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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए 1 जनवरी 2026 से बैंकिंग नियमों में बड़े बदलाव लागू किए हैं। अब बैंक अपनी मर्जी से कोई भी 'हिडन चार्ज' (Hidden Charges) या अनचाही सेवा ग्राहकों पर नहीं थोप पाएंगे।
यहाँ उन मुख्य तरीकों का विवरण दिया गया है जिनसे RBI ने बैंकों पर लगाम कसी है:
1. डार्क पैटर्न्स (Dark Patterns) पर पूर्ण प्रतिबंध
डिजिटल बैंकिंग ऐप्स और वेबसाइटों पर "डार्क पैटर्न्स" का उपयोग अब अवैध है।
* क्या बदला? पहले बैंक ऐप्स में ऐसे डिज़ाइन होते थे जो ग्राहकों को गलती से किसी बीमा या सर्विस पर क्लिक करने के लिए मजबूर करते थे। अब बैंकों को अपने इंटरफेस सरल बनाने होंगे।
* अनिवार्य सहमति: किसी भी अतिरिक्त सेवा (जैसे इंश्योरेंस या प्राइम बैंकिंग) को सक्रिय करने से पहले बैंक को ग्राहक से स्पष्ट और अलग से मंजूरी (Explicit Consent) लेनी होगी।
2. लोन प्री-पेमेंट चार्जेस का अंत
अक्सर लोग अपना कर्ज जल्दी चुकाना चाहते हैं, लेकिन बैंक उन पर भारी 'प्री-पेमेंट पेनल्टी' लगा देते थे।
* नया नियम: फ्लोटिंग रेट वाले पर्सनल लोन और MSME लोन पर अब कोई भी प्री-पेमेंट चार्ज नहीं लिया जा सकेगा।
* पारदर्शिता: बैंक को लोन एग्रीमेंट और Key Facts Statement (KFS) में सभी शुल्कों को पहले ही बताना होगा। जो शुल्क KFS में नहीं है, उसे बैंक बाद में नहीं वसूल सकता।
3. डिजिटल बैंकिंग में "सक्रिय सहमति" (Active Consent)
अब बैंक डिफ़ॉल्ट रूप से मोबाइल बैंकिंग या नेट बैंकिंग चालू नहीं कर सकते।
* अलग से अनुमति: खाता खोलते समय डिजिटल बैंकिंग सेवाओं के लिए अलग से टिक-बॉक्स या फॉर्म भरना होगा।
* बुनियादी सेवाओं का अधिकार: यदि कोई ग्राहक डिजिटल बैंकिंग नहीं चाहता, तो बैंक उसे चेकबुक या डेबिट कार्ड जैसी बुनियादी सुविधाओं से मना नहीं कर सकता।
4. अनचाही सेवाओं (Unsolicited Services) पर सख्ती
कई बार बैंक ग्राहकों को बताए बिना उनके खाते से SMS अलर्ट, कार्ड मेंटेनेंस या इंश्योरेंस के पैसे काट लेते हैं।
* रिफंड और पेनल्टी: यदि बैंक ने आपकी सहमति के बिना कोई सेवा सक्रिय की है और उसके पैसे काटे हैं, तो उसे न केवल वह पैसा वापस करना होगा, बल्कि ग्राहक को हर्जाना भी देना पड़ सकता है।
* रद्दीकरण (Cancellation): किसी सेवा को बंद करना उतना ही आसान होना चाहिए जितना उसे शुरू करना था।
बैंकिंग सेवाओं में बदलाव: एक तुलना
| सुविधा | पहले (पुरानी व्यवस्था) | अब (2026 के नए नियम) |
|---|---|---|
| हिडन चार्ज | नियम व शर्तों के बारीक अक्षरों में छिपे होते थे। | केवल KFS में लिखे चार्ज ही मान्य होंगे। |
| लोन बंद करना | जल्दी बंद करने पर 2-4% पेनल्टी। | फ्लोटिंग रेट लोन पर 0% पेनल्टी। |
| डिजिटल सेवाएं | बैंक द्वारा अपने आप चालू कर दी जाती थीं। | ग्राहक की 'सक्रिय सहमति' अनिवार्य। |
| ऐप इंटरफेस | भ्रमित करने वाले 'डार्क पैटर्न्स'। | पारदर्शी और यूजर-फ्रेंडली डिज़ाइन। |
अगर बैंक जबरदस्ती चार्ज वसूले तो क्या करें?
* बैंक लोकपाल (Ombudsman): सबसे पहले बैंक की शिकायत शाखा में करें। यदि 30 दिनों में समाधान न मिले, तो RBI के CMS (Complaint Management System) पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
* सबूत रखें: अपने पास बैंक द्वारा काटे गए चार्ज का स्टेटमेंट और उस सेवा के लिए अपनी 'अस्वीकृति' का प्रमाण रखें।
अगला कदम:
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