भारत के विशेष राज्य (जैसे उत्तराखंड हिमाचल, उत्तर पूर्व राज्य) वहां की लंबित जांच पर्ल ग्रुप आदि और चिटफंड के बारे में?

उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और उत्तर-पूर्व (North East) के राज्यों में पर्ल ग्रुप (PACL) और अन्य चिटफंड घोटालों को लेकर स्थिति काफी गंभीर रही है। इन पहाड़ी और सीमावर्ती राज्यों में भोले-भले निवेशकों को "डबल रिटर्न" का लालच देकर हजारों करोड़ रुपये ठगे गए। 2026 की वर्तमान स्थिति के अनुसार, इन मामलों में निम्नलिखित मुख्य अपडेट्स हैं: 1. पर्ल ग्रुप (PACL/Nirmal Singh Bhangoo) का मामला पर्ल ग्रुप ने देशभर से लगभग 60,000 करोड़ रुपये जुटाए थे। उत्तराखंड और हिमाचल जैसे राज्यों में भी इसके हजारों निवेशक हैं। * लोढ़ा कमेटी (Justice Lodha Committee): सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित यह कमेटी संपत्तियों को बेचकर रिफंड कर रही है। वर्तमान में 20,000 रुपये तक के क्लेम वाले निवेशकों के रिफंड की प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी है। कुछ मामलों में 1 लाख तक की सीमा पर भी काम चल रहा है। * ताजा कार्रवाई (2026): प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हाल ही में लुधियाना और जयपुर में पर्ल ग्रुप की 2,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त संपत्तियां कुर्क की हैं। इन संपत्तियों की बिक्री से प्राप्त पैसा भी लोढ़ा कमेटी के माध्यम से रिफंड पोर्टल पर डाला जाएगा। * पहाड़ी राज्यों में नीलामी: सेबी (SEBI) ने उत्तराखंड के देहरादून, टिहरी गढ़वाल और उधम सिंह नगर में पर्ल ग्रुप की जमीनों की नीलामी के लिए नोटिस जारी किए हैं ताकि स्थानीय निवेशकों की भरपाई की जा सके। 2. उत्तराखंड में बड़ा चिटफंड घोटाला: LUCC (Loni Urban) उत्तराखंड में हाल के वर्षों का सबसे बड़ा घोटाला लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी (LUCC) का है। * सीबीआई (CBI) जांच: सितंबर 2025 में उत्तराखंड हाई कोर्ट ने इस 800 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच CBI को सौंप दी है। * प्रभाव: इस कंपनी ने देहरादून, ऋषिकेश और पौड़ी जैसे इलाकों में ऑफिस खोले थे। मुख्य आरोपी के दुबई भागने की खबरें हैं, जिस पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिकंजा कसा जा रहा है। 3. उत्तर-पूर्व (North East) और अन्य चिटफंड मामले उत्तर-पूर्व के राज्यों (जैसे असम, त्रिपुरा) में 'शारदा' और 'रोज वैली' के बाद भी कई स्थानीय छोटी कंपनियां सक्रिय रहीं। * BUDS Act का सख्ती से पालन: केंद्र सरकार ने 'अनियमित जमा योजना पाबंदी कानून' (Banning of Unregulated Deposit Schemes Act - BUDS Act) को इन राज्यों में कड़ाई से लागू किया है। इसके तहत राज्य सरकारों को विशेष अदालतें बनाने और संपत्तियां कुर्क करने के असीमित अधिकार दिए गए हैं। * हिमाचल प्रदेश: यहां भी कई "क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटियों" के खिलाफ जांच लंबित है। राज्य पुलिस की 'आर्थिक अपराध शाखा' (EOW) इन मामलों की निगरानी कर रही है। निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी: यदि आपका पैसा भी किसी ऐसी कंपनी में फंसा है, तो आप निम्नलिखित कदम उठा सकते हैं: * PACL/पर्ल ग्रुप के लिए: अपना स्टेटस चेक करने के लिए आधिकारिक पोर्टल sebipaclrefund.co.in पर जाएं। वहां अपना सर्टिफिकेट नंबर डालकर देखें कि कोई कमी (Deficiency) तो नहीं बताई गई है। * अन्य चिटफंड के लिए: आरबीआई (RBI) के 'सचेत' (Sachet) पोर्टल (sachet.rbi.org.in) पर अपनी शिकायत दर्ज करें। यह सीधे संबंधित नियामक (Regulator) तक पहुँचती है। * स्थानीय स्तर पर: उत्तराखंड या हिमाचल के निवेशक अपने जिले के जिलाधिकारी (DM) कार्यालय में 'बड्स एक्ट' (BUDS Act) के तहत शिकायत कर सकते हैं, क्योंकि वहां DM को 'सक्षम प्राधिकारी' (Competent Authority) बनाया गया है।

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