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अक्सर लोग समझते हैं कि शिवरात्रि साल में केवल एक बार आती है, लेकिन हिंदू पंचांग के अनुसार शिवरात्रि और महाशिवरात्रि में अंतर है:
1. मासिक शिवरात्रि (हर महीने)
साल में कुल 12 मासिक शिवरात्रि होती हैं।
* प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को 'मासिक शिवरात्रि' मनाई जाती है।
* भगवान शिव के भक्त हर महीने इस दिन व्रत रखते हैं और रात्रि में पूजन करते हैं।
2. महाशिवरात्रि (साल में एक बार)
साल में केवल एक महाशिवरात्रि होती है।
* फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को 'महाशिवरात्रि' कहा जाता है।
* धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था और इसी दिन शिव जी ने 'रुद्र' रूप धारण किया था।
* यह सभी शिवरात्रियों में सबसे प्रधान और अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
वर्ष की प्रमुख शिवरात्रियाँ
वैसे तो सभी 12 शिवरात्रियाँ महत्वपूर्ण हैं, लेकिन कुछ महीनों की शिवरात्रि का विशेष नाम और महत्व है:
| समय (महीना) | शिवरात्रि का नाम | विशेषता |
|---|---|---|
| फाल्गुन (फरवरी-मार्च) | महाशिवरात्रि | शिव-शक्ति मिलन का सबसे बड़ा उत्सव। |
| श्रावण (जुलाई-अगस्त) | सावन शिवरात्रि | कांवड़ यात्रा और जलाभिषेक के लिए प्रसिद्ध। |
| मार्गशीर्ष (नवंबर-दिसंबर) | प्रथमा शिवरात्रि | पौराणिक कथाओं के अनुसार इसे भी अत्यंत शुभ माना गया है। |
एक रोचक तथ्य:
> जिस प्रकार भगवान विष्णु के लिए एकादशी का महत्व है, उसी प्रकार भगवान शिव की कृपा पाने के लिए प्रदोष व्रत (त्रयोदशी) और शिवरात्रि (चतुर्दशी) का महत्व है।
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