
* पानी का स्रोत: जिसका pH 5.5 से 6.5 के बीच हो।
* EC मीटर: पानी में लवण (Salts) की मात्रा नापने के लिए।
* वाटर सॉल्युबल फर्टिलाइजर (WSF): जो पानी में 100% घुलनशील हों।
2. सॉल्यूशन बनाने का 'गोल्डन फॉर्मूला' (प्रति 100 लीटर पानी)
पौधों की अलग-अलग अवस्थाओं (Stages) के लिए अलग खुराक चाहिए:
| स्टेज | मिश्रण (NPK + अन्य) | मात्रा (ग्राम) | उद्देश्य |
|---|---|---|---|
| अंकुरण के बाद (Starter) | NPK 19:19:19 | 50 - 80 ग्राम | जड़ों और शुरुआती पत्तियों का विकास। |
| बढ़त के दौरान (Vegetative) | NPK 12:61:00 (MAP) | 100 ग्राम | जड़ों को मजबूत करना (फास्फोरस रिच)। |
| तैयारी से पहले (Hardening) | NPK 13:0:45 + Micronutrients | 100 ग्राम | तने को सख्त बनाना ताकि खेत में पौधा न मरे। |
3. बनाने की विधि (स्टेप-बाय-स्टेप)
* स्टॉक सॉल्यूशन तैयार करें: एक छोटे बर्तन में खाद को अलग से घोलें (सीधे बड़ी टंकी में न डालें)।
* छानना: घोल को एक महीन कपड़े या छलनी से छान लें ताकि स्प्रेयर की नोजल जाम न हो।
* मिलाना: इस गाढ़े घोल को 100 लीटर पानी वाली मुख्य टंकी में डालें और अच्छी तरह चलाएं।
* सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrients): प्रति 100 लीटर में 10-15 ग्राम 'चिलेटेड मिक्स माइक्रोन्यूट्रिएंट' (जैसे- EDTA Combi) जरूर मिलाएं। इसमें आयरन, जिंक और बोरॉन होता है जो पत्तियों को पीला होने से बचाता है।
4. 2026 की स्मार्ट टिप्स: 'EC' और 'pH' का ध्यान
* EC (Electrical Conductivity): छोटे पौधों के लिए EC का स्तर 0.8 से 1.2 के बीच होना चाहिए। अगर EC 2.0 से ऊपर गया, तो पौधे 'साल्ट स्ट्रेस' से मर जाएंगे।
* pH कंट्रोल: यदि पानी खारा (Alkaline) है, तो उसमें थोड़ा 'फास्फोरिक एसिड' मिलाकर pH को 6.0 के पास लाएं। इससे खाद का असर 40% बढ़ जाता है।
5. देने का सही समय और तरीका
* समय: हमेशा सुबह 8 से 10 बजे के बीच फर्टिगेशन दें। शाम को देने से नमी के कारण फफूंद (Fungus) लग सकती है।
* तरीका: 'रोज कैन' (झारी) या ऑटोमेटेड 'मिस्टिंग सिस्टम' का उपयोग करें। पानी इतना दें कि वह ट्रे के नीचे के छेदों से हल्का सा टपकने लगे।
* लीचिंग (Leaching): हफ्ते में एक बार केवल सादे पानी से सिंचाई करें ताकि कोकोपीट में जमा फालतू नमक धुल जाए।
> विशेष सावधानी: कभी भी कैल्शियम नाइट्रेट और सल्फेट वाली खाद (जैसे मैग्नीशियम सल्फेट) को एक साथ एक ही डिब्बे में न घोलें, वरना वे पत्थर जैसा गाद (Precipitation) बना देंगे।
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