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प्री-डायबिटीज एक तरह का "वेक-अप कॉल" है। इसका मतलब है कि आपके शरीर में ब्लड शुगर का स्तर सामान्य से अधिक है, लेकिन अभी यह टाइप-2 डायबिटीज की श्रेणी में नहीं आया है।
अच्छी खबर यह है कि सही जीवनशैली अपनाकर इसे रिवर्स (Reversal) किया जा सकता है। यहाँ कुछ प्रभावी कदम दिए गए हैं:
1. आहार में बदलाव (Dietary Changes)
डायबिटीज को मात देने के लिए आपकी रसोई सबसे बड़ा हथियार है।
* कॉम्प्लेक्स कार्ब्स चुनें: सफेद चावल, मैदा और चीनी की जगह ओट्स, ब्राउन राइस, रागी और बाजरा जैसे साबुत अनाज लें।
* फाइबर बढ़ाएं: हरी पत्तेदार सब्जियां, बीन्स और दालों का अधिक सेवन करें। फाइबर शुगर के अवशोषण को धीमा कर देता है।
* मीठे से दूरी: कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेज्ड जूस और मिठाई से पूरी तरह बचें।
* प्रोटीन शामिल करें: पनीर, अंडा, सोया या दालें हर मील में रखें ताकि पेट भरा रहे।
2. शारीरिक सक्रियता (Physical Activity)
शरीर जब मूव करता है, तो वह इंसुलिन का बेहतर उपयोग कर पाता है।
* कार्डियो: रोजाना कम से कम 30 मिनट की तेज सैर (Brisk Walking), साइकिलिंग या स्विमिंग करें।
* स्ट्रेंथ ट्रेनिंग: हफ्ते में 2 दिन वजन उठाना या बॉडीवेट एक्सरसाइज (जैसे स्क्वैट्स) मांसपेशियों को ग्लूकोज सोखने में मदद करती हैं।
3. वजन प्रबंधन (Weight Management)
अध्ययनों के अनुसार, यदि आप अपने कुल वजन का मात्र 5% से 7% भी कम कर लेते हैं, तो टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा 50% से ज्यादा कम हो जाता है।
4. जीवनशैली में सुधार
* पर्याप्त नींद: रोजाना 7-8 घंटे की नींद लें। नींद की कमी शरीर में कोर्टिसोल बढ़ाती है, जो शुगर लेवल बिगाड़ सकता है।
* तनाव कम करें: तनाव शुगर लेवल को सीधे प्रभावित करता है। योग या मेडिटेशन का सहारा लें।
* धूम्रपान छोड़ें: प्री-डायबिटीज और स्मोकिंग का मेल हृदय रोगों के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है।
5. नियमित जांच (Regular Monitoring)
अपने HbA1c और Fasting Sugar की हर 3 से 6 महीने में जांच करवाएं ताकि आपको अपनी प्रगति का पता चलता रहे।
> जरूरी नोट: यदि आपकी स्थिति गंभीर है, तो डॉक्टर आपको 'मेटफॉर्मिन' जैसी दवाएं भी दे सकते हैं। जीवनशैली में किसी भी बड़े बदलाव से पहले एक बार अपने डॉक्टर या डायटिशियन से सलाह जरूर लें।
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