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आंकड़ों और हालिया बजट चर्चाओं के अनुसार, उत्तराखंड पर कर्ज का बोझ ₹80,000 करोड़ के आंकड़े को पार कर गया है।
यहाँ इस स्थिति का संक्षिप्त विश्लेषण दिया गया है:
कर्ज की वर्तमान स्थिति
* कुल कर्ज: वित्तीय वर्ष 2023-24 के अंत तक ही उत्तराखंड पर कर्ज लगभग ₹77,000 करोड़ से ₹80,000 करोड़ के बीच पहुँच गया था। 2026 की शुरुआत तक विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार यह आंकड़ा ₹80,000 करोड़ के ऊपर बना हुआ है।
* बजट 2026-27: राज्य सरकार ने हाल ही में (फरवरी-मार्च 2026) अपना अब तक का सबसे बड़ा बजट पेश किया है, जिसका आकार लगभग ₹1.11 लाख करोड़ है।
* राजस्व बनाम खर्च: राज्य की अपनी आय के स्रोत सीमित हैं, जिसके कारण विकास कार्यों और पुरानी देनदारियों को चुकाने के लिए सरकार को बार-बार कर्ज लेना पड़ता है।
मुख्य कारण
* पुराने कर्ज का ब्याज: बजट का एक बड़ा हिस्सा पुराने लिए गए ऋणों के ब्याज (Interest Payments) को चुकाने में चला जाता है।
* बुनियादी ढांचा: चारधाम ऑल-वेदर रोड, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में राज्य की हिस्सेदारी और रखरखाव का खर्च।
* वेतन और पेंशन: राज्य के राजस्व का लगभग 45-50% हिस्सा सरकारी कर्मचारियों के वेतन और पेंशन भुगतान में खर्च होता है।
क्या यह चिंताजनक है?
अर्थशास्त्रियों के अनुसार, जब तक राज्य की जीडीपी (GSDP) बढ़ रही है, तब तक कर्ज को प्रबंधनीय माना जाता है। उत्तराखंड की जीडीपी भी अब ₹4 लाख करोड़ के पार जाने का अनुमान है, जो एक सकारात्मक संकेत है। हालांकि, कैग (CAG) की रिपोर्टों में अक्सर बढ़ते कर्ज और उसे चुकाने की क्षमता पर सवाल उठाए जाते रहे हैं।
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