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उत्तराखंड चकराता और विकास नगर क्षेत्र की मिट्टी और जलवायु के हिसाब से अंजीर की किसी विशेष किस्म या इसे लगाने की विधि के बारे में?
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चकराता और विकासनगर का क्षेत्र भौगोलिक रूप से बहुत विविध है। जहाँ विकासनगर एक मैदानी और कम ऊंचाई वाला (Sub-tropical) क्षेत्र है, वहीं चकराता एक उच्च पहाड़ी (Temperate) क्षेत्र है। इन दोनों जगहों के लिए रणनीति अलग-अलग होगी।
1. विकासनगर क्षेत्र (मैदानी और तराई इलाका)
यहाँ की जलवायु गर्म और आर्द्र है, जो अंजीर के लिए बहुत अनुकूल है।
* उपयुक्त किस्में: यहाँ पुणे फिग (Pune Fig) और दिनकर सबसे सफल हैं। ये किस्में अधिक गर्मी झेल सकती हैं और फल मीठे होते हैं।
* मिट्टी: यहाँ की दोमट मिट्टी (Loamy Soil) अंजीर के लिए सर्वोत्तम है। बस ध्यान रहे कि खेत में जलभराव (Waterlogging) न हो।
2. चकराता क्षेत्र (पहाड़ी इलाका)
चकराता की ऊंचाई और ठंडी जलवायु के लिए हमें ऐसी किस्मों की जरूरत है जो ठंड को सहन कर सकें।
* उपयुक्त किस्में: यहाँ ब्राउन तुर्की (Brown Turkey) और एड्रिएटिक (Adriatic) किस्में अच्छी चलती हैं। इसके अलावा, यहाँ के स्थानीय जंगली अंजीर (तिमिल) पर कलम (Grafting) लगाना सबसे सफल प्रयोग हो सकता है।
* मिट्टी: पहाड़ी ढलानों पर मिट्टी में जल निकासी अच्छी होती है, जो अंजीर की जड़ों के लिए वरदान है।
3. लगाने की वैज्ञानिक विधि (Step-by-Step)
अंजीर लगाने का सबसे सही समय जनवरी-फरवरी (सुप्त अवस्था) या जुलाई-अगस्त (मानसून) होता है।
क. गड्ढों की तैयारी
* दूरी: कतार से कतार और पौधे से पौधे की दूरी 5 x 5 मीटर (लगभग 15-16 फीट) रखें।
* गड्ढे का आकार: 2 \times 2 \times 2 फीट का गड्ढा खोदें।
* भराव: गड्ढे को ऊपरी मिट्टी, 10-15 किलो गोबर की खाद (FYM), और 500 ग्राम सिंगल सुपर फास्फेट के मिश्रण से भरें।
ख. रोपण और सिंचाई
* पौधा लगाने के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें।
* विकासनगर जैसे क्षेत्रों में ड्रिप सिंचाई सबसे कारगर है, जबकि चकराता में मल्चिंग (Mulching) का प्रयोग करें ताकि नमी बनी रहे और खरपतवार न उगे।
4. चकराता-विकासनगर के लिए विशेष टिप्स
* छंटाई (Pruning): अंजीर में फल नई शाखाओं पर आते हैं। इसलिए हर साल दिसंबर-जनवरी में पुरानी टहनियों की छंटाई जरूर करें।
* बंदरों और पक्षियों से बचाव: इस क्षेत्र में जंगली जानवरों की समस्या हो सकती है। इसके लिए 'नायलॉन नेट' का उपयोग करना फसल को नगदी बनाने के लिए अनिवार्य है।
* सुखाना (Drying): चूंकि चकराता में नमी रहती है, इसलिए ताजे फल को सीधे सुखाने के बजाय सोलर ड्रायर का उपयोग करें। इससे अंजीर का रंग सुनहरा रहता है और बाजार में दाम 800-1200 रुपये प्रति किलो तक मिल सकता है।
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