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भगवान शिव की उपासना के लिए मासिक शिवरात्रि (प्रत्येक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी) और महाशिवरात्रि (साल में एक बार) के व्रत के नियम अत्यंत विशिष्ट और फलदायी होते हैं। शिव पूजा में शुद्धता और सात्विकता का बहुत महत्व है।
यहाँ शिवरात्रि व्रत के दौरान मान्य (करणीय) और वर्जित (निषेध) कार्यों की विस्तृत सूची दी गई है:
1. क्या मान्य है? (क्या करना चाहिए)
* पंचामृत अभिषेक: भगवान शिव का दूध, दही, घी, शहद और शक्कर (पंचामृत) से अभिषेक करना अत्यंत शुभ है।
* बेलपत्र और धतूरा: शिव जी को बेलपत्र (तीन पत्तियों वाला), धतूरा, भांग, शमी के पत्ते और सफेद फूल (जैसे आक या मंदार) अर्पित करें।
* चार पहर की पूजा: महाशिवरात्रि पर रात के चारों पहर (शाम, मध्य रात्रि, भोर और सुबह) की पूजा का विशेष विधान है। हर पहर में अलग-अलग द्रव्यों से अभिषेक होता है।
* जलाभिषेक: यदि कुछ और न हो, तो केवल गंगाजल या शुद्ध जल चढ़ाने से भी 'आशुतोष' (शीघ्र प्रसन्न होने वाले शिव) प्रसन्न हो जाते हैं।
* मंत्र जाप: पूरे दिन और रात्रि में 'ॐ नमः शिवाय' या 'महामृत्युंजय मंत्र' का मानसिक जाप करते रहें।
* रुद्राभिषेक: यदि संभव हो तो इस दिन घर या मंदिर में रुद्राभिषेक कराएं।
* सात्विक आहार: यदि पूर्ण उपवास संभव न हो, तो फल, दूध और मेवे का सेवन किया जा सकता है।
2. क्या वर्जित है? (क्या नहीं करना चाहिए)
शिव पूजा में कुछ चीजें ऐसी हैं जो अन्य देवताओं को प्रिय हैं, लेकिन शिव जी पर कभी नहीं चढ़ाई जातीं:
* तुलसी दल: भगवान शिव की पूजा में तुलसी का प्रयोग पूरी तरह वर्जित है (पौराणिक कथा के अनुसार जालंधर वध के कारण)।
* केतकी का फूल: भगवान शिव ने केतकी के फूल को अपनी पूजा से त्याग दिया था, इसलिए इसे कभी न चढ़ाएं।
* हल्दी और कुमकुम: शिव जी को हल्दी नहीं चढ़ाई जाती क्योंकि वे वैरागी हैं और हल्दी सौंदर्य का प्रतीक है। जलाधारी पर कुमकुम लगाया जा सकता है, लेकिन शिवलिंग पर नहीं।
* शंख से जल: भगवान शिव ने शंखचूड़ नामक असुर का वध किया था, इसलिए शिव जी को शंख से जल नहीं चढ़ाया जाता (कुछ विशेष अपवादों को छोड़कर)।
* नारियल पानी: नारियल अर्पित किया जा सकता है, लेकिन शिवलिंग पर नारियल के पानी से अभिषेक नहीं करना चाहिए।
* तामसिक भोजन: मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज का सेवन शिवरात्रि के दिन महापाप माना जाता है।
* शिवलिंग की पूरी परिक्रमा: शिवलिंग की परिक्रमा कभी पूरी नहीं की जाती। जहाँ से जल निकलता है (निर्मली या जलधारी), उसे लांघना नहीं चाहिए। हमेशा आधी परिक्रमा (चंद्राकार) ही करें।
3. व्रत और आहार के नियम
| श्रेणी | नियम |
|---|---|
| भोजन | अन्न, अनाज और दालें वर्जित हैं। केवल फलाहार (फल, कुट्टू, सिंघाड़ा, साबूदाना) मान्य है। |
| नमक | साधारण नमक की जगह केवल सेंधा नमक का प्रयोग करें। |
| सोना | शिवरात्रि की रात को सोना वर्जित माना गया है। जागरण कर शिव नाम का कीर्तन करना श्रेष्ठ है। |
| शुद्धता | काले रंग के वस्त्र पहनने से बचना चाहिए। हरा, सफेद या लाल रंग शुभ माना जाता है। |
विशेष टिप:
> महाशिवरात्रि के दिन बेलपत्र चढ़ाते समय ध्यान रखें कि पत्ता कटा-फटा न हो और उसका चिकना हिस्सा शिवलिंग की ओर रहे।
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